Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 19:1 मत्ती 19:2 मत्ती 19:3 मत्ती 19:4 मत्ती 19:5 मत्ती 19:6 मत्ती 19:7 मत्ती 19:8 मत्ती 19:9 मत्ती 19:10 मत्ती 19:11 मत्ती 19:12 मत्ती 19:13 मत्ती 19:14 मत्ती 19:15 मत्ती 19:16 मत्ती 19:17 मत्ती 19:18 मत्ती 19:19 मत्ती 19:20 मत्ती 19:21 मत्ती 19:22 मत्ती 19:23 मत्ती 19:24 मत्ती 19:25 मत्ती 19:26 मत्ती 19:27 मत्ती 19:28 मत्ती 19:29 मत्ती 19:30



मुख्य interpretive बिंदु
मत्ती 19:28 में यीशु अपने शिष्यात्र को बतला रहे हैं कि नया संसार आते ही वह अपनी महिमा के सिंहासन पर बैठेंगे, और उनके पीछे चलने वाले उनके साथ बारह गोत्रों के न्याय में भागीदार बनेंगे। यह वाक्य भविष्य की योजना को स्पष्ट करता है कि अनुयायियों का दायित्व और स्थान, विश्वास के परिणामस्वरूप, परमेश्वर की योजना के अनुसार पूरा होगा। यह उद्धार और न्याय के एक संयुक्त चित्र को प्रस्तुत करता है: ईश्वर की महिमा में एक नई स्रष्टि और उसमें विश्वासियों का भागीदारी।
कथा-संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
यह पाठ ईसा के पत्तन-यात्रा के बाद के समय की बात है, जहाँ वे अपनी मृत्यु और पुनर्जivsन की पूर्व-चेतावनाएँ दे रहे हैं। शिष्यगण की कठिनाई यह है कि वे सार्वजनिक सत्ता और महिमा के विषय में उच्चआकांक्षा रखते हैं। यीशु का उत्तर यह संकेत देता है कि घूमते संसार में नहीं, बल्कि परमेश्वर के राज्य के भीतर असली स्थान और न्याय का मानक रहा है।
दर्शनिक महत्त्व (Theological significance)
- उत्पत्ति का नया राज्य: यह वाक्य बताता है कि नया निर्माण वह समय है जब मरम्मत और न्याय की परमधर्मी व्यवस्था स्थापित होगी।
- सहभागिता और सेवक-यात्रा: बारह गोत्रों के न्याय में भागीदारी बताती है कि विश्वासियों का उत्तरदायित्व सामुदायिक और 탁िष्ठ है, न कि सिर्फ व्यक्तिगत लाभ।
- आज्ञापालन में सिद्घांत: पीछे चलना स्वीकार्यता के साथ जुड़ा है—जो अपनी प्रतिष्ठा नहीं गढ़ते, वे परमेश्वर के राज्य में सम्मान प्राप्त करते हैं।
प्रमुख टिप्पणियाँ (Cross-reference insights)
नोट: ऊपर के क्रास-रेफरेंस पर संक्षेप में यह समझना चाहिए कि पाठक ऐतिहासिक-स्वरलम्भों के बजाय सुसमाचार की सत्ता और नई सृष्टि के न्याय के नियमों को देखता है।
विचार-विमर्श के प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यीशु का यह वचन आश्वस्त करता है कि नया निर्माण परमेश्वर की महिमा के सिंहासन पर ही आकार लेगा, और उनके पीछे चलने वालों को बारह सिंहासनों पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों के न्याय में भागीदारी मिलेगी। यह केवल एक भविष्य की सत्ता-यात्रा नहीं, बल्कि आज के व्यवहार और संस्थानों के लिए एक प्रेरणा है कि fidèle पालन, समान सेवा, और नम्रता से राज्य के सिद्धांत लागू हों।
उद्धरण ध्यान दें ( quoted insights )
महत्त्वपूर्ण तुलनात्मक टिप्पणी के दौरान, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के अभिलेखों से संक्षिप्त उद्धरणों को संदर्भित किया गया है। आवश्यक रूप से, इन विद्वानों के मौलिक वाक्यों के संक्षिप्त प्रभाव को ही लिया गया है—पूर्ण टेक्स्ट उद्धृत नहीं किया गया है।