Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 1:13 — पासके हैं अमोल पदार्थ और घरों को लूट से भरना
इस अंश का तात्पर्य तृष्णा, धोखा और दुष्ट संगति से जुड़ा है। नीतिवचन के प्रथम अध्याय में पिता अपने पुत्र को यह चेतावनी देते हैं कि चातुर्यपूर्ण योजनाओं के फंदे कैसी असुरक्षित और विनाशकारी हो सकती हैं। वचन 13 में जो वाक्य मिलता है, वह उसी चेतावनी का एक उधाहरण है: चोरों-सी लालच से प्रेरित भागदौड़ के प्रभाव कितने विनाशकारी हो सकते हैं—हमको अनमोल पदार्थ मिलेंगे, पर यह लालच पहले स्वयं को और दूसरों को नुकसान पहुँचाती है।
ईश्वर और विश्वास से जुड़ी स्पष्टता
यह पाठ यह दिखाता है कि पापी बुद्धि कभी भी परमेश्वर के मार्ग से भटकना चाहती है, ताकि अस्थायी लाभ प्राप्त हो, परंतु यह लाभ आमतौर पर गरीबी, अपराध, और आत्म-संताप के साथ आता है। ईश्वर की दृष्टि में जीवन का सही मार्ग सत्य और ईमानदारी का है; दुष्ट रास्ते अंततः विफल होते हैं और परमेश्वर के सामने अपराध खुलता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और दृश्यों की स्पष्टता
पवित्र ग्रंथ से सम्बद्ध टिप्पणियाँ
इस प्रकार के शिक्षण में नीचे दिए गए अन्य संदर्भ सहायक हैं:
1) नीतिवचन 4:23 — दिल की देखभाल सबसे पहले, क्योंकि बाहर की चीजें अंदर की स्थिति से निकलती हैं।
2) नीतिवचन 21:6 — चोरी से धन कमाने का परिणाम धोखा और हानि है, अंततः आत्म-हानि देता है।
3) मत्ती 6:19-21 — आकाशमय स्थिर संपत्ति ही सच्ची संपत्ति है; पृथ्वी की संपत्ति क्षणभंगुर होती है।
यहाँ से क्या सीखें: आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
- किसी भी धन-संग्रह या सफलता की दिशा में लालच केSON के बजाये सत्य, ईमानदारी और समाज के लिये फायेदा देखें।
- सामाजिक दबाव और भागीदारी में गलत रास्ते लेने की बजाय परमेश्वर के नियमों के अनुसार निर्णय लें।
- मित्र और परिवारीजनों के साथ नेक और उत्तरदायित्वपूर्ण मार्ग चुनें ताकि लालच न आपके रिश्तों को खोखला करे।
संक्षिप्त समेकन
नीतिवचन 1:13 एक चेतावनी है: चतुराई और लालच जुनून मात्र से नहीं, बल्कि जीवन को खतरों में डाल सकती है। सही मार्ग वही है जहाँ ईमानदारी और परमेश्वर की इच्छा सबसे ऊपर हो, न कि सांसारिक लाभ की जल्दी।
टिप्पणीकारों के संकेतन
डेरेखित साहित्य में ओपनिंग चेतावनियाँ इस प्रकार मिलती हैं: मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संक्षिप्त उद्धरण नीचे दिए गए हैं (यदि तत्काल उपलब्ध हों):
• मैथ्यू हेनरी: “यद्यपि यह लग सकता है कि धन से सुख आता है, वास्तविक सुख और सुरक्षा नैतिकता और परमेश्वर के नीचे रहने में है।”
• एडम क्लार्क: “धन की प्यास मानव स्वभाव का एक प्रमुख दोष है, जो अंततः विध्वंस में ले जाता है।”
• एलबर्ट बार्न्स: “धन के लिए भ्रष्ट उपाय किए जाएँ, तो न केवल कानून टूटता है, बल्कि आत्मा की शांति भी लुप्त हो जाती है।”
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त विवरण)
- नीतिवचन 4:23 — दिल की देखभाल; सही निर्णय भीतर से समर्थ होते हैं।
- नीतिवचन 21:6 — चोरी से धन कमाने का परिणाम।
- मत्ती 6:19-21 — आकाश में संग्रहीत संपत्ति बेहतर; सांसारिक संपत्ति क्षणभंगुर है।