Old Testament
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मत्ती 27:1 मत्ती 27:2 मत्ती 27:3 मत्ती 27:4 मत्ती 27:5 मत्ती 27:6 मत्ती 27:7 मत्ती 27:8 मत्ती 27:9 मत्ती 27:10 मत्ती 27:11 मत्ती 27:12 मत्ती 27:13 मत्ती 27:14 मत्ती 27:15 मत्ती 27:16 मत्ती 27:17 मत्ती 27:18 मत्ती 27:19 मत्ती 27:20 मत्ती 27:21 मत्ती 27:22 मत्ती 27:23 मत्ती 27:24 मत्ती 27:25 मत्ती 27:26 मत्ती 27:27 मत्ती 27:28 मत्ती 27:29 मत्ती 27:30 मत्ती 27:31 मत्ती 27:32 मत्ती 27:33 मत्ती 27:34 मत्ती 27:35 मत्ती 27:36 मत्ती 27:37 मत्ती 27:38 मत्ती 27:39 मत्ती 27:40 मत्ती 27:41 मत्ती 27:42 मत्ती 27:43 मत्ती 27:44 मत्ती 27:45 मत्ती 27:46 मत्ती 27:47 मत्ती 27:48 मत्ती 27:49 मत्ती 27:50 मत्ती 27:51 मत्ती 27:52 मत्ती 27:53 मत्ती 27:54 मत्ती 27:55 मत्ती 27:56 मत्ती 27:57 मत्ती 27:58 मत्ती 27:59 मत्ती 27:60 मत्ती 27:61 मत्ती 27:62 मत्ती 27:63 मत्ती 27:64 मत्ती 27:65 मत्ती 27:66



मत्ती 27:26 पर टीका: क्रूर निर्णय और संताप का स्रोत
यूसुफ के मुकदमे के बाद, पिलात ने भीड़ की मांग मानते हुए बरअब्बा को छोड़ दिया और यीशु को कोड़े लगवाकर क्रूस पर चढ़ाने की सजा दी। इस verse में तीन प्रमुख क्रमस्पष्ट बातें सामने आती हैं: गाँव-गाँव की भीड़ का दबाव, सत्ताधारी अधिकारियों की नीति और यीशु के दिलासा-निर्वChez धार्मिक प्रतीक-रचना। यह निर्णय केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस समाज के नैतिक और आध्यात्मिक ढांचे का निरीक्षण है जो दखल देता है कि कमजोरी या डर के कारण इंसान असामयिक बुराई को फैलाने में सक्षम हो जाते हैं.
केंद्रीय मतलब
फरमानस्वरूप, बाराब्बा के बजाय यीशु को क्रूस पर चढ़ाने की मंजूरी दी गई। यह दिखाता है कि सामाजिक सदस्यता, राजनीतिक दबदबा और डर-सम्बद्ध मतदान मिलकर किस प्रकार न्याय के व्यवहार को भ्रष्ट कर देते हैं। परमेश्वर की आपसी बनावट में यह घटना प्रभु यीशु के लिए भारी कष्ट का मार्ग प्रशस्त करती है, ताकि मानवजाति के पापों की कीमत चुकाई जा सके।
तीन प्रमुख विषय
संदर्भ के साथ सम्बन्ध
यह घटना पूर्व-प्राचीन न्याय व्यवस्था और जलूसभरे समारोहों के संदर्भों से जुड़ी है। अन्य बाइबल पाठों में प्रभु के बलिदान की दिशा स्पष्ट होती है—जहाँ मानव इतिहास में पाप और दया के बीच संघर्ष सामने आता है:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि यीशु की क्रूस-यात्रा न केवल एक अपराध-गरीबी की कहानी है, बल्कि परमेश्वर के अद्भुत प्रेम की प्रभावी योजना की केंद्रीय कड़ी है।
व्यापक विचार-योग्य अनुप्रयोग
कठोर निर्णयों के समय हमें यह याद रखना चाहिए कि विश्वास की राह में दबाव के कारण गलत आचरण करना उचित नहीं। यीशु के उदाहरण से सीखें: सचाइयों को मजबूती से व्यक्त करना, परायों के अनुरोधों के विरुद्ध ईमानदारी बनाए रखना और परमेश्वर की योजना पर भरोसा करना। आज के सामाजिक दबाव में भी हम नैतिक स्थिति की रक्षा करें और कमजोरों के पक्ष में खड़े हों।
संक्षेप सार
मत्ती 27:26 में बरअब्बा की रिहाई और यीशु के क्रूस-उद्धार का निर्णय एक कठिन सामाजिक-राजनीतिक त्रिकोण को दर्शाता है—जहाँ सत्ता और भीड़ ने नैतिकता को दबा दिया। इस घटना के भीतर परमेश्वर की योजना, यीशु के बलिदान और उद्धार का मार्ग स्पष्ट होता है, जो मानव जाति के लिए प्रेम और चुकाने के कारण का प्रमाण बनता है।
संदर्भ उद्धरण (संक्षेप): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से जुड़ी सामान्य कठिनाइयों के साथ, वे शरीर-आधारित विश्लेषण दिए गए हैं—"उनके लिए छोड़ दिया" और "क्रूस पर चढ़ाया गया" के भाव सूचक हैं; इन पंक्तियों के लिए वे सामान्य टिप्पणियाँ देते हैं, किन्तु यहां हमने उनके पूर्ण उद्धरणों का टेक्स्ट नहीं दिया है।