Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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यहोशू 24:11 का तत्काल क्रम और उनके द्वारा अनुभवित परमेश्वर का पस्ताव
यहोशू 24:11 में युद्ध-यात्रा के अंतिम चरण का स्मरण है, जब यहोशू और इस्राएलियों ने यरदन पार किया और उनके सामने कनानी देशों के विशाल विरोध खड़े थे—यरीहो, एमोरी, कनानी आदि; परन्तु विश्वास की पगडंडी में परमेश्वर ने उनके साथ वाचा निभाई और दुष्ट शक्तियों को उनके वश कर दिया। यह वचन इस बात को रेखांकित करता है कि परमेश्वर का राज्य और शक्ति, जब उसका लोग उसे धन्यवाद दें और उसकी आज्ञाओं के अनुसार भागें, तो उनके लिए विजय का स्रोत बनती है।
ईश्वर और विश्वास का संदेश
यह पाठ हमें दिखाता है कि परमेश्वर अपने चुने हुओं के साथ वही रहता है, जो उन्हें दुष्ट आक्रमणों से रक्षा करता है और उन्हें उनकी पूर्व-स्थिति से ऊपर उठाकर परमशक्ति के द्वार खोलता है। विश्वास की परीक्षा में भी ईश्वर की सहायता अद्भुत रहती है। यहोशू के नेतृत्व में इस्राएलियों ने एक बड़े संघर्ष के बीच भी दृढ़ विश्वास रखा और परमेश्वर के करुणा और सामर्थ्य पर भरोसा किया, परिणामस्वरूप विजय उनके हाथ लगी।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
अन्य संबंधित शास्त्रीय टिप्पणीकारों के प्रवचन (संक्षेप)
Matthew Henry बताते हैं कि यहोशू के नेतृत्व में आने वाला सफल संघर्ष परमेश्वर की शरण में रहने का परिणाम है; Barnes इस बात पर बल देते हैं कि परमेश्वर अपने लोगों को उनके शत्रुओं के विरुद्ध सुरक्षा देता है और उनके विश्वास को मजबूत करने के लिए चमत्कार करता है; Clarke 강조 करते हैं कि यहेजावाह की सत्ता से ही क्रूर प्रतिद्वंद्विता पर विजय संभव है, क्योंकि उनके द्वारा समर्थित लोग निर्भय जब वे प्रचारित वचन के अनुसार चलते हैं।
उद्धृत संक्षेप (अंश): “परमेश्वर ने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया”—यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की सत्ता के अधीन ही विजय संभव है, और यह उद्धार का स्रोत है।
आधुनिक अनुप्रयोग
आज के विश्वासियों के लिए इससे सीख यह है कि कठिन प्रयासों और कठिनाइयों के बीच भी परमेश्वर पर विश्वास बनाये रखें। यरदन पार करना, नवीन परिस्थितियों में प्रवेश करना और शत्रुओं से सामना करना—इन सभी में ईश्वर से सहायता माँगना और उसकी योजना में संलग्न रहना चाहिए। जीवन के बड़े निर्णयों में प्रार्थना और सूचनापूर्ण निर्णय से ही शांति मिलती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
यशया 54:17 — प्रभु के सम्मुख गढ़े हुए बिनाश के अवसर भी रक्षा में परिवर्तित होते हैं; वे हमारे साथ हैं तो योजनाओं को भय नहीं है।
यहेज़केल 38–39 — परमेश्वर की महिमा और शक्ति के आगे विरोधी भी आत्मसमर्पण करते हैं; यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने उद्देश्य को सिद्ध करता है।
प्रेम-उद्धृत: 2 डायन. 20:15 — “युध्द हर वर्ष” पर परमेश्वर से सहायता माँगना, और यह बतलाना कि प्रतिरोध कहाँ तक है।
निष्कर्ष: यहोशू 24:11 दिखाता है कि परमेश्वर की वास्तुकला में विजय उनके साथ है जो उसकी इच्छा के अनुसार चलते हैं। उसका आशीर्वाद विश्वास को नया प्राण देता है और विवेक से भरे निर्णयों में सहायता करता है।