मत्ती 27:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब जो वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हुआ “उन्होंने वे तीस सिक्के अर्थात् उस ठहराए हुए मूल्य को (जिसे इस्राएल की सन्तान में से कितनों ने ठहराया था) ले लिया।

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मत्ती 27:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य बिंदु

मत्ती 27:9-10 का दार्शनिक सार यह है कि यीशु के विचारित कर देने के बाद जो 30 सिक्के मिले, वे यिर्मयाह के Prophetic शब्द के अनुसार ठहराए गए मूल्य के समान थे; यह प्रभु के पुनः उद्धार-कार्य की त्रिकाल-चेतावनी में एक निहित संकेत है—धर्म के दाम पर मानवीय अवहेलना और परमेश्वर की योजना की पूर्ति।

साहित्यिक संदर्भ

यह घटना कथात्मक रूप से बाइबल के अन्य भागों के साथ intersect करती है जहाँ दायित्वों के मूल्य, विश्वासघात और ख्‍वाब-चेष्टाओं के मूल्यांकन का चित्रण मिलता है। मत्ती का लेखन इस बात को उभारता है कि कैसे नीचे की घटनाएँ परमेश्वर के विशाल कल-कलाप की दिशा निर्धारित करती हैं—यद्यपि यह मानव विवेक के अनुसार ठहराए गए सिक्कों की मापा-तोल है, पर उसकी पूरी योजना ईশु मसीह के क्रूस-कार्य की तैयारी है।

थियोलॉजिकल महत्व

तहत, सिक्कों के मूल्य का उपयोग एक पैमाना है—मानव कर्मों का मूल्यांकन और यह भी कि कैसे पाप के कारण न्याय-परक परिणाम आते हैं। इसके साथ, मसीह के नश्वर जीवन की कीमत को यह घटना दर्शाती है: प्रभु अपने उद्धार के लिए ही नहीं, बल्कि एक वैधता से परे भी, मानव स्थिति का वास्तविक मूल्य दिखाते हैं।

पवित्र शास्त्रों के साथ कड़ियाँ

  • यिर्मयाह के भविष्यवाणी से संघटित संकेत: यह घटना यिर्मयाह के समय के प्रभाव को पुनः स्मरण कराती है कि पाप के लिए दाम चुकाने पड़ते हैं, पर परमेश्वर की योजना सर्वोपरि है।
  • पदानुसार विश्वासघात के दाम की चर्चा दिखती है—यहाँ यहूदियों के द्वारा यीশु के सामने आने वाले दाम के रूप में प्रस्तुत है, जो क्रूस तक का मार्ग प्रशस्त करता है।
  • क्रूसिका उद्धार-कार्य की तैयारी: 30 सिक्के से संयुक्त रूप से उन घटनाओं को जोड़ना जो उद्धार के मर्म को दर्शाती हैं।

युक्तियाँ: यह संदर्भ पाप के परिणाम और परमेश्वर की योजना के बीच संतुलन दर्शाता है—मनुष्य के निर्णय कभी-कभी कर्म के परिणामों को निर्धारित करते हैं, परंतु ईश्वर की दिशा में पूर्णता सिद्धांत के अनुरूप है।

उद्धार के संबंध में विचार

  1. क्या मैं अपने जीवन के मूल्यांकन में ईश्वर के सिद्धांत को प्राथमिक मानता हूँ?
  2. किस प्रकार मैं विश्वासघात या अस्वीकृति के समय भी प्रभु की योजना को स्वीकार कर सकता/सकती हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

मत्ती 27:9-10 में ठहराए गए सिक्के इस बात की स्मृति कराते हैं कि परमेश्वर की नियति मानव-चयन के मध्य भी चलती है। यह घटना मसीह के क्रूस-कार्य की तैयारी और अनुग्रह के अद्भुत पथ की पुष्टि करती है—मानव-आरोपों के बावजूद उद्धार का मार्ग परमेश्वर की जय से खुलता है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (छोटे उद्धरण नहीं, पाठ-संदर्भ के संकेत)

यिर्मयाह 32:9-10; मत्ती 26:15; मत्ती 27:3-10

संकेत: इन संदर्भों से संकेत मिलता है कि दाम और धोखाधड़ी के बावजूद परमेश्वर की योजना खुलती है; यीशु का दाम क्या नहीं, बल्कि पूर्णता का मार्ग है।

फुटनोट: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke के सीधे वचन बिल्कुल छोटे उद्धरण के रूप में सम्मिलित नहीं किए गए; यदि आप चाहें तो मैं उनके प्रचलित व्याख्यान से संक्षिप्त उद्धरण भी जोड़ सकता/सकती हूँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 27:9 समानांतर पद और संबंधित वचन

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