Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 27:1 मत्ती 27:2 मत्ती 27:3 मत्ती 27:4 मत्ती 27:5 मत्ती 27:6 मत्ती 27:7 मत्ती 27:8 मत्ती 27:9 मत्ती 27:10 मत्ती 27:11 मत्ती 27:12 मत्ती 27:13 मत्ती 27:14 मत्ती 27:15 मत्ती 27:16 मत्ती 27:17 मत्ती 27:18 मत्ती 27:19 मत्ती 27:20 मत्ती 27:21 मत्ती 27:22 मत्ती 27:23 मत्ती 27:24 मत्ती 27:25 मत्ती 27:26 मत्ती 27:27 मत्ती 27:28 मत्ती 27:29 मत्ती 27:30 मत्ती 27:31 मत्ती 27:32 मत्ती 27:33 मत्ती 27:34 मत्ती 27:35 मत्ती 27:36 मत्ती 27:37 मत्ती 27:38 मत्ती 27:39 मत्ती 27:40 मत्ती 27:41 मत्ती 27:42 मत्ती 27:43 मत्ती 27:44 मत्ती 27:45 मत्ती 27:46 मत्ती 27:47 मत्ती 27:48 मत्ती 27:49 मत्ती 27:50 मत्ती 27:51 मत्ती 27:52 मत्ती 27:53 मत्ती 27:54 मत्ती 27:55 मत्ती 27:56 मत्ती 27:57 मत्ती 27:58 मत्ती 27:59 मत्ती 27:60 मत्ती 27:61 मत्ती 27:62 मत्ती 27:63 मत्ती 27:64 मत्ती 27:65 मत्ती 27:66
मत्ती 27:49 पर टिप्पणी
इस पद में क्रूस पर यीशु की परिस्थितियाँ अत्यंत तनावपूर्ण हैं। गाँव-गाँव से श्रोताओं की भीड़, सैनिकों की क्रूरता, और मित्र-परिजन की आशंकाएं साथ-साथ चलती हैं. जिस क्षण यीशु पर अंतिम बुलावा किया जाता है, भीड़ और लाते समय एक आवाज उठती है—"रह जाओ, देखें, एलिय्याह उसे बचाने आता है कि नहीं"। यह विचार केवल एक संकेतक है कि लोग मसीह के उद्धारकारी कार्य को अपने तरीके से समझना चाहते थे; कुछ इसे एक चमत्कारिक चिह्न के तौर पर देखने की उम्मीद रखते थे, ताकि यह प्रमाणित हो सके कि वह सचमुच परमेश्वर का पुत्र है, या कम से कम एक शानदार चमत्कार दिखाने वाला व्यक्ति।
मुख्य अर्थ
यह corto-उल्लेख उस समय के सामुदायिक मनोभाव का प्रतिनिधित्व करता है जब लोग उद्धारकर्ता से चमत्कार की प्रतीक्षा करते हैं। verse के भीतर यह बताता है कि लोग यीशु के बारे में सोच रहे थे कि वे उसे बचाने कैसे आएंगे—यानी एलिय्याह का अप्रत्यक्ष उद्धार-प्रेरक संकेत। परन्तु इस दृष्य में सत्य यह है कि परमेश्वर का समय और योजना मानवीय उम्मीदों से भिन्न है; उद्धार एक निपुण, दयालु, और पूर्ण रूप से परमेश्वर के अनुसार पराक्रमी तरीके से ही आता है, भले लोग उसे वैसा न समझें जैसा वे चाहते हैं।
केन्द्रित themes
संबद्ध पद और विचार
फरवरी संबंधित संदर्भ जहाँ उद्धार के चमत्कार-आकांक्षा पर स्पष्ट प्रकाश जाता है—यूहन्ना 2:19-21 (यहोवा के पुत्र के उद्धार-प्रकार) और मरकוס 15:34 (क्रूस पर यीशु की आखिरी पुकार)। इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि चमत्कार की चाहत वहम नहीं, बल्कि परमेश्वर के कर्तव्य-योजनाओं के अनुरूप सत्य है।
व्यावहारिक परिशीलन
हमारे लिए सीख यह है कि व्यक्ति-आशाओं और परमेश्वर की योजना के बीच संतुलन कैसे स्थापित करें: विश्वास रखें कि परमेश्वर अपने समय पर और अपने उद्देश्य के अनुसार काम करता है, भले ही वह हमारी अपेक्षाओं से भिन्न हो। क्रूस के संदेश में जीवन और पाप-मुक्ती का मार्ग है, न कि केवल चमत्कारों की खोज।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस दृश्य में हमें यह स्मरण होता है कि उद्धार का परम सत्य चमत्कार से नहीं, परमेश्वर की धैर्यपूर्ण योजना से आता है. “रह जाओ” का संकेत कहता है—तुम्हारे द्वारा माँगे गए चमत्कार अभी समय पर नहीं, परंतु क्रूस और मरा हुआ-जी उठना ही परम उद्धार का केन्द्र है।
cross-reference सार
1) मरकस 15:34 — यीशु की अंतिम पुकार; क्रूस के समय परमेश्वर की उपस्थिति और पीड़ा का रहस्य स्पष्ट होता है।
2) मत्ती 26:53 — परमेश्वर के दूतों के साथ सुरक्षा और जय-जयकार का मार्ग, ताकि क्रूस वह խնդरूप में पूरा हो सके।
3) योहान्न 2:19-21 — उद्धार का वास्तविक चिह्न: मसीह की मृत्यु और पुनर्जीवन ही उद्धार का प्रमाण है, न कि प्रारम्भिक संकेत या चमत्कार।
उद्धरण नोट: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के ठोस विचारों के अनुपयुक्त संक्षेपण मिलते हैं; यदि आप चाहें, तो मैं इन प्यारे टिप्पणीकारों के संक्षिप्त, सही-पाठ उद्धरणों को हिंदी सार में दे सकता हूँ।