Old Testament
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जकर्याह 11:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उनके मोल लेनेवाले उन्हें घात करने पर भी अपने को दोषी नहीं जानते, और उनके बेचनेवाले कहते हैं, 'यहोवा धन्य है, हम धनी हो गए हैं;' और उनके चरवाहे उन पर कुछ दया नहीं करते।
जकर्याह 11:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 11:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 50:7 (HINIRV) »
जितनों ने उन्हें पाया वे उनको खा गए; और उनके सतानेवालों ने कहा, 'इसमें हमारा कुछ दोष नहीं, क्योंकि उन्होंने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है जो धर्म का आधार है, और उनके पूर्वजों का आश्रय* था।'

होशे 12:8 (HINIRV) »
एप्रैम कहता है, “मैं धनी हो गया, मैंने सम्पत्ति प्राप्त की है; मेरे किसी काम में ऐसा अधर्म नहीं पाया गया जिससे पाप लगे।” (प्रका. 3:17)

1 तीमुथियुस 6:5 (HINIRV) »
और उन मनुष्यों में व्यर्थ रगड़े-झगड़े उत्पन्न होते हैं, जिनकी बुद्धि बिगड़ गई है और वे सत्य से विहीन हो गए हैं, जो समझते हैं कि भक्ति लाभ का द्वार है।
जकर्याह 11:5 का अर्थ और संदर्भ
सीधे शब्दों में यह वचन कहता है: वे लोग जिन्हें मोल लेनेवाले, खरीदनेवाले और चरवाहे जैसी सामूहिक व्यवस्था ने धोखा दिया है—उन्हें लोग जानते हैं कि उन्हें नुकसान पहुंचाया गया है, किन्तु वे दोषारोपण नहीं करते। मोल लेनेवाले कहते हैं, “यहोवा धन्य है, हम धनी हो गए हैं,” और उनके चरवाहे उन पर दया नहीं दिखाते। यह पाठ अलांयन-न्याय की जगह धोखे, स्वार्थ और निष्क्रियता की सामाजिक व्यवस्था की कड़वी तस्वीर देता है।
पृष्ठभूमि और समूहिक परिस्थिति
यह भाग बाइबल में गाढ़े असहयोग और आत्म-स्वार्थ की चेतावनी से जुड़ा है। यशाय, हबकूक या अन्य नबी-ग्रंथों की तुलना में जकरयाह वेदना और भ्रष्ट व्यवस्था का दृश्य दिखाते हैं जहाँ नेताओं, व्यवसायियों और चरवाहों का सम्मिलन लोगों के शोषण के साथ होता है। आवाज़ कुचली हुई जनता के लिए है—जो कुछ धन-लाभ के लिए बलपूर्वक दबाई जाती है, परन्तु अपने भाग्य के बारे में चुप रहती है।
interpretive observations
छोटी थीमैटिक सूची
अन्य मार्गदर्शक टिप्पणी से जुड़े संदर्भ
यह पाठ अन्य पुराने टिप्पणीकारों के दृष्टिकोण के साथ मिलकर समझ देता है:
Matthew Henry (संक्षण): शोषण और धन-लाभ के लिए नैतिक अधिकारों का उल्लंघन—ईमानदार मोल-तोल के स्थान पर अन्याय—यहूदी समाज की आंतरिक बीमारियों का परिचायक है।
Albert Barnes (संक्षण): समाज के उन वर्गों का अवमूल्यन जो शक्ति और धन से दबाते हैं; वे अपने कर्मों के लिए जिम्मेदार नहीं माने जाते, परन्तु नये दिन में न्याय की अस्वीकृति से परिणाम भुगतते हैं।
Adam Clarke (संक्षण): व्यावहारिक विवेचन में अत्याचार का यह रूप दर्शाता है कि आर्थिक-नीति में नैतिक सिद्धांतों की कमी से सामाजिक पतन होता है।
इनमें से केवल छोटे-से उद्धरण-रेखाएँ: “धन्य है, हम धनी हो गए हैं”—यह कथन धन के लिए आत्म-स्वार्थी रवैये की व्यंग्य है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) दयालुता का अभाव—कभी-कभी नीति की कठोरता से पीड़ित जनता के लिए दया की कमी स्पष्ट होती है।
2) न्याय बनाम अधिकार—धन-निर्भर अधिकारों के टकराव से सामाजिक न्याय प्रभावित होता है।
3) नेता–चारा-चिह्न: नेतृत्व के अभाव में समाज में शोषण और अव्यवस्था बढ़ती है।
थोड़ा व्यावहारिक takeaway
जो समाज व्यक्तिगत लाभ के लिए अन्याय को सहन करता है, उसे सत्य के सामने अपने दोषीपन का सामना करना पड़ता है। ईमानदार नेतृत्व, न्यायपूर्ण व्यापार और दयालुता को पुनः मानकीकृत करना आवश्यक है ताकि धन के कारण मानव-स्वभाव का भ्रष्टाचार न बढ़े। दूसरों के भाग्य के प्रति संवेदना बनाए रखना और मजबूत नैतिक मानकों को कायम रखना ही स्थायी गति देता है।