लूका 18:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं तुम से कहता हूँ, कि वह दूसरा नहीं; परन्तु यही मनुष्य धर्मी ठहरा और अपने घर गया; क्योंकि जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।”

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लूका 18:14 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 18:14 — सत्यान्वेषी धर्म और दया की दृष्टि

यह पद यीशु के उपदेशक्रम का एक भाग है जहाँ लोग प्रार्थनागृह में आकर एक-एक अपनी-अपनी धर्मिता दिखाने की कोशिश करते हैं। एक कर-कराकर भीड़ में से एक चोर-चालक नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक कर वसूलकर्ता कहे जाने वाले लोक-जन अपने पाप के भीतर विनय से प्रार्थना करता है। यीशु इस संदर्भ में कहते हैं कि जो खुद को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा, और जो खुद को छोटा बनाएगा, वही बड़ा किया जाएगा।

परमेश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से स्पष्ट बातें

  • दलित-आत्म-निर्भरता बनाम परमानंद-आत्म-समर्पण: यह संदेश दिखाता है कि ईश्वर उन लोगों को सम्मानित करते हैं जो अपने आप को नहीं, बल्कि उनकी दया और विश्वास को मानते हैं।
  • धर्मिता का असली मान: बाहरी रीति-रिवाज और बड़े शब्दों से नहीं, बल्कि मन की विनय और सच्चे हृदय से किया गया पुकार ईश्वर को स्वीकार्य होता है।

प्रमुख शब्दों और चित्रों की स्पष्टता

“जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा” का अर्थ है- जिनमें अहंकार, महानता का दिखावा है, वे अंततः विनष्ट होंगे। “जो अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा” का आशय है— विनम्रतापूर्ण मनोभाव और ईश्वर के प्रति पहला स्थान देना। यह एक अंतःकरणीय माप है, न कि सामाजिक पद या औपचारिकता का प्रश्न।

सम्बंधित पथ: cross-references

1) मत्ती 23:12 — जो अपने आप को ऊँचा करेगा, उसे nieder- किया जाएगा; जो अपने आप को छोटा करेगा, वही ऊँचा किया जाएगा। यह यूं ही नहीं कहा गया, बल्कि यीशु के मार्ग-दर्शन का एक संगत पाठ है।

2) याकूब 4:6 — परमेश्वर दया से उच्च और अहंकार से नीचे रहता है; परन्तु वह दीन-हृदयों को घृणा नहीं देता। यह बताता है कि विनय परमेश्वर की नज़रों में प्रिय है।

3) रोम 12:16 — एक-दूसरे के साथ सहनशील बनो, घमण्डी न हो; दूसरों के साथ विनम्रता दिखाओ। जीवन के समाजिक आचरण में यह उद्धार की भावना स्थिर करता है।

पाठ के आधुनिक अनुप्रयोग

आज के धार्मिक जीवन में भी यह संदेश प्रेरित करता है कि मौक़े-पर-झुकाव, बाहर की दिखावट पर नहीं, बल्कि आंतरिक विनम्रता और ईश्वर के साथ सच्चे-विश्वास पर टिके रहना चाहिए। सेवा-योग्यता, मोल-भाव, और दूसरे के हित की विचारशीलता वही असली धर्म है जिसे परमेश्वर महत्व देता है।

छोटी-सी समरी

लूका 18:14 में Jesus highlighting करता है कि धर्म के सही माप के लिए मन की विनम्रता और ईश्वर-भक्ति सबसे महत्वपूर्ण है— न कि बाहरी दिखावा। जो आत्म-गौरव से परे होकर स्वयं को छोटा मानता है, वही अंततः महान माना जाएगा।

इतिहासिक-आत्मकथ्य का संदोह

यह विचार कुछ पुराने टिप्पणीकारों के भीतर स्थिर रहा है। Matthew Henry कहते थे कि असल दिव्यता विनम्रता और विश्वास में निहित है; Albert Barnes ने इसे स्पष्ट किया कि धार्मिक श्रेष्ठता का वास्तविक परीक्षण हर दिन के आम जीवन में है; Adam Clarke ने भी विनम्रता को आंतरिक धर्म का मूल माना।

प्रत्यक्ष उद्धरण (यदि प्रयुक्त):

Matthew Henry के संदर्भ में: “...विनम्रता ही वह आत्मा है जिसमें परमेश्वर का सम्मान है।”

Albert Barnes के संदर्भ में: “धर्म के वास्तविक महत्त्व को नापना है— क्या हम अपने आप को बड़ा दिखते हैं, या ईश्वर के सामने छोटे रहते हैं?”

Adam Clarke के संदर्भ में: “जो अपने आप को छोटा बनाए, वही परमेश्वर के सामने बड़े स्थान पाएगा।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 18:14 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।”

लूका 16:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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उसने उनसे कहा, “तुम तो मनुष्यों के सामने अपने आप को धर्मी ठहराते हो, परन्तु परमेश्‍वर तुम्हारे मन को जानता है, क्योंकि जो वस्तु मनुष्यों की दृष्टि में महान है, वह परमेश्‍वर के निकट घृणित है।

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नीतिवचन 29:23 (HINIRV) »
मनुष्य को गर्व के कारण नीचा देखना पड़ता है, परन्तु नम्र आत्मावाला महिमा का अधिकारी होता है। (मत्ती 23:12)

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