Old Testament
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लूका 18:1 लूका 18:2 लूका 18:3 लूका 18:4 लूका 18:5 लूका 18:6 लूका 18:7 लूका 18:8 लूका 18:9 लूका 18:10 लूका 18:11 लूका 18:12 लूका 18:13 लूका 18:14 लूका 18:15 लूका 18:16 लूका 18:17 लूका 18:18 लूका 18:19 लूका 18:20 लूका 18:21 लूका 18:22 लूका 18:23 लूका 18:24 लूका 18:25 लूका 18:26 लूका 18:27 लूका 18:28 लूका 18:29 लूका 18:30 लूका 18:31 लूका 18:32 लूका 18:33 लूका 18:34 लूका 18:35 लूका 18:36 लूका 18:37 लूका 18:38 लूका 18:39 लूका 18:40 लूका 18:41 लूका 18:42 लूका 18:43



सीधे अर्थ का बयान
मनुष्य के लिए संभव नहीं है, पर परमेश्वर के लिए सब कुछ संभव है — लूका 18:27. यहां यीशु ने दिखाया कि मानव प्रयत्नों की सीमा और परमेश्वर के चमत्कारिक सामर्थ्य के बीच अंतर है; जहाँ मनुष्य धैर्य और प्रयास से संभव नहीं बनाते, वहाँ परमेश्वर की कृपा से संभव हो सकता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वाक्य उन घटना-परिस्थितियों में आता है जहां एक मृत्युदंडी तस्वीर में एक धरोहर, धैर्य और विश्वास पर जोर दिया गया है। यीशु ने अपने चेलों को बताया कि धन-বिरुद, शक्ति या शौर्य से उद्धार नहीं मिलता, वरन अल्प विश्वास और परमेश्वर की अनुग्रह पर निर्भरता ही वास्तविक परिवर्तन लाती है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
- परमेश्वर का सामर्थ्य मानवीय सीमाओं से परे है; वह विषम स्थितियों में भी उद्दीपन और सहायता प्रदान करता है।
- यह वाक्य प्रेरित करता है कि हमारी दुआएँ और आस्था semblent असम्भव दिखने वाले मादलों में भी घातक हार नहीं मानतीं।
- विश्वास की स्थिति में, हम उम्मीद के साथ हाथ बढ़ाते हैं और परमेश्वर के राज के लिए उपयुक्त रास्तों में कदम रखते हैं।
कथनात्मक निष्कर्ष और स्रोत-आधारित दृष्टिकोण
इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संदर्भ से संक्षिप्त संकेत इस प्रकार हैं:
संकेतक क्रॉस-रेफरेंसेस
1) परमेश्वर के भय और प्रार्थना में निर्भरता का पाठ: अन्य उद्धारक घटनाओं में भी मनुष्य की कमजोरी के बावजूद प्रभु की शक्ति स्पष्ट होती है।
2) विश्वास की परख: वह दृढ़ आस्था जो मानव प्रयास से परे है, परमेश्वर की कृपा से समर्थित होती है।
3) उद्धार का स्रोत: धर्म-सुधार और चमत्कारिक परिवर्तन केवल मनुष्य के esfuerzo से नहीं होता, बल्कि परमेश्वर की कृपा से होता है।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
जब स्थितियाँ कठिन लगें, तब भी बाधाओं के बीच विश्वास बनाए रखें। प्रभु की कृपा की अपेक्षा रखें और अपनी दुआओं में विनय व आशा बनाए रखें। परमेश्वर के साथ संभव है कि जो सामान्य दृष्टि से असंभव लगे, वह हो जाए।