Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 18:1 लूका 18:2 लूका 18:3 लूका 18:4 लूका 18:5 लूका 18:6 लूका 18:7 लूका 18:8 लूका 18:9 लूका 18:10 लूका 18:11 लूका 18:12 लूका 18:13 लूका 18:14 लूका 18:15 लूका 18:16 लूका 18:17 लूका 18:18 लूका 18:19 लूका 18:20 लूका 18:21 लूका 18:22 लूका 18:23 लूका 18:24 लूका 18:25 लूका 18:26 लूका 18:27 लूका 18:28 लूका 18:29 लूका 18:30 लूका 18:31 लूका 18:32 लूका 18:33 लूका 18:34 लूका 18:35 लूका 18:36 लूका 18:37 लूका 18:38 लूका 18:39 लूका 18:40 लूका 18:41 लूका 18:42 लूका 18:43



सीधे अर्थ की बात
लूका 18:33 में Jesus का यह बयान भविष्यवाणी करता है कि वह हमारे सामने कष्ट उठाकर क्रूस पर मरेगा, फिर मरकर तीसरे दिन जी उठेगा। यह उद्धार का निश्चय है—दुख-संहार के बाद जीवन की विजय का प्रमाण।
पृष्ठभूमि और प्रसंग
येशु ने अपनी नगर यात्रा के अंत में बार-बार बतलाया कि पुत्र मनुष्य को यह विपदा कभी-कभी संभव है: लोगों के साथ विवाद, प्रतिरोध, और रोके-रुकाव के बीच उसके मानवीय कष्ट संदर्भित हैं। यहाँ लक्ष्य यह है कि शिष्य यह समझ लें कि मृत्यु से पहले उसे कष्ट उठाने होंगे और फिर आत्म-जीवन की महिमा प्रकट होगी। इस वचन में मृत्यु-द्वार को पार कर जी उठना एक निर्णायक मोड़ है, जो भगवान कीPlan की पूर्णता को दर्शाता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
2–3 ठोस cross-references (संकेतार्थ)
– मत्ती 20:19: पुत्र मनुष्य को नेताओं के हाथ मिलेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा; यह ठहरता है कि उद्धार का क्रम पूर्व निर्धारित है।
– मरकस 10:34: वे उसे क्रूस पर चढ़ाने, मारने और जी उठने के बारे में स्पष्ट कहते हैं; क्रूस-यात्रा का क्रम विश्वास को दृढ़ बनाता है।
– योहन 2:19–22: Jesus ने अपने शरीर की बर्णन दी है कि वह मंदिर को तीन दिन में फिर से बना देगा; यह प्रतीक के रूप में जी उठने की प्रेरणा देता है।
कहानी के भीतर विषयगत निष्कर्ष
यहाँ उद्धार का संदेश स्पष्ट है: दुख के बीच भी ईश्वर का उद्देश्य पूरा होता है; मृत्यु पर पराजय नहीं, बल्कि जीवन की सत्ता आती है। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि कठिनाइयों में भी विश्वास नहीं टूटना चाहिए—क्योंकि अंतिम विजय भगवान के द्वारा है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
– कठिन समय में आशा बनाए रखें, क्योंकि जी उठना एक दिव्य लक्ष्य है।
– अपने दुखों के बीच प्रभु की योजनाओं पर भरोसा करें; उनका उद्देश्य हमें नए जीवन में ले जाता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (नोट)
यहां तक कि Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के किसी संक्षिप्त ठीक-ठीक उद्धरण उपलब्ध होते तो दिये जाते; इस पाठ के लिए मौलिक टिप्पणी एकीकृत रूप से प्रस्तुत की गई है ताकि स्मरणीय विचार स्पष्ट रहें।
चलते-चलते एक संक्षिप्त सार
येशु ने जो कहा, वह उद्धार की योजना का केंद्रीय तथ्य है: पीड़ा के बाद जीवन की विजय। यह हमें विश्वास, धैर्य और निर्भरता की धारा में खड़ा करता है—ताकि हम जानें कि परमेश्वर के शासन में विपदा भी पूर्णता से गुजरकर ही पूरी होती है।