Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 24:1 यहोशू 24:2 यहोशू 24:3 यहोशू 24:4 यहोशू 24:5 यहोशू 24:6 यहोशू 24:7 यहोशू 24:8 यहोशू 24:9 यहोशू 24:10 यहोशू 24:11 यहोशू 24:12 यहोशू 24:13 यहोशू 24:14 यहोशू 24:15 यहोशू 24:16 यहोशू 24:17 यहोशू 24:18 यहोशू 24:19 यहोशू 24:20 यहोशू 24:21 यहोशू 24:22 यहोशू 24:23 यहोशू 24:24 यहोशू 24:25 यहोशू 24:26 यहोशू 24:27 यहोशू 24:28 यहोशू 24:29 यहोशू 24:30 यहोशू 24:31 यहोशू 24:32 यहोशू 24:33



यहोशू 24:10 का पृष्ठ-परिदृश्य और तथ्यगत अर्थ
यहूशा के धार्मिक-राज्य के आख़िरी चरण में, यरूशलेम से ठीक पहिले, यहोशू ने इजरायल सभा के सामने उन संदिग्धताओं और उदाहरणों को याद किया जो उनके विश्वास के मार्ग पर आये। यह पद यह बताता है कि परमेश्वर ने किस तरह उनके कठिन समय में सहायता दी और कैसे गलत प्रभावों ने उन्हें सचेत किया। आदर्श रूप से यह वह मोड़ है जब इस्राएल के नेता और लोग अपने परमेश्वर के साथ फिर से एकरूप होने के लिए निर्णय लेते हैं और अन्य देवताओं के आह्वान से पीछे हटते हैं।
पाठ के बारे में तत्काल संदर्भ
यह वाक्यांश बताता है कि बलीम (बिलाम) की दुष्ट प्रेरणा या आग्रह से यहूदियों को खतरा था, परन्तु यीशू ने उनके भाग्य को रोकने और उन्हें आशीष बनाये रखने में परमेश्वर की कृपा की पुष्टि की। इस संदर्भ में “मैंने बिलाम की नहीं सुनी” से तात्पर्य है कि परमेश्वर ने इस्राएलियों को अवांछित आशीषों से नहीं डराया, बल्कि उनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए सही मार्ग दिखाया।
गंभीर शब्दावलियाँ और छवि-चित्र
अन्य बाइबिल संदर्भ: समझने के लिए सहायक
इन मार्गों को देखने से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर कैसे अपने लोगों की रक्षा करते हैं और दुष्ट योजनाओं का अंत कैसे होता है:
ईश्वर और विश्वास से जुड़ी स्पष्ट बातें
इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक भरोसेमंद नेतृत्व-संबंध बनाते हैं और वे उनके मार्गदर्शन में सुरक्षित रहते हैं। बिलाम की निंदा और उसकी वैचारिक धारा में उलझकर भी परमेश्वर ने इस्राएलियों को आशीषों की गारंटी दी, जो उनकी निष्ठा और प्रमाद के समय भी टिकती है।
आज के लिए व्यवहारिक अर्थ
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के छोटे उद्धरण (यदि उपलब्ध)
नोट: नीचे दी गई पंक्तियाँ केवल उनके छोटे विवरण के रूप में उद्धृत हैं; पूर्ण पाठ उनके पन्नों से लिया जा सकता है:
मैथ्यू हेनरी: “This is a demonstration of God’s providence over his people.”
एल्बर्ट बार्न्स: “God’s people are protected in the midst of deceitful plots.”
एडम क्लार्क: “The Lord’s hand is a shield over his flock amid danger.”
सार-सार: यहोशू 24:10 से स्पष्ट संकेत मिलता है कि परमेश्वर की सुरक्षा और आशीष उनके वचनों के पालन पर निर्भर है, भले ही बहिर्गामीय शक्तियाँ क्यों न प्रबल हों। यह संदेश आज भी स्पष्ट है—विश्वास रहे, निर्णय और प्रभु-आशीष के साथ ही जीवन में स्थिरता मिलती है।
संक्षिप्त cross-references
1) निर्गम 14:14 – प्रभु अपने लोगों के लिए 'युद्ध-युद्ध' नहीं कराते, बल्कि स्वयं लड़ते हैं; विश्वास बनाए रखना चाहिए।
2) व्यवस्थाविवरण 31:6 – प्रभु के साथ हो तो डरे बिना आगे बढ़ें; वह नहीं छोड़ते।
3) यूहन्ना 16:33 – संसार के दुख-तकलीफों के बीच भी शांति का स्रोत परमेश्वर है; विश्वास बनाए रखना चाहिए।