Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीति-वचन 1:18 (HINIRV):Immediate Setting
verse में कहानियों की वह धारा दिखाई देती है जहाँ साहसिक बुलाहट के बावजूद लोग असम्मानजनक मार्ग चुनते हैं। चालाकी से तिलवन्ता (घात) करना और प्राणों की हानि के लिए योजना बनाना—इनका लक्ष्य समाज को भ्रमित करना और जीवन के क्रम को विफल करना है। यहाँ पवित्र लेखक स्पष्ट करते हैं कि इन अपराधी योजनाओं के पीछे एक असंतुष्ट हृदय है जो सच के प्रकाश से दूर रहता है।
ईश्वर या विश्वास पर टेक: शब्दार्थ और छवि
यह इशारा करता है कि ग़लत मार्ग को अपनाने वाले लोग—यद्यपि वे डर या लालच से प्रेरित हों—आखिरकार अपने ही हाथों अपने उद्धार को भी नुकसान पहुँचाते हैं। हर योजनाबद्ध हिंसा या हत्या की चाह अपने आप में ईमानदार आस्था और सच के शासन के विरुद्ध है। यह दिखाता है कि परमेश्वर की पकड़ और नैतिकता के बिना जीवन chaos का शिकार बन सकता है।
महत्वपूर्ण शब्द/छवि
प्रत्यक्ष सम्बन्धी पवित्र पाठ
1) तीर 1:16-19 — दुष्टों के मार्ग का अंत और समझदारों के विधान। व्यावहारिक नीतियाँ और हिंसा से बचने की चेतावनी।
2) भजन 37:14-15 — अन्यायपूर्ण चालों का परिणाम उनके अपने शब्दहीन विनाश का कारण बनता है।
3) रोम 12:17-21 — बुरे का बदला न लेने की प्रेरणा और दुख से निवृत्ति की दैनिक मशहूरी।
प्रस्तुत-आधुनिक अनुप्रयोग
आज के समाज में जब संघर्ष और दबाव का दौर है, तो घात या धोखा देना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। हृदय की सत्यनिष्ठा, विश्वास की पवित्रता और परमेश्वर के नियमों के अनुरूप व्यवहार ही जीवन की सुरक्षा है। यदि हम भी किसी प्रकार की छल-कपट के साथ स्थिति हल करने का प्रयास करें, तो याद रखें कि यह मार्ग अंततः स्वयं को नुकसान पहुँचाता है—जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी असर डालता है।
सार
नीति-वचन 1:18 में लिखा गया है कि दुष्ट समूह जो हत्या और प्राणघात की घात में लगे रहते हैं, वे स्वयं ही अपने नाश के मार्ग पर होते हैं। इस चेतावनी के साथ एकात्मता यह है कि ईश्वर के प्रकाश और सत्य के अनुसार जीवन जीना ही सही और सुरक्षित मार्ग है, जबकि छल-कपट से पूर्ण रास्ते अंततः स्वयं की घात बन जाते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (पुस्तकाचार से)
यद्यपि यह पाठ किसी विशिष्ट मिश्रीत उद्धरण को नहीं देता, पर मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचार उस युक्ति-सूत्र को स्पष्ट करते हैं कि दुष्टता अपने ही कदमों पर गिरती है और ज्ञान-निर्मित मार्ग से भटकना विनाश की ओर ले जाता है। वे कहते हैं कि नीतियों में असत्य और हिंसा की कोई स्थायित्व नहीं होता; परमेश्वर की सच्ची वाणी ही जीवन को टिकाए रखती है।
Cross-references: 1) नीतिवचन 1:16–19 — उद्दीपन और परिणाम; 2) भजन 10:8–10 — अन्यायपूर्ण चालों की घृणा और परिणाम; 3) रोम 13:12–14 — अंधकार छोड़कर प्रकाश में चलना।