Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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न्यायियों 3:12 — संदर्भ और प्रवेश
तब इस्राएलियों ने फिर यहोवा की दृष्टि में बुरा किया; और यहोवा ने मोआब के राजा एग्लोन को इस्राएल पर प्रबल किया, क्योंकि उन्होंने यहोवा की दृष्टि में बुरा किया था।
पाठ का तात्पर्य और परमेश्वर के प्रति विश्वास
यह पद इस्राएल के इतिहास की बारम्बार चैतन्य-घटाओं में से एक है, जहाँ वे बार-बार आत्म-विश्वास और कर्म-चेतावनी के बीच फँस जाते हैं। इस बार के परिणामस्वरूप देवता ने मोआब के राजा एग्लोन के साथ मिलकर इस्राएल पर हमला कराया ताकि वे यहोवा की आज्ञाओं की अवहेलना से उबर सकें। यह संदेश स्पष्ट करता है कि ईश्वर उन लोगों के पक्ष में जो उनकी राह छोड़ कर किया गया बुरा करते हैं, उन्हें सचेत और अनुशासनित करते हैं। भरोसा उनका नहीं रहता जो अपने रास्ते में पड़े पत्थरों से विचलित होकर गलत काम करते हैं; ईश्वर के वे जन जिन्हें वेदांत और वाचा के अनुरूप चलते देखना चाहते हैं, उन्हें दुष्चरित्रताओं के कारण स्पष्ट आशीर्वाद और संरक्षण मिल सकता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टीकरण
अनुशंसित संबंधित आयतें
1) न्यायियों 2:11–14 — यहीं से स्पष्ट होता है कि इस्राएलियों के बुरेपन पर प्रभु की करुणा और क्रोध एक साथ प्रत्यक्ष रहते हैं; वे यहोवा की प्रतिज्ञाओं के अनुसार उपाय करते हैं।
2) न्यायियों 3:7 — यहोवा के बारे में जागरूकता और मिसाल के रूप में विशेष चेतावनी; जिन्होंने ईश्वर से मुंह मोड़ा वे किस प्रकार दबे जा सकते हैं।
3) न्यायियों 3:12–14 (पुनरावलोचन) — यह बताता है कि दुष्कर्मों के कारण यहोवा किस प्रकार राज्य-युद्ध के माध्यम से अनुशासन सफल बनाते हैं।
पूर्व-पाठ से निष्कर्ष और दर्दनाक पाठ
यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने लोगों के आचरण पर सक्रिय नज़र रखते हैं और अवमाननापूर्ण मार्ग पर चलने पर वे उन्हें आवश्यक प्रभाव डालते हैं। यहूदियों के इतिहास में बार-बार देखा गया है कि प्रभु की शिक्षा और चेतावनी जीवन-परिवर्तन की कुंजी बनती हैं, ताकि उनके नाम के लिए पवित्रता बनी रहे।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
- परमेश्वर की दृष्टि में आने वाले समय में अपने आचरण की जाँच करें: क्या हम पुराने पथ पर चले जा रहे हैं, या ईश्वर की आज्ञाओं को मानने के लिए अपने कदम समाहित कर रहे हैं?
- सामाजिक और नैतिक चुनौतियों के बीच सत्य को ऐसे चलना चाहिए कि यह घृणा नहीं, बल्कि प्रेम और अनुशासन की प्रतिध्वनि दे।
- कठिन समय में भरोसा रखें कि परमेश्वर मार्ग दिखाते हैं और आवश्यकता अनुसार सहायता देते हैं, जब हम उनकी इच्छा के अनुसार चलना चुनते हैं।
एतिहासिक-टीका से संकेत
एग्लोन के विरुद्ध युद्ध की स्थिति यह दिखाती है कि परमेश्वर कभी-कभी साधारण मानव-युद्ध से परे योजना बनाते हैं, ताकि अपना काम पूरा कर सकें।
सूक्ष्म उद्धरण (यदि उपलब्ध)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रकाशित उद्धरणों में इस पाठ के विश्लेषण से संबंधित मौखिक अनुभाग मिलते हैं; कृपया उद्धरणों के स्थान पर विचार करें कि वे पाठ के अनुरूप कौन-से बिंदु स्पष्ट करते हैं।