मत्ती 27:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अतः जब वे इकट्ठा हुए, तो पिलातुस ने उनसे कहा, “तुम किसको चाहते हो, कि मैं तुम्हारे लिये छोड़ दूँ? बरअब्बा को, या यीशु को जो मसीह कहलाता है?”

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मत्ती 27:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 27:17 — क्यों यह चयन घटना है?

यह पद एक तीखी चुनावी घड़ी को दर्शाता है: पिलातुस अपने लोगों के सामने एक जीवन-मृत्यु के निर्णय को छोड़ते हैं। खड़े-खड़े वे यीशु के स्थान पर बलवा या बर्बरता के प्रतीक के रूप में बार-बार दिखे रहे हैं—बरअब्बा को छोड़ने या यीशु को क्रूस पर चढ़ाने के लिए चुना जाता है। यह नर-निष्ठा और भीड़-समूह के दबाव के बीच इन्सान और दायित्व के बीच की जटिलता को उजागर करता है, और पिलातुस की असफलता को भी समझाने का अवसर देता है—क्योंकि उसने भीड़ के पक्ष में निर्णय लेने के बजाय सत्य और न्याय के विरुद्ध निर्णय किया। यह पद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मसीह के विश्वसनीयता और नई व्यवस्था के जन्म के क्षणों की पृष्ठभूमि रखता है।

पारिभाषिक संदर्भ और मूल संदर्भ

पिलातुस, रोमन गवर्नर के रूप में, धार्मिक नेताों और भीड़ के दबाव में फंसा हुआ एक प्रशासनिक अधिकारी दिखता है। यह पूछा गया प्रश्न उन दो विकल्पों के बीच है जहां एक तरफ हत्या-भरे राजनीतिक निर्णय, दूसरी तरफ निर्दोषता और सत्य की प्रतीक यीशु है। यीशु का सम्मानित चरित्र, उसकी शांती और संयम भीड़ के गुस्से के सामने स्पष्ट हो जाता है। परिणामस्वरूप, पिलातुस अपने विवेक और असल न्याय से परे, भीड़ के दबाव के सामने झुकते हैं।

क्यों यह संदेश महत्वपूर्ण है

यह verses हमें यह याद दिलाती है कि सत्य और न्याय के मूल्य अक्सर सामाजिक दबाव में कठिन हो जाते हैं। मसीह के बारे में तत्काल निर्णय लेने के बजाय, सच की आवाज़ को सुनना और विश्लेषण करना आवश्यक है—खासकर जब सामाजिक एवं राजनीतिक दबाव किसी के जीवन के लिए निर्णायक हो। यीशु का चयन, एक क्रूर निष्पादन की ओर इशारा करते हुए भी, परमेश्वर की योजना के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसकी पवित्र योजना के complementation का हिस्सा बनता है।

मुख्य संदेश

  • धार्मिक नेताओं और भीड़ की मिली-जुली मांगों के दबाव में न्यायिक निर्णय लेना असाधारण कठिन हो सकता है।
  • यीशु को छोड़ने का विकल्प, मानव-अनुदान की कमजोरी और परमेश्वर की योजना के मिश्रण को दर्शाता है।
  • प्रत्येक विश्वासी के लिए यह सीख है कि बहसों और समूह-नैतिकता से ऊपर सत्य की आवाज़ को सुनना और दृढ़ रहना है।

Cross-references और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

- प्रलोभन और निर्णय का तनाव: यूहन्ना 19:12-16 के संदर्भ में दिखता है कि कैसे प्रशासनिक दबाव यीशु के भाग्य को निर्धारित करने में भूमिका निभाते हैं। यह दिखाता है कि पिलातुस का चुनाव भीड़ की मांग के अनुरूप है, परन्तु यीशु के प्रत्यक्ष आचरण से न्याय की दिशा स्पष्ट होती है।
- न्याय के सिद्धांत बनाम सामाजिक दबाव: मत्ती 26:52-53 में यीशु ने आशीर्वचन नहीं दीं, जबकि पिलातुस की स्थिति यह बताती है कि कर्तव्य और कमजोरियाँ एक साथ चलते हैं।
- पवিত্র्य और उद्धार की योजना: 1 कुरिन्थियों 5:7-8 की तरह पवित्रता की नई व्यवस्था के अनुरूप, लोगों के समूह-नीतित्व के बीच भी ईश्वर की योजना चलती है।

पूर्वकृत टिप्पणियाँ (Historical-Commentary echoes)

जेम्स-हेन्री (Matthew Henry) ने संकेत किया है कि कमरे के भीतर निर्णय लेते समय सबसे बड़ी परीक्षा सत्य के प्रति निष्ठा की है; इसका गवाह यीशु की शांत-संबोधनता है, जो दुष्कर्मी भीड़ के बीच सच को बनाए रखे।

एलबर्ट बार्न्स (Albert Barnes) ने कहा कि पिलातुस का सवाल एक सार-सारघाट है—दो विकल्पों के बीच, जो भीड़ चाहती है वह सामान्यतः धर्म-संभावित निर्णय नहीं देता, बल्कि सत्ता और सुरक्षा की प्राथमिकताएं देता है।

एडम क्लार्क (Adam Clarke) ने रेखांकित किया कि यीशु की अस्वीकृति का यह क्षण क्रूस की यात्रा की दिशा निर्धारित करता है, और यह यह बताता है कि परमेश्वर की योजना मानव निर्भरता और न्याय केसंयोजन पर निर्भर है।

devotional reflection

हमारे जीवन में भी कभी-कभी ऐसी घड़ियाँ आती हैं जहां हमें भीड़ की आवाज़ से ऊपर सत्य की आवाज़ सुननी पड़ती है। क्या आप अपने निर्णयों में popularity या pressure से प्रभावित रहते हैं, या आप ईश्वर की आवाज़ के अनुरूप कदम उठाने का साहस रखते हैं? यीशु के संयम और पिलातुस के निर्णय-स्वर से प्रेरित होकर, अपने जीवन में सत्य के साथ खड़े रहने का प्रण लें—भले ही उसका परिणाम कैसे भी हो।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 27:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो* कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा नित करूँगा।”

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और एलिय्याह सब लोगों के पास आकर कहने लगा, “तुम कब तक दो विचारों में लटके रहोगे*, यदि यहोवा परमेश्‍वर हो, तो उसके पीछे हो लो; और यदि बाल हो, तो उसके पीछे हो लो।” लोगों ने उसके उत्तर में एक भी बात न कही।

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पिलातुस ने उनको यह उत्तर दिया, “क्या तुम चाहते हो, कि मैं तुम्हारे लिये यहूदियों के राजा को छोड़ दूँ?”

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