Old Testament
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मत्ती 19:5 — संदर्भ और अर्थ
इस आयत में उद्धृत उद्धरण “इस कारण मनुष्य अपने माता पिता से अलग होकर अपनी पत्नी के साथ रहेगा और वे दोनों एक तन होंगे” प्रभु यीशु के विवाह-विधान की शिक्षा का भाग है। पहले भाग में यह कहा गया है कि विवाह की संयुक्तता परमेश्वर की योजना है: एक जोड़ा बनकर डबल नहीं, बल्कि एक नई इकाई बनकर जीवन भर साथ-साथ चलता है। संदर्भ में यीशु दीन-धर्म के संरचना (पवित्र विवाह) पर चर्चा करते हैं और यह दर्शाते हैं कि पति-पत्नी का बंधन माता-पिता की सीमा से ऊपर है, ताकि वे एक दूसरे के साथ एक नये रूप में एक हों।
मुख्य अर्थ
कुल मिलाकर इस आयत में विवाह की एकात्मता और समर्पण पर जोर है। “जाने” का अर्थ यहाँ “एक शरीर” की तरह एक-दूसरे से संबद्ध होना है; दो व्यक्तियों के मिलन से एक नई इकाई बनती है जिसमें पुरुष और महिला दोनों की भूमिका उभरती है। यह बताता है कि विवाह आत्मिक, भावनात्मक और सामाजिक बंधन को एक गहरे रिश्ते में रूप देता है, जहां पति-पत्नी एक दूसरे के लिए जीते हैं और अपने पूर्व सम्बन्धों के सीमित दायरे को पार कर देते हैं।
तीन प्रमुख विषय
प्रासंगिक अनुभाग/पात्र उद्धरण (Cross-references)
पवित्र विवाह के सिद्धांत पर विचार करते समय: उत्पत्ति 2:24 — “इस कारण मनुष्य अपने माता-पिता से अलग होकर अपनी पत्नी के साथ रहेगा; वे दोनों एक तन होंगे।” यह पुराने नियम में मूल बातें स्थापित करता है कि विवाह परमेश्वर की योजना में एक एकीकृत इकाई है। कुलगीत 2:16-17 और यूहन्ना 2:1-2 में भी वैवाहिक सम्मिलन की पवित्रता की चर्चा मिलती है।
अनुदेशात्मक दिशा और व्यवहारिक लाभ
- अपने दाम्पत्य संबंध में एकता के मूल्य को बढ़ावा दें; छोटा-छोटा दुख या मतभेद भी एक दूसरे के साथ मिलकर सुलझाएं।
- माता-पिता के प्रभाव को सम्मान दें, पर निर्णय और प्राथमिकता पत्नी/पति के साथ होते हैं जब परिवार की दिशा तय करनी हो।
- एक दूसरे की जरूरतों को जीवन-यात्रा में पहले रखें, ताकि दम्पति अपने “एक तन” के लक्ष्य को सचमुच अनुभव कर सके।
सारांश
मत्ती 19:5 माता-पिता से अलग होकर दाम्पत्य जीवन की नई इकाई बनाने केcalling पर जोर देता है—पति और पत्नी एक दूसरे के साथ एक तन बन जाते हैं। यह आयत विवाह की पवित्रता, एकता, और दोनों के बीच जिम्मेदारी के बारे में स्पष्ट निर्देशन देता है, ताकि दंपति अपने प्रेम और सहयोग से जीवन के हर चरण में साथ रहें।
इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के स्पष्ट उद्धरण शामिल हैं यदि उपलब्ध हों; नीचे संक्षेपित शब्दों में उनका विश्लेषण समाहित किया गया है।
कथन-उद्धरण (exact quotes, अगर उपलब्ध हों)
ऐतिहासिक commentary में संक्षिप्त कथन: “This is a great mystery: but I speak concerning Christ and the church” (अनुदेशात्मक संदर्भ हेतु तीनों पुरानी टिप्पणियों के सार) — उपयुक्त संदर्भ में यह विवाह की एकात्मता को आत्म-समर्पण के रूप में देखता है।