Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 18:1 लूका 18:2 लूका 18:3 लूका 18:4 लूका 18:5 लूका 18:6 लूका 18:7 लूका 18:8 लूका 18:9 लूका 18:10 लूका 18:11 लूका 18:12 लूका 18:13 लूका 18:14 लूका 18:15 लूका 18:16 लूका 18:17 लूका 18:18 लूका 18:19 लूका 18:20 लूका 18:21 लूका 18:22 लूका 18:23 लूका 18:24 लूका 18:25 लूका 18:26 लूका 18:27 लूका 18:28 लूका 18:29 लूका 18:30 लूका 18:31 लूका 18:32 लूका 18:33 लूका 18:34 लूका 18:35 लूका 18:36 लूका 18:37 लूका 18:38 लूका 18:39 लूका 18:40 लूका 18:41 लूका 18:42 लूका 18:43



लूका 18:29 का संदर्भ और अर्थ
इस अवसर पर यीशु प्रेरितों से बोल रहे हैं, जब वे त्याग-त्याग और सहनशीलता के मूल्य पर विचार कर रहे थे। पूर्ववर्ती वाक्यों में उन्होंने किसी के लिए परमेश्वर के राज्य की इच्छा के पीछे विशिष्ट, सांसारिक संबंधों या संपत्ति के मोह को छोड़ देने का महत्त्व दिया था। इस verse में यीशु स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर के राज्य के लिए जो लोग घर-परिवार, पति/पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या बच्चे छोड़ दें, वे अनुदान, इनाम और प्रतिष्ठा से नहीं चूकेंगे।
मुख्य विचार
कहने का तात्पर्य यह है कि परमेश्वर के राज्य के लिए दिया गया समर्पण और विश्वास-यात्रा सांसारिक रिश्तों के प्रतिरोध को पार कर सकता है। पूजा-प्रकृति और समाजी अपेक्षाओं के सामने, परमेश्वर के साथ कदम मिलाने का आश्वासन दिया गया है: जो भी त्याग प्रदान करेगा, उसे इस दुनिया में भी और आने वाले युग में अधिकतर लाभ मिलेगा—यहाँ नहीं, वहाँ, रिश्तों के अदल-बदल के कारण नहीं, बल्कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के कारण।
2–3 प्रमुख विषय
संदर्भ-सम्बन्ध
- मलाकी 3:10 में ईश्वर के देखते हुए प्रचलित आशीषों का संदेसा; - मसीह के घर-परिवार के साथ एकाग्रता की शिक्षा (मत्ती 6:33); - लूका 9:23–24, जहाँ स्वयं से ज्यादा परमेश्वर की इच्छा को प्राथमिकता देने की शिक्षा दी गई है।
संकेत-रेखाएं: ये उद्धरण पूर्ण वाक्य नहीं हैं, पर ये समझाते हैं कि परमेश्वर के राज्य के लिए किए गया त्याग, जीवन के दैनिक निर्णयों को नया अर्थ देता है—आत्मिक बजट और संसार की चिंता के बीच संतुलन बनता है।
व्यावहारिक विचार
1) अपने जीवन-निर्णयों में पहले ईश्वर की इच्छा को प्राथमिकता दें; 2) रिश्तों की रक्षा करते हुए भी, प्रभु की बुलाहट के अनुसार आगे बढ़ें; 3) दैहिक सुरक्षा से अधिक परमेश्वर के राज्य की सुरक्षा पर निर्भरता विकसित करें।
संक्षेप
यही नहीं कि त्याग स्वयं में मूल्यहीन है, बल्कि वह परमेश्वर के आशीषण और राज्य की अनुग्रह-यात्री के रूप में जीवन का नया स्वर देता है। जो परमेश्वर के राज्य के लिए घर-परिवार या संपत्ति छोड़ते हैं, उन्हें भविष्य में विविध प्रकार के आशीर्वाद मिलेंगे—यह एक आध्यात्मिक आह्वान है, जिसका उद्देश्य विश्वासपूर्ण यात्रा को मजबूत करना है।
सीधी उद्धृत उद्धरण (केवल संदर्भित शर्तों के अनुरूप)
“हाँ, मैं तुम से सच कहता हूँ, ऐसा कोई नहीं जिस ने परमेश्वर के राज्य के लिये घर, या पत्नी, या भाइयों, या माता-पिता, या बाल-बच्चों को छोड़ दिया हो।”