Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 3:1 न्यायियों 3:2 न्यायियों 3:3 न्यायियों 3:4 न्यायियों 3:5 न्यायियों 3:6 न्यायियों 3:7 न्यायियों 3:8 न्यायियों 3:9 न्यायियों 3:10 न्यायियों 3:11 न्यायियों 3:12 न्यायियों 3:13 न्यायियों 3:14 न्यायियों 3:15 न्यायियों 3:16 न्यायियों 3:17 न्यायियों 3:18 न्यायियों 3:19 न्यायियों 3:20 न्यायियों 3:21 न्यायियों 3:22 न्यायियों 3:23 न्यायियों 3:24 न्यायियों 3:25 न्यायियों 3:26 न्यायियों 3:27 न्यायियों 3:28 न्यायियों 3:29 न्यायियों 3:30 न्यायियों 3:31



न्यायियों 3:29 का अर्थ और संदर्भ
इस पद का सीधा अभिप्राय है: उस समय इन्होंने मोआबियों के लगभग दस हजार सैनिकों को मार डाला; वे सब शक्तिशाली और बहादुर थे, परंतु उनमें से एक भी बच नहीं पाया। यह कथन एक निर्णायक युद्ध-घटना का विवरण है जिसमें इस्राइल के विरोधियों पर ईश्वर की सहायता से विजय प्राप्त होती है।
संदर्भ और पृष्ठभूमि
न्यायियों के पुस्तकों में मिस्र-या कसी तरह का एक विशिष्ट युग है, जब इस्राइल धर्मपरायण नेताओं के नेतृत्व में परमेश्वर से सहायता मांगकर अपने शत्रुओं पर विजय पाते हैं। इस संदर्भ में मोआब, एमॉन, और अन्य शत्रु बार-बार इस्राइल के प्रतिद्वंद्वी बने रहते हैं। इस verse में हम एक स्पष्ट और एक निर्णायक क्षण देखते हैं जब मोआब के लोग, जिन्हें “हष्ट पुष्ट और शूरवीर” कहा गया है, परन्तु उनके विरुद्ध परमेश्वर के चमत्कारिक समर्थन से इस्राइल ने बड़ी जीत पाई।
व्याख्या संबंधी बिंदु
मूल विचारों के साथ 2-3 cross-reference (संक्षेप explanation के साथ)
1) न्यायियों 3:12-30 में ओथनी के कारण इस्राइल की विजय का समायोजन होता है—यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ किस तरह क्रोध और दया, दोनों के साथ चलते हैं। छोटे-से संकेत इस बात को दर्शाते हैं कि परमेश्वर की योजना में एक निश्चित समय पर उद्धार आता है।
2) भजन 60:12 में कहा गया है कि “जो सच में हमारी सहायता कर सकता है, वह हमारा परमेश्वर है”—यह उद्धार का मूल तर्क दोहराता है, कि ताकत से नहीं बल्कि परमेश्वर की कृपा से विजय संभव है।
3) संहिता 7:9 में इस बात पर बल है कि परमेश्वर अपने से प्रेम रखने वालों के लिए विपदाओं में भी निकासी देता है; यह घटना उसी विश्वास की पुष्टि है जो युद्ध के मैदान पर भी काम आता है।
हिंदी पाठ के अनुरूप एक संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse यह बताती है कि परमेश्वर की रणनीति और क़िस्त के अनुसार महान शक्तियाँ भी एक क्षण में हार मान सकती हैं यदि वे ईश्वर के उद्देश्य और वचनों से विमुख हों। विश्वास और आज्ञापालन परमेश्वर की सहायता की कुंजी हैं, और विजय धर्म के अनुसार आशीषित होती है।
प्रयोजन-श्रेणी (Practical takeaway)
आवश्यक उद्धरण-आधार
यहां इतिहास-आधारित सार्वजनिक-डायरे में संकलित मिश्रण के अनुसार, मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचार मिलते हैं। यह सामग्री पूर्णत: स्वतंत्र है, लेकिन नीचे उनके विचार-सार को संदर्भ के रूप में संक्षेप में उल्लेखित किया गया है:
MATTHEW HENRY के विचारों के अनुसार यह विजय यह बताती है कि परमेश्वर अपने अनुयायियों के लिए अस्थिरताओं के बीच भी न्याय करता है और शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध अपनी कृपा दिखाता है।
ALBERT BARNES के अनुसार यह न्याय इस बात की याद दिलाती है कि शत्रु कितने भी मजबूत क्यों न हों, परमेश्वर की कृपा असुरक्षित नहीं रहती और विश्वासियों का खिताब सुरक्षित है।
ADAM CLARKE ने भी यही दर्शाया है कि इस तरह की कटु पराजयें परमेश्वर के उद्देश्य की पुष्टि के तौर पर आती हैं, ताकि ईश्वर की महिमा प्रकट हो और इस्राइल का विश्वास बढ़े।
नोट: ऊपर के समापन भाग में यदि किसी भी उद्धरण-वाक्य का उल्लेख किया गया हो तो सटीक शब्द, यदि उपलब्ध हों, वही उद्धृत किए गये हैं।