मत्ती 27:63 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“हे स्वामी, हमें स्मरण है, कि उस भरमानेवाले ने अपने जीते जी कहा था, कि मैं तीन दिन के बाद जी उठूँगा।

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मत्ती 27:63 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 27:63 का संदर्भ: भरमानेवाले के स्मरण और भविष्यवाणी

इस पंक्ति में चरितार्थ होता है कि जब यीशु को क्रूस पर चढ़ाने के बाद उनके अनुयायी और भीड़ भयभीत थी, तब कुछ प्रधान धर्मी और पतिव्रत खड़े हुए। वे इस बात की स्मृति दिलाते हैं कि यीशु ने अपने जीते जी कहा था कि तीन दिन के भीतर वह जी उठेंगे। यह स्मरण यह जताता है कि सत्यता के विपरीत गलत धारणाओं और डर के समय भी परमेश्वर की योजना आगे बढ़ती है।

ईश्वर और विश्वास के बारे में यह टेक्स्ट क्या बताता है

इस verse से स्पष्ट होता है कि ईश्वर की योजना मानवीय अस्थिरता से ऊँची है। यीशु की भविष्यवाणी स्पष्ट है, परन्तु राजधानी स्थान पर उसे क्रूस का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी उनके समर्थक और विरोधी दोनों इस तथ्य को जानते हैं किJesus ने कहा था कि वह पुनर्जीवित होगा; यह उद्धार का सत्य है जो मृत्यु पर पराजय को दिखाता है। यह पाठ विश्वास की दृढ़ता की मांग करता है कि परमेश्वर के शब्दों में स्थिरता है, भले ही परिस्थिति कुछ भी हो।

महत्वपूर्ण शब्दों/छवि की स्पष्टता

  • भरमानेवाला: एक ऐसा व्यक्ति जिसे धोखे या भ्रम में डालना कहा जाता है; यहाँ यह इशारा है कि यीशु की मृत्यु के समय शंका और विचारशीलता एकत्र थीं, परन्तु भविष्यवाणी सत्य बनी।
  • जी उठना: जीवन का महान चमत्कार— मृत्यु पर विजय। यह मरते हुए विश्वास के लिए आशा का स्रोत है कि परमेश्वर का शब्द भरोसेमंद है।

संबंधित आयतें (कथन-आधार)

1) मत्ती 16:21— यीशु अपने मृत्यु-युग के बारे में स्पष्ट तौर पर भविष्यवाणी करते हैं कि वे जूदिया में मरेंगे और पुनः जी उठेंगे। इसे यहाँ संदर्भित कर समझना सही है कि पुनर्जीवन की योजना यीशु के जीवन-कार्य का केंद्र है।

2) मत्ती 28:6— “उन्हें बताने के लिए गया कि वह गायब नहीं हुआ, बल्कि जी उठे हैं।” यह क्रूस के बाद की घटना पुनर्जीवन की पुष्टि करता है, और उस समय के शास्त्र-उद्धार का निर्माण करता है।

3) मरकुस 8:31— यीशु कहते हैं कि वे अपने आंदेशा को सहन करेंगे, और मरेंगे, पर तीसरे दिन जी उठेंगे; यह सत्ता-आधारित घोषणा नहीं है कि वह केवल धारणात्मक है, बल्कि वास्तविक सत्य है।

आज के संदर्भ में लागू करने योग्य सिद्धांत

– संकट के समय सत्य की याद दिलाना महत्त्वपूर्ण है। जब परिस्थिति डराती हो, तब भी प्रभु की कसम और वादों को स्मरण रखना हमारी आस्था को स्थिर बनाता है।

– पराकाष्ठा में भी परमेश्वर की योजना सुरक्षित रहती है। मानव दृष्टिकोण छोटा पड़ सकता है, पर ईश्वर की योजना बड़ी और उद्धारमय है।

– पुनर्जीवन का संदेश हमारे भीतर भी नया जीवन लाने की प्रार्थना को प्रेरित करता है; यीशु के जीवन-जी उठने से नयी आशा और संकल्प मिलता है कि कठिन समय में भी विश्वास जीवित रहता है।

एहेडेड उद्धरण (exact quotes from public-domain commentators, if used)

एजेंसियों के शब्द: मैथ्यू हेनरी, अलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के शाब्दिक संकेत गैपूर्ण हैं, पर यहाँ हमने उनके विचारों को संयुक्त रूप से समेटकर प्रसंगानुसार प्रस्तुत किया है; आवश्यक जगह पर उनके छोटे उद्धरण सीधे यहां नहीं दिए गए हैं ताकि पाठ की धार प्राकृतिक बनी रहे।

संयुक्त सार

यह अध्याय बताता है कि परमेश्वर की योजना सत्य और विश्वास पर आधारित है। झुठे भय और भरमाने के बावजूद, यीशु का फिर जीवित होना ईश्वर की महनीय योजना के प्रमाण है। आज भी हम इस स्मरण के साथ अपने विश्वास को मजबूत कर सकते हैं: निर्भय होकर परमेश्वर के शब्दों पर टिके रहें, और हर परिस्थिति में नई आशा पाएँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 27:63 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और उसने कहा, “मनुष्य के पुत्र के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुःख उठाए, और पुरनिए और प्रधान याजक और शास्त्री उसे तुच्छ समझकर मार डालें, और वह तीसरे दिन जी उठे।”

मत्ती 16:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 16:21 (HINIRV) »
उस समय से यीशु अपने चेलों को बताने लगा, “मुझे अवश्य है, कि यरूशलेम को जाऊँ, और प्राचीनों और प्रधान याजकों और शास्त्रियों के हाथ से बहुत दुःख उठाऊँ; और मार डाला जाऊँ; और तीसरे दिन जी उठूँ।”

मत्ती 17:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 17:23 (HINIRV) »
और वे उसे मार डालेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा।” इस पर वे बहुत उदास हुए।

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