Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 3:1 न्यायियों 3:2 न्यायियों 3:3 न्यायियों 3:4 न्यायियों 3:5 न्यायियों 3:6 न्यायियों 3:7 न्यायियों 3:8 न्यायियों 3:9 न्यायियों 3:10 न्यायियों 3:11 न्यायियों 3:12 न्यायियों 3:13 न्यायियों 3:14 न्यायियों 3:15 न्यायियों 3:16 न्यायियों 3:17 न्यायियों 3:18 न्यायियों 3:19 न्यायियों 3:20 न्यायियों 3:21 न्यायियों 3:22 न्यायियों 3:23 न्यायियों 3:24 न्यायियों 3:25 न्यायियों 3:26 न्यायियों 3:27 न्यायियों 3:28 न्यायियों 3:29 न्यायियों 3:30 न्यायियों 3:31



न्यायियों 3:8 पर मुख्य बिंदु: इस्राएल में असमर्थित-व्यवहार का परिणाम और परमेश्वर की दया का पुनरुद्धार
तब यहोवा का क्रोध इस्राएलियों पर भड़का, और उसने उनको अरम्नहरैम के राजा कूशन रिश्आतइम के अधीन कर दिया; सो इस्राएली आठ वर्ष तक कूशन रिश्आतइम के अधीन में रहे।
साक्ष्य-संदर्भ और साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
यह अध्याय नयायियों के क्षणिक, चक्रवृत्ति वाले पाठ का एक उदाहरण है: इस्राएल के विश्वासघात के कारण परमेश्वर ने उनके लिए दखलअंदाजी की, जिससे वे पड़ोसी राज्यों के शासन के अधीन आ जाएँ। कथा-शैली में यह बार-बार दोहरता है कि जब राष्ट्र अपने परमेश्वर से भटकता है, तब वह उसे दण्ड देता है और उनका उद्धार भी उसी क्रम में आता है जब वे पश्चात्ताप करते हैं। इस verse में क्रोध का कारण स्पष्ट है: इश्वर ने इस्राएल के सहज विश्वासघात को देखा और उन पर नियंत्रण स्थापित किया। साथ ही, यहूद के इतिहास में यह एक चिर-परिचित पाठ है—नैतिक-धार्मिक चेतावनी और कृपा-प्राप्ति का चक्र।
केंद्रीय theological significance (देवीय-धर्मशास्त्रीय महत्त्व)
1) प्रभु के न्याय के कारण: परमेश्वर अपने लोगों को चेतावनी देता है कि उनके पथ निर्बाध नहीं हैं; वे अवज्ञा में जाएँ तो यह परिणामस्वरूप दण्ड अनुभव करेंगे।
2) दया की पुनःस्थापना का ढांचा: आठ वर्षों की गुलामी के बाद प्रेरित-परिणामस्वरूप यहूद व्यवस्था में उद्धारक-काल का आरम्भ होता है; यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने दयालु वचन को नहीं भूलता और राजा-घंभीर समय के बाद भी पुनः प्रताप दिखाता है।
अन intertwined cross-References (संघ-संबंधी संदर्भ)
इन संदर्भों का सार यह है कि पथभ्रष्टि के समय प्रतिफल स्पष्ट होते हैं, पर परमेश्वर कृपा के साथ उद्धार का रास्ता भी खोलता है।
चिंतन-प्रश्न (reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse उन लोगों के लिए एक स्पष्ट स्मरण है जो परमेश्वर के साथ अपने संबन्ध को भुलाकर जीवन के रास्ते स्वतंत्र रूप से चुनते हैं। परन्तु यह भी दिखाता है कि परमेश्वर का दयालु साहचर्य तब फिर से प्रकट होता है जब लोग पश्चात्ताप के रास्ते पर लौटते हैं। इस चक्र-चाल के पीछे एक स्थायी सत्य है: विश्वास-निष्ठा और एकात्मता में ही जीवन की स्थिरता ও उद्धार संभव है।
उद्धृत टिप्पणीकारों के संकेत (यदि उपलब्ध हों)
कॉन्टेक्स्ट की समरूपता में, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रचलित टिप्पणी-रेखाओं से संकेत मिलते हैं, जिनमें से कुछ उनके स्पष्ट उद्धरणों के रूप में छोटे-से हिस्से मिलते हैं। यह साइट इन दृष्टांतों को संक्षेप में समाहित करती है; पूर्ण उद्धरण हर जगह नहीं दिए जाते।
नोट: अगर आप चाहें, तो मैं प्रत्येक टिप्पणीकार के छोटे-से उद्धरणों को विशिष्ट स्थानों के साथ दे सकता/सकती हूँ, ताकि पाठक उनके तात्पर्य को सीधे समझ सकें।