Old Testament
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जकर्याह 11:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब मैंने उनसे कहा, “यदि तुम को अच्छा लगे तो मेरी मजदूरी दो, और नहीं तो मत दो।” तब उन्होंने मेरी मजदूरी में चाँदी के तीस टुकड़े तौल दिए। (मत्ती 26:15)
जकर्याह 11:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 11:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 26:15 (HINIRV) »
“यदि मैं उसे तुम्हारे हाथ पकड़वा दूँ, तो मुझे क्या दोगे?” उन्होंने उसे तीस चाँदी के सिक्के तौलकर दे दिए।

निर्गमन 21:32 (HINIRV) »
यदि बैल ने किसी दास या दासी को सींग मारा हो, तो बैल का स्वामी उस दास के स्वामी को तीस शेकेल रूपा दे, और वह बैल पथरवाह किया जाए।

मरकुस 14:10 (HINIRV) »
तब यहूदा इस्करियोती जो बारह में से एक था, प्रधान याजकों के पास गया, कि उसे उनके हाथ पकड़वा दे।
पाठ-झलक: ज़करियाह 11:12 (HINIRV)
यह पाठ एक सरल, पर हृदयस्पर्शी विनिमय का दृश्य प्रस्तुत करता है जहाँ एक विपरीत भावना—हेल्प की आशा बनाम आर्थिक मूल्य—प्रश्न उठाती है। याकूब-युग के इस अद्भुत दृष्य में प्रभु परमेश्वर की सेवा और उसकी प्रेरणा को मानव स्वार्थ की कसौटी पर आँका गया है।
पाठ को章-प्रसंग में देखें
यह अनुभाग ज़करियाह के समय की एक नसीहत-सी कहानी है: एकतरफ भगवान के नियोक्ताओं (जकरियाह) द्वारा अपनाई गई सरल योजना—शासन के बाहर एक समूह के साथ सहकार्य—और दूसरी ओर लोगों की प्रतिक्रियाएँ। עס को संदर्भित करते हुए पाठ बताता है कि मृत-धन नहीं, बल्कि विश्वास और निर्भरता का मूल्य क्या है। उद्धरण संबद्ध चिह्न: मत्ती 26:15 आदि के संकेत से यह दिखता है कि यहाँ के मूल्यांकन में नेताओं और समुदाय की रुचियाँ कभी-कभी प्रभु की राह से भटक सकती हैं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अनुभाग-परिशीलन: अध्याय-स्थिति से तुलना
इस दृश्य में मजदूरी की चर्चा एक परीक्षण के रूप में है—क्या लोग ईश्वर के साथ अपने अनुबंध में ईमानदार बने रहते हैं। यह मसीही सोच के अनुरूप है कि आत्म-स्वार्थ बनाम परमेश्वर की इच्छा के बीच चुनाव करना पड़ता है।
अनुप्रयोग
हम प्रत्येक दिन छोटे-छोटे चुनाव करते हैं—कब हमारी प्रेरणा आर्थिक लाभ या सामाजिक दबाव से प्रभावित होती है। यीशु के अनुकरण में, सही विकल्प वही है जो परमेश्वर के साथ विश्वसनीयता बनाए रखे। कभी-कभी यह दिखाने के लिए साहस चाहिए कि हम विशेष अवसरों पर भी अपनी आस्था को उच्चतम प्राथमिकता दें।
क्रॉस-रिफरेंसेस और उनके संकेत
1) मत्ती 26:15 — यीशु को राशि के चिह्न के रूप में तौलना; यह दिखाता है कि धन और विश्वास का संघर्ष कैसे प्रकट होता है।
2) मत्ती 27:9-10 — आंशिक मूल्य-विक्रय का चित्रण: धन के माध्यम से इशारा, परन्तु परमेश्वर की योजना से बाहर नहीं जाना चाहिए।
3) मिस्त्र की बातें (उद्योगिक-विवेक) — परमेश्वर के लोगों के लिए विश्वसनीयता और वचनबद्धता का महत्व बार-बार दोहराया गया है।
एक संक्षिप्त समरी
ज़करियाह 11:12 में दिये गए दृश्य से हमें यह सीख मिलती है कि ईश्वर की मर्जी के अनुरूप कार्य करना ही सच्चे विश्वास का परीक्षण है। मजदूरी—या मूल्य—के बाहरी संकेत से अधिक हमें अपने हृदय की धारणा, ईमानदारी, और परमेश्वर के साथ अनुबंध की सच्ची श्रद्धा पर विचार करना चाहिए। यह पाठ, और समानांतर संदर्भ, हमें बताता है कि धन के साथ खेलना कभी भी परमेश्वर की योजना को नहीं चुन सकता; विश्वास और कमनुभावना समर्पण सार है.
उद्धरण-नोट
यदि आप चाहें, तो नीचे दिए गए सार्वजनिक-डोमैन टिप्पणीकारों के विचारों से प्रेरणा पाते हैं: मॅथ्यू हेरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क। इन लेखों में उनके विशेष शब्दों के संक्षिप्त उद्धरण नीचे दे सकते हैं—परन्तु पाठ की आत्मा को बनाए रखते हुए, पूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है।