यहोशू 24:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो* कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा नित करूँगा।”

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यहोशू 24:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहोशू 24:15 पर commentary (HINIRV)

यहोशू 24:15 में यरदन के पार रहने वाले द्वीप-समुदायों और इजरायल के ठिकानों के बीच एक निर्णायक मोड़ आता है। इस पंक्ति में यहोशू ने इस्राएलियों को एक स्पष्ट विकल्प दिया कि वे किस देवता के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखें। यद्यपि पथ-चयन में भ्रांति संभव थी, इस वचन का उद्देश्य यह है कि परमेश्वर की सेवा उनके घराने की पहचान बन जाए और समाज में स्थिरता रहे।

मुख्य अर्थ

यह पंक्ति दो विकल्प प्रस्तुत करती है: पहले, मूर्त देवताओं की सेवा उन पूर्वजों के देश की स्मृति से जुड़ी है; दूसरा, मोतीयों और स्थानीय देवताओं की आस्था के समूह के साथ संबंध। परन्तु यहोशू स्वयं और उनके घराने की दृढ़ प्रतिबद्धता यह है कि वे केवल यहोवा की सेवा करेंगे। यह भाव एक स्थिर, धारणीय और प्रेरक नेतृत्व-मानक बन गया जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहता है।

दो मुख्य विषय

  1. वफादारी का चयन: एक स्पष्ट प्रतिज्ञा जिसमें बाहरी दबावों के बावजूद ईश्वर के साथ स्थिरता दिखाई देती है।
  2. घरेलू परंपरा और परिवार की भूमिका: यहोवा की सेवाकारी केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सारी संरचना में फैली होती है।

संदर्भित चर्चाग्रंथ (cross-references)

• निर्गमन 20:3-5: परमेश्वर के एकेश्वरत्व का सिद्धांत और मूरत-उपासना के विरुद्ध स्पष्ट आदेश।

• दूसरे शमूएल 7:16: दाऊद के घराने के लिए परमेश्वर की स्थिरता का विचार—अपने घराने में ईश्वर की योजना की पुष्टि।

• 1 राजा 18:21: प्रेरित निर्णय—यहोशू की जैसे ही जवाबदेही के लिए एलान आवश्यक था, वैसे ही एजाजनों के बीच स्पष्ट विकल्प।

पारिवारिक-आचार और व्यवहार

इस वचन की वास्तविक शक्ति यह है कि यह व्यक्तिगत चुनाव को सामाजिक-परिवारिक परंपरा से जोड़ देता है। यदि परिवार के हर सदस्य परमेश्वर के साथ समर्पित रहते हैं, तो समुदाय की एकता और धार्मिकता मजबूत होती है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • 오늘 अपनी निष्ठा का स्पष्ट निर्णय लें: कौन-से मूल्य प्रथम स्थान देंगे?
  • परिवारिक पाठशाला बनाएं—बच्चों को परमेश्वर की सेवा के महत्व से परिचित कराएं।
  • समाज में आने वाले वैचारिक दबाव के समय भी यहोवा के साथ एकता बनाए रखें।

विचार-स्वर

हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर की सेवा एक निरंतर, व्यक्तिगत और सामुदायिक संकल्प है—जो आने वाले समय के लिए भी प्रेरणा बनता है। यहोशू के कथन में, यह स्पष्ट है कि बाहर के देवताओं की सूची कितनी भी आकर्षक हो, वास्तविक सुरक्षा और आशीर्वाद का स्रोत केवल यहोवा है।

छोटा संदर्भ-नोट

मैथ्यू हेन्री, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के प्रसिद्ध पारिभाषिक टिप्पणियाँ अक्सर यही संकेत देती हैं कि एक दृढ़ विकल्प और दृढ़ प्रतिबद्धता से आस्था की नींव मजबूत होती है—परंतु पूरी विषय-वस्तु में यह संतुलन भी आवश्यक है कि परमेश्वर की सेवा का लक्ष्य केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र की निर्देश-नियति बन सके।

संक्षेप

यहोशू 24:15 हमें एक स्पष्ट विकल्प देता है: उन देवताओं की ओर रुख न करें जिन्हें पूर्वजों ने मान्यता दी थी, बल्कि स्वयं और अपने घराने के साथ यहोवा की सेवा चुनें। यह कथन हमारे लिए भी एक प्रेरणादायक आह्वान है—अपने घर, समुदाय और जीवन के हर क्षेत्र में परमेश्वर के वचन के निर्देशों को प्राथमिकता दें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहोशू 24:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 राजाओं 18:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 राजाओं 18:21 (HINIRV) »
और एलिय्याह सब लोगों के पास आकर कहने लगा, “तुम कब तक दो विचारों में लटके रहोगे*, यदि यहोवा परमेश्‍वर हो, तो उसके पीछे हो लो; और यदि बाल हो, तो उसके पीछे हो लो।” लोगों ने उसके उत्तर में एक भी बात न कही।

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यूहन्ना 6:67 (HINIRV) »
तब यीशु ने उन बारहों से कहा, “क्या तुम भी चले जाना चाहते हो?”

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रूत 1:15 (HINIRV) »
तब उसने कहा, “देख, तेरी जिठानी तो अपने लोगों और अपने देवता के पास लौट गई है; इसलिए तू अपनी जिठानी के पीछे लौट जा।”

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