मत्ती 19:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने उनसे कहा, “मूसा ने तुम्हारे मन की कठोरता के कारण तुम्हें अपनी पत्‍नी को छोड़ देने की अनुमति दी, परन्तु आरम्भ में ऐसा नहीं था।

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मत्ती 19:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का निष्कर्ष

मत्ती 19:8 में यीशु बताते हैं कि शब्दार्थ में: संस्थागत विवाह के नियम मूसा ने पुरुषों को पत्नियों को छोड़ने की अनुमति दी, पर आरम्भ में यह नहीं था; क्रिया-नीति का उद्देश्य कठोरतापूर्ण मानवीय व्यवहार से उबरना है। अर्थात् परमेश्वर की प्राथमिक इच्छा विवाह का स्थायित्व और एकत्व है, पर मानवीय कठिनाइयों के कारण व्यवस्था ने छूट का मार्ग दिया।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह पाठ ईसा मसीह के साथ मसीही शिक्षाओं की तीसरी-चौथी कथा के समय का है, जहाँ वे विवाह-विचार, तलाक, और पुनर्विवाह पर चर्चा कर रहे हैं। पीछे के संदर्भ में यहूदियों की तलाक-परंपराओं पर प्रश्न उठता है, और यीशु स्पष्ट करते हैं कि आरेख के आरम्भ से परम उद्देश्य एकत्व ही था। मूसा द्वारा तलाक की अनुमति दी गई थी क्योंकि लोगों की हृदय कठोरता के कारण व्यवस्था को हल्के-फुल्के मार्ग से दिया गया।

interpretive observations

  • कठोर हृदय की परिभाषा: यह शब्द बताता है कि नैतिक बदलाव के पहले समाज में लोग अपनी पत्नियों को छोड़ने के लिए वैकल्पिक रास्तों की खोज करते रहे, और परमेश्वर ने उसी समय-सीमा में एक उपाय दिया ताकि विवाहित जोड़े के बीच स्थिरता बनी रहे।
  • आरम्भ का उद्देश्य: विवाह का मूल परिज्ञापन एकात्म और निष्कलंक बंधन है; तलाक केवल एक अस्थायी राहत के रूप में दिया गया, न कि परमादेश की सामान्य नियम-परकता।
  • यीशु का प्रवचन नीतिगत नहीं, पर नैतिक पुनरागमन का आग्रह है—प्रत्येक विवाह seeking पुनर्विचार और समर्पण की ओर उन्मुख हो।

थीमेटिक बिंदु

  1. विवाह का इनिशियल डिज़ाइन: एक एकात्मक और स्थायी संबंध।
  2. कठोर हृदय बनाम आत्मीय परिवर्तन: परिवर्तन परमेश्वर के साथ संबंध में संभव है, जो तलाक के वैध मार्ग की आवश्यकता को कम कर देता है।
  3. कमी के बावजूद प्रोत्साहन: विवाह-विच्छेद के स्थान पर एक दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान को बढ़ाने की प्रेरणा।

क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संदर्भों के छोटे निष्कर्ष)

1) मरकुस 10:2-12: यीशु की तलाक-नीति का पुनरावलोकन और विवाह-सम्बन्ध की एकात्मता की पुष्टि।

2) मत्ती 5:31-32: एक उच्च नैतिक मानक जहाँ तलाक पर स्पष्ट निषेध और पुनर्विवाह के जोखिम की बात है।

3) इब्रानी 13:4: विवाह को महिमा दी गई है और सभी विवाहितों के लिए वह शुद्धता की माँग करता है।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

  • जोड़े एक दूसरे के प्रति वफादारी बनाए रखें, कठिन परिस्थितियों में भी एकता की कोशिश करें।
  • यदि कठिनाई आ गई हो, तो प्रेम, क्षमा और संवाद को प्राथमिकता दें; तलाक के विकल्प से पहले हर अवसर पर क्रोध-नियंत्रण और देखभाल करें।

एकीकृत सार

इस अंश में यीशु परंपरागत नियमों के पीछे छवि मिटाते नहीं, बल्कि उसकी गहराई बताते हैं कि विवाह का मूल उद्देश्य परमेश्वर के सामने एक पवित्र, स्थायी और प्रेमपूर्ण बन्धन है। मूसा के निर्देशों को समाज की कठोरता के कारण दी गई राहत के रूप में समझना चाहिए, ताकि विवाह-वक्र टूटे नहीं। जीवन-यात्रा में प्रेम और सम्मान को बनाए रखना ही आरम्भ के विचारों को संरक्षित करता है।

महत्वपूर्ण उद्धरण (एंट्री पन्ने) — Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलन से आवश्यक वाक्यांश:

“Moses, for the hardness of your hearts, suffered you to put away your wives” — यह अंश स्पष्ट करता है कि तलाक के नियम एक कठोर मनुष्य की दशा के लिए दी गई व्यवस्था है, न कि परम उद्देश्य।

“From the beginning it was not so” — आरम्भिक योजना विवाह की एकात्मकता को दर्शाती है; तलाक का मार्ग केवल व्यवहারের कठोरता के कारण दिया गया था।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 19:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फिर तुम ने यह दूसरा काम किया है कि तुम ने यहोवा की वेदी को रोनेवालों और आहें भरनेवालों के आँसुओं से भिगो दिया है, यहाँ तक कि वह तुम्हारी भेंट की ओर दृष्टि तक नहीं करता, और न प्रसन्‍न होकर उसको तुम्हारे हाथ से ग्रहण करता है। तुम पूछते हो, “ऐसा क्यों?”

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इस कारण पुरुष अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा और वे एक ही तन बने रहेंगे। (मत्ती 19:5, मर. 10:7,8, इफि. 5:31)

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वरन् उन्होंने अपने हृदय को इसलिए पत्थर सा बना लिया, कि वे उस व्यवस्था और उन वचनों को न मान सके जिन्हें सेनाओं के यहोवा ने अपने आत्मा के द्वारा पूर्वकाल के भविष्यद्वक्ताओं से कहला भेजा था। इस कारण सेनाओं के यहोवा की ओर से उन पर बड़ा क्रोध भड़का।

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