Old Testament
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मत्ती 27:1 मत्ती 27:2 मत्ती 27:3 मत्ती 27:4 मत्ती 27:5 मत्ती 27:6 मत्ती 27:7 मत्ती 27:8 मत्ती 27:9 मत्ती 27:10 मत्ती 27:11 मत्ती 27:12 मत्ती 27:13 मत्ती 27:14 मत्ती 27:15 मत्ती 27:16 मत्ती 27:17 मत्ती 27:18 मत्ती 27:19 मत्ती 27:20 मत्ती 27:21 मत्ती 27:22 मत्ती 27:23 मत्ती 27:24 मत्ती 27:25 मत्ती 27:26 मत्ती 27:27 मत्ती 27:28 मत्ती 27:29 मत्ती 27:30 मत्ती 27:31 मत्ती 27:32 मत्ती 27:33 मत्ती 27:34 मत्ती 27:35 मत्ती 27:36 मत्ती 27:37 मत्ती 27:38 मत्ती 27:39 मत्ती 27:40 मत्ती 27:41 मत्ती 27:42 मत्ती 27:43 मत्ती 27:44 मत्ती 27:45 मत्ती 27:46 मत्ती 27:47 मत्ती 27:48 मत्ती 27:49 मत्ती 27:50 मत्ती 27:51 मत्ती 27:52 मत्ती 27:53 मत्ती 27:54 मत्ती 27:55 मत्ती 27:56 मत्ती 27:57 मत्ती 27:58 मत्ती 27:59 मत्ती 27:60 मत्ती 27:61 मत्ती 27:62 मत्ती 27:63 मत्ती 27:64 मत्ती 27:65 मत्ती 27:66



यह पाठ किस बात का संकेत देता है
मत्ती 27:15 में पाठक को यह समझना है कि गवर्नर का प्रचलन था—पर्व के अवसर पर वे एक बन्दी को चुनकर छोड़ते थे। यहाँ प्रयोजन यह है कि क्रूस समस्या और पाप के प्रतिफल में मानव-नीति कितना अस्थायी और परिस्थिति-प्रधान होता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना रोमी शासन के अन्तर्गत यरुशलेम के निवासियों के सामुदायिक रीति-रिवाजों से जुड़ी है। पर्व के समय लोग शांति और सार्वजनिक प्रवचन चाहते थे, इसलिए राज्य प्रायः जनता के चयन के अनुसार कुछ असहाय बन्दियों को मुक्त कर देता था। मत्ती के अनुसार यह प्रथा यीशु के समय भी मौजूद थी, परन्तु जनसमूह ने बार-बार बाराबास के पक्ष में बात की।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटी थीमैटिक सूची
cross-reference और उनके छोटे स्पष्टीकरण
मरकुस 15:6-15 में भीड़-निर्णय और बाराबास के पक्ष में विकल्प देखा जा सकता है; इससे यह स्पष्ट होता है कि पीलिया-लड़ाई में शासन कितना राजनीतिक हो सकता है।
यहोशू 2:1 जैसी घटनाओं में चयन की राजनीति, जोेरी भीड़ और सैनिक-व्यवस्था के बीच सम्मिलन दिखाती है; उद्धार के रास्ते अक्सर सामान्य साधनों से उलझे रहते हैं।
यूहन्ना 19:14-16 में यीशु का क्रूस-मार्ग तत्कालीन नेता-नीति के अनुरूप घटित होता है; यह दर्शाता है कि चक्र कथा में प्रभु के उद्देश्य कैसे पूरा होते हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम देखते हैं कि समाज की नीति और लेने-देने की राजनीति कभी-कभी उच्च सत्य के लिए रोड़ा बन जाती है। यीशु का चयन इस बात की याद दिलाता है कि परमेश्वर का उद्धार व्यक्तियों के स्वार्थ से ऊपर है, और कठिन समय में भी ईमानदारी से शासन-न्याय के साथ चलना चाहिए।
प्रत्येक संदर्भ की कुंजी बातें
यहाँ कुछ विद्वानों के संक्षिप्त निष्कर्ष मिलते हैं जिन्हें स्थानीय पाठ ने सारगर्भित रूप से ग्रहण किया है:
हेनरी, बॉर्न्स या क्लार्क के निवासी विचारों से जोड़े जाने पर एक संयुक्त निष्कर्ष निकलता है—यह पाठ राजनीतिक दबाव के बावजूद परमेश्वर की योजना के पूर्ण होने की दिशा दिखाता है।
निष्कर्ष
मत्ती 27:15 के माध्यम से हम यह सीखते हैं कि मानव-नीति के रंग कैसे कभी-कभी परमेश्वर के उद्धार-कार्य के साथ संगत नहीं होते; फिर भी भगवान अपनी महिमा के कारण घटनाओं को मोड़कर उद्धार को पूरा करते हैं।
कृति-स्रोत संकेत: इस पर आधारित कुछ पारंपरिक टिप्पणीकारों के विचारों से प्रेरणा मिली है, जैसे Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke।