Old Testament
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जकर्याह 11:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोवा ने मुझसे कहा, “इन्हें कुम्हार के आगे फेंक दे,” यह क्या ही भारी दाम है जो उन्होंने मेरा ठहराया है? तब मैंने चाँदी के उन तीस टुकड़ों को लेकर यहोवा के घर में कुम्हार के आगे फेंक दिया। (मत्ती 27:9,10)
जकर्याह 11:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 11:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 27:3 (HINIRV) »
जब उसके पकड़वानेवाले यहूदा ने देखा कि वह दोषी ठहराया गया है तो वह पछताया और वे तीस चाँदी के सिक्के प्रधान याजकों और प्राचीनों के पास फेर लाया।

प्रेरितों के काम 1:18 (HINIRV) »
(उसने अधर्म की कमाई से एक खेत मोल लिया; और सिर के बल गिरा, और उसका पेट फट गया, और उसकी सब अंतड़ियाँ निकल गई।

यशायाह 53:2 (HINIRV) »
क्योंकि वह उसके सामने अंकुर के समान, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते। (मत्ती 2:23)
जकर्याह 11:13 पर केंद्रित टिप्पणी
इस वचन का मुख्य बिंदु यह है कि परमेश्वर की कृपा और मान-सम्मान के मोल को लोग कभी-कभी गलत आंकी कर देते हैं, और तब एक चेतावनी निकलती है कि जिस धन के कारण मान-घटित हुआ, वही धन अंततः ईश्वर की स्वीकृति-निष्कर्ष में एक औचित्य नहीं बन पाता। यहाँ यहोवा कहता है कि इन thirty pieces of silver (तीस टुकड़े चांदी) को कुम्हार के सामने फेंक दिया जाए—यह संकेत देता है कि धन, जब वह उसकी महिमा के विरुद्ध उपयोग हो, वह असत्य और नष्टता का प्रतीक बन जाता है। साथ ही मत्ती 27:9–10 से जुड़कर यह दिखाया गया है कि इस आशीर्वचन की घटना न सिर्फ ऐतिहासिक घटना है, बल्कि संपूर्ण पवित्र ग्रंथ में ईश्वर के उद्धारक योजनाओं के संकेतों से जुड़ती है।
साहित्यिक प्रसंग और संदर्भ
यही वचन जकर्याह के अग्निकMoments-परिवर्तन के समय एक प्रतीकात्मक क्रिया बन जाती है। चांदी का मूल्य और उसे कुम्हार के सामने फेंकना—यह दिखाता है कि जहाँ लोग धन और मान-प्रतिष्ठा को पूजा के बजाय सर्वोपरity दे देते हैं, वहाँ ईश्वर अपने उद्देश्य को पूर्ण करता है, भले ही मनुष्य उसका विरोध करें। मत्ती के प्रचार-उद्धरण में इन टुकड़ों की कथा को यीशु के दुखद उद्धार-यात्रा से जोड़ा गया है, जिसे यहूदियों ने लोग-लघू मानकर ठुकरा दिया था, पर परमेश्वर ने उससे भी उद्धार के रास्ते बनाए।
वैचारिक महत्त्व
ग्रंथ-वचन के साथ पठन-प्रत्यय
घटना-क्रम में, यहोवा की आज्ञा से मुझसे कहा गया: इन कीमतों को कुम्हार के सामने फेंक दे; और मैं चाँदी के उन तीस टुकड़ों को लेकर यहोवा के घर में फेंक दिया। यह पंक्ति दोनों पक्षों—यहोवा की करुणा और मानव सिंहासन-आस्था के संघर्ष—को उद्घाटित करती है।
क्रॉस-रेफरेंसे
1) मत्ती 27:9–10: यीशु के बलिदान के सन्दर्भ में टुकड़े-चांदी का उल्लेख, मनुष्यों के ठेस-प्रदर्शन के बावजूद ईश्वर की उद्धार-योजना की पुष्टि करता है।
2) यशायाह 53:3–5 के प्रतीकात्मक प्रकाशन: दुखित सेवक की सच्चाई मानव समझ से परे, परन्तु ईश्वर की योजना को पूरा करती है।
3) कलीसिया की प्रार्थना-संस्कार में धन और सम्मान का सही उपयोग, ईश्वर के राज्य के लिये प्रेम और सेवा के कार्यों के साथ जुड़ता है।
आत्म-चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
जकर्याह 11:13 बताता है कि धन-मान की दुनिया में भी ईश्वर की पुरानी-नई योजना पराजित नहीं होती; मानव अस्वीकृति के बीच भी परमेश्वर की उद्धार-योजना चलती है। मत्ती 27:9–10 के संदर्भ से यह स्पष्ट होता है कि यीशु के दुखद उत्कटाव के साथ यह संकेत जुड़कर पूर्णता पाता है—क्योंकि स्वर्गीय उद्देश्य मानव इतिहास की अस्थिरताओं से ऊपर है।
स्तरित उद्धरणों से संलग्नित नहीं, परन्तु समानता में संदर्भित क्रिस्टो-आध्यात्मिक सावधानी और नीतिगत धारणाएँ नीचे दी गईं हैं:
घोषित उद्धरण (यदि आप उपयोग करें): “In this is fulfilled the word of the Lord.”