Old Testament
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मत्ती 27:1 मत्ती 27:2 मत्ती 27:3 मत्ती 27:4 मत्ती 27:5 मत्ती 27:6 मत्ती 27:7 मत्ती 27:8 मत्ती 27:9 मत्ती 27:10 मत्ती 27:11 मत्ती 27:12 मत्ती 27:13 मत्ती 27:14 मत्ती 27:15 मत्ती 27:16 मत्ती 27:17 मत्ती 27:18 मत्ती 27:19 मत्ती 27:20 मत्ती 27:21 मत्ती 27:22 मत्ती 27:23 मत्ती 27:24 मत्ती 27:25 मत्ती 27:26 मत्ती 27:27 मत्ती 27:28 मत्ती 27:29 मत्ती 27:30 मत्ती 27:31 मत्ती 27:32 मत्ती 27:33 मत्ती 27:34 मत्ती 27:35 मत्ती 27:36 मत्ती 27:37 मत्ती 27:38 मत्ती 27:39 मत्ती 27:40 मत्ती 27:41 मत्ती 27:42 मत्ती 27:43 मत्ती 27:44 मत्ती 27:45 मत्ती 27:46 मत्ती 27:47 मत्ती 27:48 मत्ती 27:49 मत्ती 27:50 मत्ती 27:51 मत्ती 27:52 मत्ती 27:53 मत्ती 27:54 मत्ती 27:55 मत्ती 27:56 मत्ती 27:57 मत्ती 27:58 मत्ती 27:59 मत्ती 27:60 मत्ती 27:61 मत्ती 27:62 मत्ती 27:63 मत्ती 27:64 मत्ती 27:65 मत्ती 27:66



पदमुक्त nghĩa: मत्ती 27:66 का सीधे-सीधे अर्थ
यही वचन कहता है कि पहरेदारों को tomb के पास से साथ लेकर गया गया, भंवरित पत्थर को पक्का मोहर लगाकर कब्र की रखवाली की गई। सरल शब्दों में इसका मतलब है: यीशु की कब्र की सुरक्षा दृढ़ कर दी गई ताकि कोई चोरी-चला कर शास्त्रानुसार सत्य को बदल न दे।
सं contextual पृष्ठभूमि
मत्ती 27 में यीशु की क्रूस पर चढ़ाई, मृत्यु, और कब्र में रखने के क्रम के बाद के घटनाक्रम आते हैं। पॉलिसी राजाओं के समय, कब्र की रखवाली के लिए पहरेदार नियुक्त होते थे, ताकि अनजाने लोग कब्र से निकलकर झूठा प्रचार न करें। यहाँ की घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि अधर्म ने अपनी सुरक्षा मजबूत की, परन्तु परमेश्वर की योजना के विरुद्ध यह सुरक्षा कभी वास्तविक जीत नहीं पाती।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
संस्कृतियों के साथ संबद्ध उद्धरण (HINIRV संदर्भ)
यह अनुभाग वह संदेश देता है कि मानव-यन्त्रणा और राजसी सुरक्षा भी परमेश्वर के साक्षात्कार को रोक नहीं सकतीं।
संबंधित आयतें और संक्षिप्त व्याख्या
1) एक अन्य गवाह के अनुसार पहरेदार और मोहर: यह घटना दर्शाती है कि मृत्यु के बाद भी पवित्र विधान के साथ प्रतिरोध करते हुए लोग अपने तरीकों से प्रमाणित कर रहे थे।
2) कब्र के पत्थर की महिमा बनाम प्रभु की महिमा: मानव सुरक्षा छोटे से बढ़कर इस बात की ओर इशारा करती है कि परमेश्वर की महिमा उससे ऊपर है।
3) पुनर्जीवन की तैयारी कैसे होती है: इतिहास की इस चरण से प्रेरणा मिलती है कि ईश्वर की योजना समय-समय पर पूर्ण होती है।
शब्द-सार और व्यवहारिक निष्कर्ष
हम देख सकते हैं कि मानव के सुरक्षा-उपाय कितने भी मजबूत हों, परमेश्वर के उद्धारकार्य की गति को रोक नहीं सकते। यह वाकया स्मरण दिलाता है कि विश्वास में रखे गए सुरक्षा-उपाय परमेश्वर की वास्तविक योजनाओं का प्रतिरोध नहीं कर सकते। हमारे लिए उत्साह और धीरज से चलना सीखना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर के उद्देश्यों की पूर्ति समय आने पर ही होती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (सारांश)
कुटुंब के संदर्भ में, अन्य साक्ष्यों की छोटी-छोटी पुष्टि दिखाती है कि हार-जीत से ऊपर परमेश्वर का उद्देश्य है। इन संदर्भों में घटना-समय की सुरक्षा और आशा को फिर से पुष्ट किया गया है।
नोट: नीचे प्रकाशित उद्धरण Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट शब्दों के छोटे अंश हों तो उनमें से केवल वही जिसमें स्पष्ट सामग्री उपलब्ध हो वही उद्धृत किया गया है; पूर्ण वाक्य-युक्त उद्धरण नहीं दिया गया है, ताकि मूलात्नक न्यायसंगत टिप्पणी बनी रहे।
सारंग निष्कर्ष
स्थिति अभी आसान नहीं दिखती, परन्तु ईश्वर की योजना की दिशा किसी भी मानवीय सुरक्षा से ऊपर है। यह पाठ हमें साहस देता है कि सत्य उद्धार के मार्ग पर भरोसा बनाए रखें और जीवन के कठिन क्षणों में भी परमेश्वर की प्रमाणिकता पर टिके रहें।