Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 8:1 मत्ती 8:2 मत्ती 8:3 मत्ती 8:4 मत्ती 8:5 मत्ती 8:6 मत्ती 8:7 मत्ती 8:8 मत्ती 8:9 मत्ती 8:10 मत्ती 8:11 मत्ती 8:12 मत्ती 8:13 मत्ती 8:14 मत्ती 8:15 मत्ती 8:16 मत्ती 8:17 मत्ती 8:18 मत्ती 8:19 मत्ती 8:20 मत्ती 8:21 मत्ती 8:22 मत्ती 8:23 मत्ती 8:24 मत्ती 8:25 मत्ती 8:26 मत्ती 8:27 मत्ती 8:28 मत्ती 8:29 मत्ती 8:30 मत्ती 8:31 मत्ती 8:32 मत्ती 8:33 मत्ती 8:34



मत्ती 8:20 का संदर्भ और अर्थ
येसु कीHealings के साथ-साथ उनके संदेश का एक ठोस पक्ष यह है कि वे भौतिक जीवन के पीछे नहीं, बल्कि परमेश्वर के राज्य के लिए सबसे ऊँचे मूल्य पर भी दृष्टि रखते हैं। इस पद में ईसा कहते हैं कि भेड़ियों के बिल और आकाश के पक्षियों के बसेरे हैं, परन्तु मनुष्य के पुत्र के लिए सिर टिकाने की जगह नहीं है। यह कथन उनके सेवक-शिष्य के जीवन की कठिन આयामों को दर्शाता है: आज्ञाओं का पालन करते समय भी संसार की वास्तविकताओं से निरपेक्षता जरूरी है।
केंद्रीय अर्थ
यह वाक्य यीशु के पश्चात्य-जीवन के वास्तविक जोखिमों और त्याग की चेतावनी देता है। वे लोगों से आग्रह करते हैं कि वे उनके अनुष्ठानिक और भौतिक आराम के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर के Reino के लिए तैयार रहें। पृथ्वी के आराम और सुरक्षा सीमित हो सकती है, परन्तु ईश्वर की योजना में भरोसा जताने के लिए मनुष्य को किसी भी प्राकृतिक सुरक्षा में संतोष नहीं करना चाहिए—क्योंकि संसार की चीजें परिवर्तनशील हैं, पर ईश्वर का मित्र बनना शाश्वत है।
दो–तीन मुख्य थीम
संबद्ध संदर्भ (cross-references)
1) मत्वू 6:25-34 – प्रार्थना और दैनिक आवश्यकताओं पर विश्वास बनाये रखना; सांसारिक चिंताओं के बीच ईश्वर की दृष्टि। यह verses बताती हैं कि डरना नहीं चाहिए जब परमेश्वर आपकी जरूरतों को पूरा करेगा।
2) ल्याउस 9:57-62 – पवित्र बुलाहट और तात्कालिक अनुदान के बीच संतुलन; संसार के रिश्तों की प्राथमिकताएँ कब कब बदली जा सकती हैं।
3) मत्ती 6:19-21 – आकाश की चीजों पर ध्यान देना; जहाँ यदि दिल लगता है, वहीं आत्मा रहती है।
व्यावहारिक विवेक
हम क्यों इस वचन को पढ़ें? क्योंकि यह हमें याद दिलाता है कि जीवन में सुरक्षा के स्रोत केवल सांसारिक साधनों पर नहीं, बल्कि परमेश्वर पर निर्भर रहने में है। यदि हम अपने दैनिक जीवन के छोटे-छोटे चिंताओं से ऊपर उठकर ईश्वर के राज्य के लिए प्रयत्न करते हैं, तो वह हमारी कमियाँ पूरी करेगा और हमें स्थिरता देगा।
संक्षिप्त सार
यह वचन यह सिखाता है कि ईश्वर के राज्य के लिए स्थिरता और सुरक्षा केवल मर्यादित आरामों में नहीं मिलती, बल्कि परमेश्वर के साथ निर्भरता में मिलती है। भले ही जीवन के वास्तविक आराम सीमित हों, यीशु के अनुयायी के लिए भगवान का सेवक होना सर्वोच्च आश्रय है।
उद्धरणात्मक नोट
नोट: नीचे के प्लेटफॉर्म से उपलब्ध पुराने-काल के टीका-प्रकाशनों में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के विचार सतही रूप से मिलते हैं। यदि किसी जगह इन विद्वानों के सीधे शब्द उद्धृत किए गए हों, वे नीचे स्पष्ट रूप से चिन्हित होंगे।