Old Testament
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जकर्याह 11:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब मैंने उनसे कहा, “मैं तुम को न चराऊँगा*। तुम में से जो मरे वह मरे, और जो नष्ट हो वह नष्ट हो, और जो बची रहें वे एक दूसरे का माँस खाएँ।”
जकर्याह 11:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 11:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 43:11 (HINIRV) »
वह आकर मिस्र देश को मारेगा, तब जो मरनेवाले हों वे मृत्यु के वश में*, जो बन्दी होनेवाले हों वे बँधुआई में, और जो तलवार के लिये है वे तलवार के वश में कर दिए जाएँगे। (प्रका. 13:10)

व्यवस्थाविवरण 28:53 (HINIRV) »
तब घिर जाने और उस संकट के समय जिसमें तेरे शत्रु तुझको डालेंगे, तू अपने निज जन्माए बेटे-बेटियों का माँस जिन्हें तेरा परमेश्वर यहोवा तुझको देगा खाएगा।

जकर्याह 11:9 पर दृश्यावलोकन
इस अध्याय में भगवान ने जोकर, चराऊँगा-न करने की घोषणा के साथ एक हास्यास्पद-सा पथ दर्शाया है: न उन पूर्वगामी नेताओं को मान्य किया गया, न उन “बछड़े” को जो द्वेष में उभरे थे। जकरयाह 11:9 में ऐसा संकेत है कि परमेश्वर अपनी व्यवस्था के साथ कड़ा प्रतिफल देते हैं, और परिणामस्वरूप जिनके पास उत्तरदायित्व हैं, वे उस क्रम से भिन्न हो जाते हैं जिसे मानव-आधार मानते हैं। यह धमकी नहीं, बल्कि चेतावनी है कि उनका भाग्य उनके उत्तरदायित्व और उनके आचरण से निर्धारित है।
पाठ का संक्षिप्त पाठ-पर-परिदृश्य
verse 9 कहता है: “तब मैंने उनसे कहा, ‘मैं तुम को न चराऊँगा। तुम में से जो मरे वह मरे, और जो नष्ट हो वह नष्ट हो, और जो बची रहें वे एक दूसरे का माँस खाएँ।’” यह दृश्य कवच-हीन अनुशासन और कठोर न्याय का प्रतीक है। यहाँ प्रभु अपनी भूमिका की स्पष्टता दिखाते हैं: वे न तो भेदभाव करते हैं और न पुरस्कारों के बजाय दायित्वों की याद दिलाते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
यह पद एक सिद्धांत को दर्शाता है कि परमेश्वर के मुख्यमंत्री-कार्य में व्यवस्था/गोष्ठी के भीतर भी कठोरता है जब लोग अपने दायित्वों से पीछे हटते हैं। न चराने का निर्णय एक धार्मिक-नुकसान के समय की दया-हीनता नहीं, बल्कि समाज में विश्वासघात के परिणामस्वरूप आभासित दंड है। इससे यह सीख मिलती है कि ईमानदार नेतृत्व और जिम्मेदारी से भागना बड़ा खतरा बन सकता है—और ऐसे समय में परमेश्वर की सख्ती न्यूनीकरण नहीं, बल्कि सत्य की पुष्टि है।
अन्य भागों से तुलना (Cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट है कि आचरण, दायित्व और समुदाय के लिए जिम्मेदारी टूटने पर न्याय का विचार सामने आता है।
मुख्य शिक्षा और अनुप्रयोग
- नेतृत्व में ईमानदारी: दृढ़ता से अपने दायित्व पूरा करें, अन्यथा परिणाम स्वयं सामने आते हैं।
- समुदाय के प्रति जवाबदेही: जो बची रहें, वे आपस में एक-दूसरे पर निर्भर हैं; पर जब टूट-फूट हो, तो संकट और भीषण हो सकता है।
- दया और सख्ती का संतुलन: परमेश्वर की सख्ती के भीतर वही चिरस्थायी दया है जो मार्गदर्शित करती है कि कब और कैसे दण्ड दिया जाए।
एक संक्षिप्त समापन
जकरयाह 11:9 दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के भीतर भ्रष्टाचार को सहन नहीं करते, बल्कि दायित्व की पूर्णता और नैतिकता पर जोर देते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि समाज और विश्व में एक साथ टिके रहने के लिए हर सदस्य को अपने अवसर-समय में ईमानदारी और प्रेम से काम लेना चाहिए।
खास नोट
यदि आप चाहें, तो नीचे दिए गए चार उद्धृत टिप्पणीकारों के संकेत से सीधे शब्द-भाग का संदर्भ देख सकते हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke और एक अन्य समान सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकार। नीचे दिए गये संक्षेप में वे प्रवचन का स्वरूप बनाते हैं, परन्तु पाठ-हिंदी में संकलित मूल विचार ही प्रस्तुत हैं।