Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 19:1 मत्ती 19:2 मत्ती 19:3 मत्ती 19:4 मत्ती 19:5 मत्ती 19:6 मत्ती 19:7 मत्ती 19:8 मत्ती 19:9 मत्ती 19:10 मत्ती 19:11 मत्ती 19:12 मत्ती 19:13 मत्ती 19:14 मत्ती 19:15 मत्ती 19:16 मत्ती 19:17 मत्ती 19:18 मत्ती 19:19 मत्ती 19:20 मत्ती 19:21 मत्ती 19:22 मत्ती 19:23 मत्ती 19:24 मत्ती 19:25 मत्ती 19:26 मत्ती 19:27 मत्ती 19:28 मत्ती 19:29 मत्ती 19:30



मत्ती 19:29 पर टिप्पणी: उसके पीछे की कीमत और लाभ
यह वचन उस समय के प्रेरित-शिष्यत्व के अनुभवों को उद्घाटित करता है जब यीशु ने आध्यात्मिक प्रतिस्पर्धा और परिवार-धारणा के बीच संतुलन की बात कही। जो व्यक्ति जीवन में अपने घर–परिवार, संबंधों और सांसारिक संपत्ति को यीशु के नाम के लिये छोड़ देता है, उसे पृथ्वी पर तो सहयोग-प्राप्ति के साथ सौ गुना, और अंत में अनंत जीवन की सहभागिता मिलने की गारंटी है। यह वचन पारिवारिक रिश्तों के खोने या त्याग की प्रशंसा नहीं करता, पर यह बताता है कि परमेश्वर के राज्य के लिए दी जाने वाली कीमत कैसे मायने रखती है और इन सबसे ऊपर परमपिता ईश्वर का वरदान कितना विशाल है।
प्राथमिक संदर्भ का परिचय
यह वचन मत्ती की गवाही में है, जहाँ यीशु ने धन, परिवार और प्रतिष्ठा के साथ उद्धार-यात्रा के टकराव को स्पष्ट किया। मत्ती 19:16–30 में युवा सम्राट के साथ बातचीत के बीच यह वचन आता है, जब यीशु ने पूछा, “क्या मुझे जीवन में प्रवेश मिलेगा?” और युवा ने उत्तर दिया कि उसने सब कुछ Keeper के अनुसार किया है। जब यीशु ने उसे निर्देश दिया कि यदि वह पूर्ण होना चाहता है तो अपने धन और संपत्ति छोड़ दे, तो उसने निराश होकर वहां से चला गया। उसी क्रम में अब यह स्पष्टीकरण है कि जो लोग यीशु के नाम के लिये त्याग करते हैं, उन्हें एक नई अदला-बदली: यहाँ सौ गुना और वहाँ अनंत जीवन मिलेगा।
मुख्य संदेश
मुख्य थीम्स के साथ सम्बन्ध
इस वचन में तीन प्रमुख धागे स्पष्ट हैं: त्योţieाग्रहण (त्याग), परमेश्वर के राज्य की वास्तविकता, और ईश्वर की प्रतिदान-प्रणाली। यह बताता है कि कैसे परमेश्वर अपने अनुयायियों को नयी दृष्टि देता है—परिवार के साथ उनके प्रेम में भी वृद्धि—जब वे यीशु के नाम के लिये कदम बढ़ाते हैं। साथ ही यह स्मरण कराता है कि भौतिक नुकसान के बदले में आध्यात्मिक लाभ कैसे अविचल रहते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतार्थ संक्षेप)
1) लूका 14:33 — “यथार्थ में जो कोई भी अपनी वस्तुओं को छोड़कर मुझ पर चलना नहीं चाहता, वह मुझ पर काफ़ी प्रेम नहीं रखता।” यह संदर्भ बताता है कि त्याग एक प्रेरित निष्ठा का प्रतीक है।
2) मरकुस 10:29–30 — “घर, भाइयों-बहनों, पिता-माता, खेतों आदि के छोड़ने पर पूर्ण प्रतिफल मिलता है, साथ ही यहाँ इस जीवन में बहु गढ़े परिणाम और आगे जीवन।” यह बताता है कि उद्धार की राह में देय त्याग और देना कितना वास्तविक है।
3) मत्ती 6:19–21 — “आकाशीय धन संचय करो, जहां कीड़ा नहीं पड़ता, और चोरा नहीं चुराता।” यह दिखाता है कि स्थायी लाभ कहाँ रहता है और संसारिक संपत्ति की स्थानिकता का मूल्यांकन कैसे किया जाता है।
पौराणिक-आयतन और प्रचार-धर्म के साथ समेकन
जैसी विशिष्टता है, यहां का तात्पर्य धन से नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की अनुपस्थिति-त्याग से है, ताकि ईश्वर की सत्ता-परंपरा के अनुसार जीवन आगे बढ़ सके। ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के अनुसार (डायनेमिक संदेशन-उद्धरण), यहूदियों के सामाजिक ढांचे में परिवार सर्वोच्च था; यीशु की इस उक्ति ने यह दिखाया कि परमेश्वर के राज्य के लिए उसे प्राथमिकता देना एक नई सामाजिक-आयाम देता है, जो विश्वास में स्थिरता बनाये रखता है।
संक्षिप्त devotional विचार
कभी-कभी हमारे जीवन में ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें छोड़ना कठिन लगता है—पर यीशु हमें कहता है कि इस छोड़ने के पीछे एक भारी लाभ है। परमेश्वर का इनाम न सिर्फ भौतिक लाभ है, बल्कि आत्मिक जीवन, ईश्वर के संग निकटता और अनंत जीवन की गारंटी है। जैसी गहराई से प्रेरित-त्याग से हमें नया दृष्टिकोण मिलता है, उसी प्रकार हमें यह याद रखना चाहिए कि ईश्वर अपने बच्चों के लिये सर्वश्रेष्ठ दे सकता है, और उसका राज्य हमारा सर्वोत्तम लक्ष्य है।
“क्योंकि जिसे पिता ने भेजा है, वही परमेश्वर का राज्य है; और जो कुछ भी इस पृथ्वी पर छोड़ा गया, उसे वह सौ गुना से भी अधिक लौटाता है”—यह धारणा हमें आत्म-समर्पण की ओर प्रेरित करती है, ताकि हमारी आस्थाएं और भावना एक स्वर्गीय ध्वनि बनकर गूंजे।