Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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न्यायियों 3:17 — संदर्भ और पाठ कीImmediate स्थिति
यह पद न्यायियों के रोशनी वाले समय की ऐसी घटना को दर्शाता है जब इजराइल ने ईश्वर के हाथ से बचे रहने के लिए एक राजा नहीं माना, बल्कि उसकी सेवाओं के लिए एक मित्र-राजा का सहयोग माँगा। यहाँ एग्लोन, Moab का राजा, के पास वह भेंट पहुंचती है—एक मोटा पुरुष के साथ। यह घटना बताती है कि मिस्र-एग्लॉनों के समय ईश्वर की योजना किस प्रकार मानवीय निर्णयों और दांव-पेच से गुजरती है।
पवित्रता, विश्वास और परमेश्वर की चाल
इस पाठ में परमेश्वर की सत्ता प्रत्यक्ष रूप से चित्रित नहीं है, परन्तु यह संकेत देता है कि लोगों की नीति-कौशल और पड़ोसियों के साथ गठबंधन भी परमेश्वर के उद्देश्य के भीतर आते हैं। न्यायियों 3:17 में दान-स्वरुप भेंट, एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें राजा एग्लोन को एक महत्त्वपूर्ण भूमिका दी जाती है—परिणामस्वरूप यह ईश्वर के कहे मार्ग पर नहीं, बल्कि मानव-तर्क के अनुसार लगता है। यह बताता है कि विश्वास के रास्ते में एकाग्रता और सत्यनिष्ठा कितनी महत्त्वपूर्ण है, ताकि लोग अपनी योजनाओं को परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप ढाल सकें।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टि
Related passages
1) न्यायियों 3:12–30 में ओधन, ईश-युद्ध और शांति के संयोजन का प्रकटन है; यह दिखाता है कि परमेश्वर किस प्रकार इज़राइल की कमजोरियों के बीच भी प्रवेश करते हैं।
2) न्यायियों 2:7–23 में "यहोवा के उपदेश" और आंतरिक असंतोष के कारण लोगों के गिरने के चक्र का उल्लेख है; यह पाठ प्रेरित करता है कि भरोसा परमेश्वर पर ही टिके।
3) बाइबल में अन्य जगहों पर बाहरी समर्पण और आंतरिक समर्पण की तुलना: 1 समूएल 9–10 में राजा के चयन के समय धर्म-निष्ठा का महत्व आता है।
आज के समय में अनुप्रयोग
- जब हमारे जीवन में बाहरी सहायता या गठबंधनों की जरूरत हो, हमें पहले परमेश्वर की योजना को समझने की कोशिश करनी चाहिए, न कि केवल अपने राजनीतिक या सामाजिक लाभ की।
- विश्वास की मिसाल बनाकर देखें कि क्या हम अपनी योजनाओं में परमेश्वर के मार्ग को शामिल कर रहे हैं, या केवल अपने लाभ और मान-प्रतिष्ठा के लिए कर रहे हैं।
- परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, धैर्य और विवेक से काम लें; तत्काल निर्णय लेने से पहले परमेश्वर के संकेतों पर विचार करें।
सार-संवाद
यह पाठ दर्शाता है कि धैर्य, विश्वास और ईश्वर-निष्ठा कितने महत्त्वपूर्ण हैं, विशेषकर उनके आधीन who operate amid political pressures. The narrator emphasizes that human plans are often tested against divine purposes.
महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke):
उद्धरण एकदम शब्दशः नहीं, पर उनकी प्रवृत्ति—जो व्यक्ति परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप जीवन जीने पर बल देती है—यहाँ एकीकृत रूप में संकलित है।
यदि उपलब्ध हो, तो छोटे उद्धरण के रूप में उद्धृत किया जाएगा: "याकि लोग अपनी योजनाओं को परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप ढालें" (अनुकरणीय विचारधारा के स्वरूप से).