लूका 18:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो कोई परमेश्‍वर के राज्य को बालक के समान ग्रहण न करेगा वह उसमें कभी प्रवेश करने न पाएगा।”

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लूका 18:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 18:17 — बालक के समान ग्रहण करें

प्रभु यीशु का यह कथन लोग-लोग के बीच humility और निर्भरता की महत्ता को उभारता है। इस पाठ का आरम्भ परमेश्वर के राज्य में प्रवेश पाने के लिए एक विशिष्ट आडंबर या बड़े-आयतन के कर्मों की अपेक्षा नहीं, बल्कि एक बचपन जैसे सरल विश्वास की आवश्यकता को दर्शाता है। जब लोग “परमेश्वर के राज्य” के बारे में चर्चा करते हैं, तब वे अक्सर अधिकार, मुद्रा या वर्चस्व की भाषा बोलते हैं; पर यीशु कहते हैं, ऐसे राज्य में प्रवेश के लिए बच्चे की तरह आना अनिवार्य है।

पंक्ति-आधार से पाठ की ध्वनि

यह उद्धरण उस घटना से जुड़ा है जिसमें यीशु बच्चों को अपने पास लाने के लिए आह्वान करते हैं और शास्त्री, प्रधान-पुरोहित उनसे रोकते हैं। तब यीशु कहते हैं, जो लोग परमेश्वर के राज्य को बालक के समान ग्रहण नहीं करेंगे, वे उससे बाहर रहेंगे। यहाँ “बालक के समान ग्रहण” का अर्थ है—स्वीकार करना, सरल विश्वास रखना, और ईमानदारी से निर्भर रहना। यह परमेश्वर के राज्य की कुंजी है: आत्म-निरपेक्ष अहंकार का अभाव और दिव्य कृपा की आवश्यकता।

गौर करें: भगवान और विश्वास की शिक्षा

यह वाक्य दिखाता है कि परमेश्वर हर तरह की दलील, योग्यता या स्व-प्रशंसा को अस्वीकार कर देते हैं, और अपने राज्य में प्रवेश के लिए एक विनम्र, निर्भर-आस्था की मांग करते हैं। यह उद्धृत विचार अन्य भागों से मेल खाता है जहाँ विश्वास, बच्चों की तरह निर्भरता और प्रेम का दर्जा परमेश्वर के सामीप्य के लिए चुना गया है।

महत्वपूर्ण शब्द और छवियाँ

  • (kingdom):
  • :
  • (receive, accept):

“बालक के समान ग्रहण” का अर्थ है—आत्म-संयम, विश्वास की सरलता, और ईश्वर की कृपा को बिना प्रयास-योग्यता के स्वीकारना।

अन्य संबंधित पाठ

1) मत्ती 18:3 में येशु ने बच्चों को लाने की बात कर के कहा कि यदि तुम परिवर्तन-रूप में नहीं आते हो, तो तुम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं करोगे।

2) मरकुस 10:15 में कहा गया है कि जो कोई परमेश्वर के राज्य को बच्चों के समान नहीं ग्रहण करेगा, वह उसमें प्रवेश नहीं कर सकता।

3) यूहन्ना 3:3-5 में पुनर्जन्म की आवश्यकता पर प्रकाश है—स्वर्ग के राज्य के लिए नया जन्म अनिवार्य है।

वर्तमान-जीवन में अनुप्रयोग

आज के पाठक के लिए यह संदेश स्पष्ट है: आध्यात्मिक प्रगति के लिए भव्य योजना, सामाजिक दबाव, या धार्मिक दिखावे से ऊपर उठकर एक साधा, विश्वासयुक्त जीवन चाहिए। हम अपने-अपने विचारों, अनुभवों और उपलब्धियों को छोड़कर प्रभु के पास आते हैं—उसके अनुग्रह और ममता पर निर्भर रहते हैं। यह व्यवहार समुदाय के भीतर प्रेम, क्षमा, और सेवा के प्रकार को मजबूत बनाता है।

संक्षिप्त एकीकृत निष्कर्ष

परमेश्वर के राज्य में प्रवेश का रास्ता कोई बड़े दांव-पेच नहीं, बल्कि बच्चों की तरह सादा-विश्वासी निर्भरता है। यह वचन हमें स्मरण दिलाता है कि हमारी सफलता या सम्मान से नहीं, बल्कि प्रभु की कृपा से प्रवेश मिलता है।

याद रखें: यह संदेश हमारे समय के लिए भी सच है—आत्म-समर्पण और सहज विश्वास, परमेश्वर के पास आने का मूल मंत्र है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 18:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मरकुस 10:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मरकुस 10:15 (HINIRV) »
मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो कोई परमेश्‍वर के राज्य को बालक की तरह ग्रहण न करे, वह उसमें कभी प्रवेश करने न पाएगा।”

मत्ती 18:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 18:3 (HINIRV) »
और कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर पाओगे।

1 पतरस 1:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 पतरस 1:14 (HINIRV) »
और आज्ञाकारी बालकों के समान अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश न बनो।

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