Old Testament
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मरकुस 16:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उन्होंने भी जाकर औरों को समाचार दिया, परन्तु उन्होंने उनका भी विश्वास न किया।
मरकुस 16:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मरकुस 16:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यूहन्ना 20:25 (HINIRV) »
जब और चेले उससे कहने लगे, “हमने प्रभु को देखा है,” तब उसने उनसे कहा, “जब तक मैं उसके हाथों में कीलों के छेद न देख लूँ, और कीलों के छेदों में अपनी उँगली न डाल लूँ, तब तक मैं विश्वास नहीं करूँगा।”

लूका 24:33 (HINIRV) »
वे उसी घड़ी उठकर यरूशलेम को लौट गए, और उन ग्यारहों और उनके साथियों को इकट्ठे पाया।

लूका 16:31 (HINIRV) »
उसने उससे कहा, ‘जब वे मूसा और भविष्यद्वक्ताओं की नहीं सुनते, तो यदि मरे हुओं में से कोई भी जी उठे तो भी उसकी नहीं मानेंगे’।”
समीक्षा — संक्षिप्त परिचय
मरकुस 16:13 में वर्णित घटना उस समय की है जब कुछ साक्षियों ने उद्धारकर्ता यीशु के पुनरुत्थान की सूचना दूसरों को दी, पर सुनने वालों ने उस खबर पर विश्वास नहीं किया। यह वाक्य छोटी लेकिन रोचक है क्योंकि यह पुनरुत्थान के प्रमाण और मानव प्रतिक्रिया के बीच की दूरी दिखाता है।
शास्त्रकीय संदर्भ में पद का स्थान
यह पद मरकुस के अंतिम प्रकरणों में आता है, जहाँ सुसमाचार की घोषणा और पुनरुत्थान से जुड़ी गवाहियों का क्रम है। लिखन का उद्देश्य पाठक को यह दिखाना है कि कई प्रकार के साक्ष्य मिलने के बाद भी उपलब्धियों एवं अनुभूतियों पर लोग अलग-अलग ढंग से प्रतिक्रिया करते हैं—कुछ मानते हैं, कुछ संदेह करते हैं, और कुछ नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
इस वचन का मुख्य पाठ है: सुसमाचार के प्रमाण देना आवश्यक है, पर सभी के हृदय स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होते। ईश्वरीय कामों का सत्य दिखाई दे सकता है पर लोग अपनी पूर्वधारणाओं, संदेह या निराशा के कारण ना मानते हैं। हमें इसकी समझ सिखाती है कि साक्ष्य प्रस्तुत करना हमारा दायित्व है; परिवर्तित करने का कार्य परमेश्वर का है।
संबंधित शास्त्रीय पदों की तुलना
व्यावहारिक अनुप्रयोग
इस पद से हम कुछ ठोस सीख सकते हैं:
समीकरणशील टिप्पणियाँ (सारांश संग एकजुट व्याख्या)
क्लासिक टिप्पणीकारों के विचारों से संकेत मिलता है कि इस प्रकार की अस्वीकृति साधारण मानव व्यवहार का हिस्सा है। मैथ्यू हेनरी इस विषय पर लिखते हैं कि बहुधा प्रमाण के बावजूद मानव हृदय कठोर रहता है; अल्बर्ट बार्न्स ने भी अलग संदर्भों में बताया है कि साक्ष्य प्रस्तुत करने का कार्य हमें करना चाहिए, न कि परिणाम का निर्धारण। आदम क्लार्क ने सामान्यतः घटनाओं के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर जोर दिया, जो समझाने में मदद करता है कि क्यों कुछ समूह समाचार को स्वीकार नहीं करते।
समाप्ति में, मरकुस 16:13 हमें सिखाता है कि सुसमाचार की घोषणा करने का कर्तव्य निभाया जाना चाहिए, पर स्वीकार्यता हमारे नियंत्रण से बाहर है। विश्वास एक व्यावहारिक और व्यक्तिगत प्रक्रिया है; इसलिए हमें सतत प्रेम, धैर्य और प्रार्थना के साथ साक्षी बने रहना चाहिए।