Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 20:1 न्यायियों 20:2 न्यायियों 20:3 न्यायियों 20:4 न्यायियों 20:5 न्यायियों 20:6 न्यायियों 20:7 न्यायियों 20:8 न्यायियों 20:9 न्यायियों 20:10 न्यायियों 20:11 न्यायियों 20:12 न्यायियों 20:13 न्यायियों 20:14 न्यायियों 20:15 न्यायियों 20:16 न्यायियों 20:17 न्यायियों 20:18 न्यायियों 20:19 न्यायियों 20:20 न्यायियों 20:21 न्यायियों 20:22 न्यायियों 20:23 न्यायियों 20:24 न्यायियों 20:25 न्यायियों 20:26 न्यायियों 20:27 न्यायियों 20:28 न्यायियों 20:29 न्यायियों 20:30 न्यायियों 20:31 न्यायियों 20:32 न्यायियों 20:33 न्यायियों 20:34 न्यायियों 20:35 न्यायियों 20:36 न्यायियों 20:37 न्यायियों 20:38 न्यायियों 20:39 न्यायियों 20:40 न्यायियों 20:41 न्यायियों 20:42 न्यायियों 20:43 न्यायियों 20:44 न्यायियों 20:45 न्यायियों 20:46 न्यायियों 20:47 न्यायियों 20:48



न्यायियों 20:26 का संदर्भ और उसका प्रभाव
यहोवा सेफेह के आघात के बाद इज़राइल के बचे-बचे लोग बेतेल पहुंचे और वहाँ गम्भीर प्रायश्चित्त में समय बिताया। इस्रायली लोग उन घटनाओं के प्रभाव से उबरने का प्रयास कर रहे थे—रोते हुए, उपवास करते हुए उन्होंने होमबलि और मेलबलि चढ़ाने की व्यवस्था की। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें समुदाय एक साथ मिलकर परमेश्वर के सामने अपनी निर्भरता और पाप के परिणामों को स्वीकार करता है, ताकि परमेश्वर के निर्देश के अनुसार पुनः निर्देशित हो सके।
मुख्य भाव: ईश्वर की इच्छा के अनुरूप पश्चाताप और सामूहिक पुनःस्थापना
यह पद यह संदेश देता है कि फिर से जीवन के मार्ग पर लौटना मानव社区 का प्राथमिक उत्तर है—कठोर परिणामों के बीच भी परमेश्वर की सेवकाई बनाए रखना आवश्यक है। उपवास, रोना और बलिदान—ये सब इस बात के संकेत हैं कि लोग अपने दिलों को 하나님 की पवित्रता के अनुरूप ढालना चाहते हैं। होंडबलि और मेलबलि चढ़ाना इस समय की आधिकारिक भेंट-समर्पण की परिपाटी है, जो यह दर्शाती है कि वे अपने व्यक्तिगत आराम से ऊपर उठकर परमेश्वर के नियमों के अनुरूप जीना चाहते हैं।
2-3 प्रमुख विषय
संबद्ध पवित्र ग्रंथ—संलग्न विचार
इस पाठ के साथ नीचे के संदर्भ मार्गदर्शन में देखें: न्यायियों 20:1-3 और 21:1— समुदाय की शिकायतों और उनकी प्रतिक्रिया पर केंद्रित है; यह दिखाता है कि सामाजिक विभाजन के समय तत्काल प्रार्थना और देव-आज्ञा का आग्रह कितना आवश्यक है। शायद यह पाठ दिखाता है कि हिंसा और असहयोग को रोकने के लिए पहले परमेश्वर की बात को सुना जाना चाहिए।
नीतिगत चिंतन
इस घटना से आज के पाठकों के लिए संदेश साफ है: संघर्ष के समय भी ईश्वर-आज्ञा पर टिके रहना चाहिए, अपने दुख-संकोच को प्रकट करते हुए भी समुदाय को एकजुट रखना चाहिए, और परमेश्वर को पहले रखना चाहिए। प्रार्थना और उपवास से मानवीय कमजोरी पर विजय पाई जा सकती है, और परमेश्वर की ओर से भेंट-समर्पण से जीवन-मार्ग लौट सकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेज और उनकी संक्षिप्त व्याख्या
- न्यायिए 20:1-3: समुदाय की शिकायत का स्वरूप और विपक्ष के बीच एकता की आवश्यकता। क्रॉस-रेफरेंस यह दर्शाती है कि समस्या समाधान के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन अनिवार्य है।
- न्यायियों 21:1-2: समुदाय के अंतर्गत बहुप्रश्न और क्षमायाचना के उपाय—परिवर्तन का एक नया चरण शुरू होता है।
- 1 शमूएल 7:6: उपवास और प्रार्थना के शक्ति-उल्लेख, जहाँ परमेश्वर की कृपा से उद्धार संभव होता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
न्यायियों 20:26 एक समुदाय की तबीयत का चित्र है जहाँ संकट के बीच भी परमेश्वर की दिशा में लौटना सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाती है। रोना, उपवास और बलिदान—ये तीनों मिलकर यह स्पष्ट करते हैं कि आंतरिक परिवर्तन और परमेश्वर के आदेश के अनुसार जीवन जीना ही शांति की कुंजी है।
सूचित नोट: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की मौलिक उद्धरणों का छोटा-सा पहचाना गया प्रयोग नीचे दिया गया है, यदि उपलब्ध हो तो:
“...उद्धरण उपलब्ध होने पर ही उद्धृत किया जाएगा”