Old Testament
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मरकुस 16:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसने उनसे कहा, “चकित मत हो, तुम यीशु नासरी को, जो क्रूस पर चढ़ाया गया था, ढूँढ़ती हो। वह जी उठा है, यहाँ नहीं है; देखो, यही वह स्थान है, जहाँ उन्होंने उसे रखा था।
मरकुस 16:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मरकुस 16:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 1:17 (HINIRV) »
जब मैंने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा* और उसने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रखकर यह कहा, “मत डर; मैं प्रथम और अन्तिम हूँ, और जीवित भी मैं हूँ, (यशा. 44:6, दानि. 8:17)

यूहन्ना 19:19 (HINIRV) »
और पिलातुस ने एक दोष-पत्र लिखकर क्रूस पर लगा दिया और उसमें यह लिखा हुआ था, “यीशु नासरी यहूदियों का राजा।”

नीतिवचन 8:17 (HINIRV) »
जो मुझसे प्रेम रखते हैं, उनसे मैं भी प्रेम रखती हूँ, और जो मुझ को यत्न से तड़के उठकर खोजते हैं, वे मुझे पाते हैं।
मरकुस 16:6 का मौक़ा-आधारित व्याख्या
स्थिति का तात्पर्य: यह वाक्य मारकुस के सुसमर्त में उन घटनाओं के पहले के क्षण को दर्शाता है जब महिलाओं ने कब्र पर जा कर यीशु को जी उठते देखा। वे असमंजस और भय के बीच थे, किन्तु देवदूत का उद्घोष उन्हें चकित कर देता है: “वह यहाँ नहीं है; वह जी उठा है।” यह संकेत है कि ईश्वर का काम मृत्युलोक पर विजय पाकर नया जीवन प्रकट करने वाला है।
यह पाठ परमेश्वर के बारे में क्या उजागर करता है
- ईश्वर एक जीवित, क्रियाशील परम सत्ता है, जो मर कर नहीं थमता, बल्कि पुनर्जागरण के रूप में नया जीवन सौंपता है।
- विश्वास जिस भय के साथ खोजा गया था, वही विश्वास है जिसे आश्वासन में बदला गया—स्वर्गीय योजना का वास्तविक उद्घाटन बताता है कि Jesus की मृत्यु कानूनी दायित्वों के निर्वहन के साथ साथ मृत्यु पर परास्ति भी है।
प्रमुख शब्दों और चित्रों की व्याख्या
“चकित मत हो”— संदेश है कि पहले से निर्धारित योजना में है और ईश्वर के कार्य अनपेक्षित चमत्कार नहीं, बल्कि उद्धार की ठोस गति है।
“जी उठा है”— दलील देता है कि मूर्त मरन से ऊपर आना, और शैतान के कब्जे पर विजय—यीशु का पुनर्जीवन सभी विश्वासियों के लिए आशा है।
“यहाँ नहीं है; यही वह स्थान है, जहाँ उन्होंने उसे रखा था”— ग्रंथीय स्पर्श देता है कि क्रूस के बाद का स्थान नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविक उपस्थिति है। यह मानव-देखने की परिधि से परे एक दिव्य सत्ता को दर्शाता है।
संगत क्रॉस-रेफ़रेंसेस
1) लूका 24:5-6 — क्रूस के बाद कब्र पर विश्वास के क्षण: “कैसी चहल पहल, क्यों खोजते हो जीवित को मरे हुए के बीच?” यह पाठ संदेश की एक समान पुष्टि देता है कि उद्धार का निर्णायक चमत्कार मृत्यु के भीतर घटित होता है।
2) मत्त 28:6 — “वह यहाँ नहीं है, उसने जी उठकर कहा था...” यहांश पुनर्जीवन की पुष्टि करता है और विश्वासी जीवन के लिए नई आशा देता है।
3) 1 कुरिन्थियों 15:20-22 — मृत्यु पर विजय का सिद्धांत: यदि यीशु जी उठा, तो मरे हुओं की भी पुनर्जीवन की राह है।
आज के लिए अभ्यास और अनुप्रयोग
सूचना: मौलिक टिप्पणी-संयोजन
यह व्याख्या Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के सिद्ध विचारों के साथ एकीकृत होकर प्रस्तुत की गई है। निम्नलिखित छोटे उद्धरण इस सामग्री के भीतर संदर्भित हैं:
– “क्योंकि जीवित में ही उद्धार है” (उद्धरण रूप में क्लर्क/हेनरी से संक्षेप)—यह निष्कर्ष पाठ के सार को संजोता है कि पुनर्जीवन के बिना विश्वसनीय उद्धार संभव नहीं।
– “जी उठा है” कहने से उद्धार का संकट-पर मोड़ स्पष्ट होता है—वह ऐसी घटना है जो विश्वास को दृढ़ करती है।
प्रस्तुत विचार इन दार्शनिक-ग़ौर-विचारों के साथ मिलकर पाठ के मूल अर्थ को निकालते हैं ताकि आज के पाठक इसे अपने जीवन में लागू कर सकें.