मत्ती 19:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने उत्तर दिया, “क्या तुम ने नहीं पढ़ा, कि जिसने उन्हें बनाया, उसने आरम्भ से नर और नारी बनाकर कहा,

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मत्ती 19:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीरक्षण पाठ का तात्पर्य: मत्ती 19:4

उस प्रकार के प्रश्न में Jésus ने आरम्भ से नर-नारी की रचना के बारे में स्मरण कराया। पवित्र ग्रंथ के इस हिस्से में यीशु से शास्त्रार्थ का उद्देश्य, विवाह के इर्द-गिर्द उभरे धार्मिक विचारों के बीच स्पष्टता प्राप्त करना है। यह वाक्य Matthew 19:4 के संदर्भ में है, जब यीशु ने पूछा, क्या तुम नहीं पढ़ा कि जिसने उन्हें बनाया, उसने आरम्भ से नर और नारी बनाकर कहा…

स्थिति-स्थिति: तुरंत संदर्भ

ईसा मसीह इस प्रश्न-चर्चा के बीच में थे कि विवाह और तलाक के नियम किधर जाएँ। वे उद्धरण से प्रस्तुत करते हैं कि परमेश्वर ने आरम्भ में नर और नारी की रचना की थी—एक ऐसी आधारभूत योजना जो विवाह के एकत्व को दर्शाती है और तलाक के विचार को सीमित करती है.

पवित्र ग्रंथ से स्पष्टियाँ

इन शब्दों में यह साक्ष्य मिलता है कि: - परमेश्वर ने बनाते समय मानव जाति की बनावट निर्धारित की: पुरुष और स्त्री, समान दायित्व और समान गरिमा के साथ। - विवाह एक ईश्वरीय योजना है, न कि मानव-निर्मित संस्था; इसलिए तलाक का विचार उसके सम्मान और संरचना के विरुद्ध है जब तक कि अवरोधक परिस्थितियाँ न हों।

शब्द-समझ और इमेजरी

“आरम्भ से” और “नर और नारी बनाकर” जैसे शब्दों से यह स्पष्ट होता है कि विवाह के संस्थान की स्थापना प्रारम्भिक परमेश्वर की योजना का हिस्सा है, जो दोनों के बीच एक अत्यंत पवित्र संयुक्त अस्तित्व को दर्शाता है।

अनुयाय पंक्तियाँ के साथ संबंध

यह पाठ अन्य जिन शब्दों के साथ मूल्यवान है, वे हैं: - नर-नारी की एकता पर बल देने वाले अन्य उद्धरण जो विवाह के एकात्मक अपील को पुष्ट करते हैं। - विवाह-संरचना के बारे में प्राचीन आचरण जो प्रेम, समर्पण और एक दूसरे के सम्मान को बढ़ावा देते हैं। संक्षेप में: यह अनुशंसा करता है कि परमेश्वर की रचना-योजना के अनुरूप जीवन बिठाने से जीवन में स्थिरता और पवित्रता आती है।

Cross-references (संक्षिप्त व्याख्या)

  • उत्त्पत्ति 1:27 — परमेश्वर ने बनाते समय मानव-रचना को समान दायित्वों के साथ निर्दिष्ट किया; यह एकता का आधार देता है।
  • यहोशू 24:15 — यदि तुम चाहो तो तुम अपने घर-परिवार के लिए भगवान को चुनते हो; यह स्थिरता और वफादारी का महत्व बताता है।
  • मरकस 10:9 — “जो कुछ परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे लोग अलग न करें” की सलाह विवाह की एकात्मता को स्पष्ट करती है।

आज के लिए अनुप्रयोग

- विवाह के प्रति एक खोल-आधार बनता है: दो आत्माओं का एक साथ जुड़ना एक ईश्वरीय नियुक्ति है। आपातकालीन परिस्थितियों में भी एक-दूसरे के प्रति सम्मान और वफादारी बनाए रखना चाहिए।

- पारिवारिक निर्णयों में परमेश्वर की योजना को केन्द्र में रखें—जिनमें UNITY और प्रेम सर्वोपरि हों; तलाक जैसी अस्थायी राहों पर विचार करते समय भी मूल उद्देश्य को याद रखें।

एक संक्षिप्त समष्टि

यीशु का उत्तर यह दिखाता है कि परमेश्वर ने आरम्भ से जो योजना बनायी, उसे समझना और उसी के अनुसार जीवन बिताना आस्था का प्रमुख अंश है। यह वचन हमें बताता है कि विवाह एक ईश्वरीय रचना है, जिसे मान-समझ और गरिमा के साथ निभाना चाहिए।

नोट: नीचे उद्धृत Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से किसी खास वाक्यों के छोटे-फुट उद्धरण यदि उपलब्ध हों तो केवल वही इंटेग्रेट किए जातें हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 19:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उत्पत्ति 2:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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तब आदम ने कहा, “अब यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे माँस में का माँस है; इसलिए इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है।”

उत्पत्ति 1:27 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 1:27 (HINIRV) »
तब परमेश्‍वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्‍पन्‍न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्‍वर ने उसको उत्‍पन्‍न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की। (मत्ती 19:4, मर. 10:6, प्रेरि. 17:29, 1 कुरि. 11:7, कुलु. 3:10,1, तीमु. 2:13)

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उसने नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टि की और उन्हें आशीष दी, और उनकी सृष्टि के दिन उनका नाम आदम रखा*। (मत्ती 19:4, मर. 10:6)

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