Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 1:14 पर टिप्पणी (HINIRV)
पद नीतिवचन 1:14 में न केवल लोभ की बात है, बल्कि परिवार, मित्र और समुदाय के बीच साझा सुरक्षा और लक्ष्यों के बारे में चेतावनी भी है। इस वचन में युवक को उन साथी लोगों की आलोचना के साथ सचेत रहने की सलाह दी गई है जो बिना विचार के मिलकर धन या संसाधन बाँट लेने का निष्कर्ष निकालते हैं। यह मूल अर्थ में मनुष्य की बुद्धिमान दूरी और विचारशील सहभागिता की मांग है—जहाँ साथ मिलकर चलना अच्छा है, परंतु अनैतिक या जोखिम भरे मार्ग नहीं अपनाने चाहिए।
केंद्रीय अर्थ
यह वचन समुदायिक सहभागिता की प्रवृत्ति को दर्शाता है—“हमारा सहभागी हो जा” का आग्रह एक साथ मिलकर चलने की इच्छा को दर्शाता है। परंतु यह भी बताता है कि यह सहभागिता तब ठीक है जब वह ईमानदार, नैतिक और सुरक्षित आधार पर हो। यदि साझेदारी से अनैतिक लाभ या गलत दिशा बनती है, तो बुद्धिमान व्यक्ति उसे अस्वीकार करेगा।
मुख्य विषय
संदर्भ से जुड़ी पंक्तियाँ
- संसाधनों का साझा-दृष्टिकोण पहले पथ पर आ सकता है, परंतु विश्वासयोग्यता और नैतिकता के बिना यह जोखिम बन जाता है।
- समुदाय के साथ कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना होनी चाहिए, न कि छल-कपट और अवैध लाभ की समझ।
- एक सुरक्षित और प्रबुद्ध समूह बनाते समय धीमे-धीमे निर्णय लेने की आचारशास्त्रीय नीति का पालन करें।
अनुवादित उद्धरणों के लिए नोट
यह पंक्ति सीधे किसी अन्य संरचित उद्धरण के रूप में नहीं है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक सहभागिता के एक चेतावनी-आधार के रूप में प्रस्तुत है। नीचे दिये गए चर्चित टिप्पणीकारों के विचार आवश्यक संदर्भ स्वरूप हैं:
मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की सामान्य टिप्पणियाँ इन प्रकार के प्रचलित संकल्पों के लिए नैतिक दिशा-निर्देश प्रदान करती हैं; जहाँ उपलब्ध हो, उनके संक्षिप्त कथन नीचे उद्धृत हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक reflection
क्योंकि समूह में मिलकर चलना मनुष्य की प्राकृतिक प्रवृत्ति है, हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि साझेदारी का मकसद ईमानदारी, सुरक्षा और एक-दूसरे की भलाई होना चाहिए। संदिग्ध प्रस्तावों में शामिल होने से पहले तीन सवाल पूछें: क्या यह कदम नैतिक है? क्या इसका खर्च सही तरीके से साझा होगा? क्या यह दीर्घकालिक लाभ देगा या केवल तात्कालिक लाभ के लिए है?
संक्षिप्त समापन
इस वचन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि समुदाय में सहभागिता स्वीकार्य है परन्तु वह तब ही सही है जब वह नैतिक मानदंडों के भीतर रहेगी। सुरक्षित और सम्मानित मार्ग पर ही समूह की ताकत प्रकट होती है, अन्यथा विपरीत परिणाम आ सकते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके परिचय
1) नीतिवचन 11:15 — जोखिम भरे भागीदारी से बचना: संतुलित विवेक के साथ निर्णय लेना चाहिए।
2) नीतिवचन 20:19 — अविश्वास और घात-प्रतिघात से बचना चाहिये; गिरोह की छींटेदारी से दूरी बनाए रखना उचित है।
3) इब्रानियों 10:24-25 — समुदाय के बीच प्रेरणा और सावधानी को मिलाकर एक-दूसरे की देखभाल करना।
ध्यान दें: उपरोक्त क्रॉस-रेफरेंसेस केवल संकेत हैं; यदि आप प्रत्यक्ष पाठ उद्धरण चाहते हैं, कृपया संदर्भ पाठ का पूरा पाठ दें।
इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो केवल छोटे, मौलिक वाक्यों के रूप में उद्धृत किए जाएंगे और पूरी पात्रता के साथ संकेतित होंगे।