Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 8:1 मत्ती 8:2 मत्ती 8:3 मत्ती 8:4 मत्ती 8:5 मत्ती 8:6 मत्ती 8:7 मत्ती 8:8 मत्ती 8:9 मत्ती 8:10 मत्ती 8:11 मत्ती 8:12 मत्ती 8:13 मत्ती 8:14 मत्ती 8:15 मत्ती 8:16 मत्ती 8:17 मत्ती 8:18 मत्ती 8:19 मत्ती 8:20 मत्ती 8:21 मत्ती 8:22 मत्ती 8:23 मत्ती 8:24 मत्ती 8:25 मत्ती 8:26 मत्ती 8:27 मत्ती 8:28 मत्ती 8:29 मत्ती 8:30 मत्ती 8:31 मत्ती 8:32 मत्ती 8:33 मत्ती 8:34



मत्ती 8:3 पर टिप्पणी
पद का संदर्भ एक रोगी-यात्री के साथ यीशु के मिलन को दर्शाता है, जिसने प्रभु की उपस्थिति में कर्तव्य-निर्देशक शक्ति का अनुभव किया। यीशु के पास एक निर्लज्ज रोगी के कारण बहुसंख्यक भीड़ थी, पर यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ और कहा—“मैं चाहता हूँ, तू शुद्ध हो जा”—फिर वह तुरन्त कोढ़ से शुद्ध हो गया। यह घटना उसके कीमती अधिकार और प्रेम-भरे व्यवहार का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यीशु रोगी की शुद्धता, पाप के भार और सामाजिक भेदभाव के बावजूद उसे पूर्ण स्वास्थ्य देना चाहते हैं।
केंद्रीय अर्थ
इस वचन में यीशु की दिव्य शक्ति और करुणा एक साथ प्रकट होती है। कढ़ी मरीज़ के लिए सामाजिक-अस्पृश्यता एक कड़ा अवरोध था; फिर भी यीशु ने उसे छूकर उसे शुद्ध कर दिया—यह बताता है कि यीशु धार्मिक व्यवस्था से ऊपर उठकर व्यक्ति के वास्तविक दशा पर दृष्टि रखते हैं। शुद्धि के शब्द उसी तत्काल प्रभाव को दर्शाते हैं जिसे विश्वास और परम प्रेम के साथ चुम्बित किया गया है।
मुख्य विषय
संबद्ध बाइबलीय संदर्भ
यहाँ के दो तीन क्रॉस-रेफरेंसेज़ नीचे दी गई व्याख्या के साथ जुड़ते हैं—
सूत्र-बंध: यदि पाठ के ठीक पाठ से उद्धरण नहीं मिला है, तो विषय-वस्तु में क्रॉस-रेफरेंसेस केवल सूची के रूप में हैं और पूर्ण पद नहीं होते।
व्यावहारिक अनुस्मारक
हम समाज में रहते हुए भी अगर किसी को बाहर-सा महसूस हो, तब भी यीशु के उदाहरण के अनुसार-करुणा और सम्मान के स्पर्श से चिकित्सा मिल सकती है। यह व्यक्तिगत आस्था के साथ-साथ समुदाय के लिए भी एक संदेश है—स्वास्थ्य के लिए दैवीय सहायता के लिए आस्था की आवश्यकता।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वचन विश्वास, स्पर्श और दिव्य शक्ति का संगम है—यीशु के साथ संपर्क में रोगी को शुद्ध किया गया, जो यह दर्शाता है कि प्रभु की शक्ति बंधनों को तोड़ती है और प्रेम उसे नई जीवन-प्रयोजन देता है।
संदर्भित व्याख्या से प्रेरणा लेते हुए, यह पाठ हमें यह सिखाता है कि शुद्धि-आदेश केवल शारीरिक रोग के लिए नहीं, बल्कि व्यक्ति की गरिमा और समुदाय में उसका स्थान पुनःस्थापित करने के लिए है, और यह प्रभु की करुणा की प्रत्यक्ष आह्वान है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि इस्तेमाल):
Adam Clarke, Albert Barnes और Matthew Henry के कुछ विचारों का सार यहां एकीकृत किया गया है, लेकिन इन commentators के पूर्ण वाक्यों को यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है। यदि आप चाहें, तो मैं विशिष्ट स्रोत-पंक्तियाँ भी संक्षेप में उद्धृत कर सकता हूँ।