Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 3:1 न्यायियों 3:2 न्यायियों 3:3 न्यायियों 3:4 न्यायियों 3:5 न्यायियों 3:6 न्यायियों 3:7 न्यायियों 3:8 न्यायियों 3:9 न्यायियों 3:10 न्यायियों 3:11 न्यायियों 3:12 न्यायियों 3:13 न्यायियों 3:14 न्यायियों 3:15 न्यायियों 3:16 न्यायियों 3:17 न्यायियों 3:18 न्यायियों 3:19 न्यायियों 3:20 न्यायियों 3:21 न्यायियों 3:22 न्यायियों 3:23 न्यायियों 3:24 न्यायियों 3:25 न्यायियों 3:26 न्यायियों 3:27 न्यायियों 3:28 न्यायियों 3:29 न्यायियों 3:30 न्यायियों 3:31



न्यायियों 3:5 का पठन-प्रारम्भ और संदर्भ
यहोवा का चयनित लोगों के साथ अपने योजना के क्रम में, इस्राएल के कुछ निडर राजा-पथ के बजाय अस्थिर पड़ोसियों के साथ तालमेल विकसित होते दिखते हैं। न्यायियों 3 अध्याय के इस अंश में यह दर्शाया गया है कि इस्राएली कनानियों, हित्तियों, एमोरियों, परिज्जियों, हिव्वियों और यबूसियों के बीच बस गए; वे उनके नगरों में रहने लगे और उनकी नीतियों, उपासना-पद्धतियों, और कर्म-काण्डों को अपनाने लगे। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि परमेश्वर की चुनी हुई जनता अपने आस-पड़ोस के प्रभाव से कमजोर पड़ सकती है जब वे अपने धर्म और एकेश्वर-भक्ति से दूर जाते हैं। भिन्न-भिन्न संस्करणों में इसे यह भी वर्णित किया गया है कि इस्राएली इनजातियों के भीतर बसकर उनके देव-आश्रयों के साथ सह-अस्तित्व बनाते हैं।
ईश्वर की महिमा और विश्वास का संकेत
यह पंक्तियाँ बताती हैं कि परमेश्वर अपने लोगों के भीतर भी घुल-घुलकर रहने वाले खतरे को कैसे पहचानते हैं—विश्वास और भक्ति की कमी से सम्भव है कि वे अन्य देवताओं के प्रभाव में आ जाएँ। इस पाठ से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का उद्देश्य यह है कि इस्राएल अपने धर्म के भीतर स्थिर रहे, ताकि वे राष्ट्रों के सगे-सम्बंधों के कारण पथभ्रष्ट न हों। यह न केवल एक ऐतिहासिक सच है, बल्कि आज के भक्त के लिए भी चेतावनी है कि हमारा आध्यात्मिक जीवन बाहरी प्रभावों से कैसे निर्भर रहता है।
महत्त्वपूर्ण शब्दों व imagery की स्पष्टता
• बस गए: यहाँ "बसना" का आशय है सामाजिक, घरेलू और धार्मिक मिलजुल कर रहने से है। यह स्थायित्व को दर्शाता है, जो अस्थिरता और विश्वास-लोप से खतरे में पड़ सकता है।
• कनानियाँ, हित्तियाँ, एमोरियाँ, परिज्जियाँ, हिव्वियाँ, यबूसियाँ: ये पड़ोसी राजनियाँ हैं जिनके कारण इस्राएल पर भिन्न-भिन्न आचार-विचार, पूजा-पद्धतियाँ और सामाजिक रीति-रिवाज़ प्रभाव डालते हैं।
संबद्ध पाठ (पड़ोस के प्रभाव के बारे में)
2 सम्वत और 5:31 जैसे पाठ यह संकेत देते हैं कि पड़ोसियों के साथ निकटता से भी इस्राएल के धार्मिक-बोध पर प्रभाव पड़ सकता है। यह स्पष्ट रूप से बताता है कि दूरी और भावनात्मक दूरी दोनों महत्वपूर्ण हैं, ताकि लोग सत्य की ओर लौटते रहें।
कुछ सत्यापित क्रॉस-रेफरेंसेस
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि पड़ोसियों के साथ सह-अस्तित्व बनते समय ईश्वर के लिए एक शुद्ध आराधना और नैतिकता बनाए रखना कितना आवश्यक है।
आज के पल के लिए आवेदन
– अपने जीवन में धार्मिक-निष्ठा को एक स्थिर आधार बनाकर रखें। परस्पर संवाद और सामाजिक दबाव के बावजूद ईश्वर की एकत्वप्रियता और उसकी सेवा को प्राथमिकता दें।
– यह याद रखें कि बाह्य संसार की नीतियाँ और रीति-रिवाज हमारे आंतरिक विश्वास-विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं; इसलिए मौलिक विश्वास-निष्ठा को बनाए रखना अनिवार्य है।
– बच्चों और युवा पीढ़ी के लिए यह भी एक चेतावनी है कि वे विश्व-प्रचलित प्रभावों के बीच अपनी पहचान और सम्मानित धर्म-कर्म को दृढ़ बनाए रखें।
शब्द-संसोधन और उद्धरण संदर्भ
यह पाठ विशिष्ट रूप से, परमेश्वर के चयनित लोगों के भीतर बाह्य प्रभावों के खतरे को उजागर करता है।
प्रमुख टिप्पणीकारों के संकलन से संकल्पना:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke ( public-domain ) के दृष्टिकोण एकत्रित करते हुए यह निष्कर्ष निकलता है कि धार्मिक-निष्ठा की कमी से आंतरिक गिरावट होती है, जो फिर से धार्मिक-आयामों पर विपरीत प्रभाव डालती है। उदाहरण के लिए, Henry ने अक्सर चेतावनी दी है कि "मन के होश न खोना" और Clarke ने इस प्रकार कहा है कि इस्राएल की गलत धारणाओं से बचना आवश्यक है। Barnes के मान्य विचारों के अनुसार, पड़ोसियों के प्रभाव से दूरी बना कर रखना एक नैतिक कर्तव्य है। इन तीनों के संकलन से एक संयुक्त, संतुलित संदेश निकलता है: परमेश्वर की सेवा में दृढ़ता और पवित्र आचार-व्यवहार को प्राथमिकता दें। (नोट: यदि उपलब्ध हो तो इन विद्वानों के छोटे-से-छोटे उद्धरण सीधे उद्धृत किए जा सकते हैं; यहाँ समन्वय इस भाव से प्रस्तुत किया गया है।)