Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 1:21 का निष्कर्षण अर्थ
स्वरचित सार: बुद्धिमानी की पुकार घर-घर, बाजार-घाट, नगर के प्रवेशमार्ग—जहाँ भी लोग एक दूसरे से मिलते-भेटते होते हैं—वहां से उठती है, क्योंकि ज्ञान और चेतावनी प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करना चाहती है। यह आयत साक्षात् चेतावनी देती है कि ज्ञान केवल अध्ययन-कक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज-जीवन की हर गतिविधि में सक्रिय रूप से बुलावा देती है और असावधानी की खतरनाक चपेट से बचाती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन पाठक को एक सेतु दिखाता है: दीन-हीन, नव-नीतिमान, और बुजुर्ग—सब एक समान रूप से ज्ञान की महत्ता समझें। यहाँ “बाज़ार की भीड़” और “नगर के फाटकों के प्रवेश” वह सार्वजनिक मंच हैं जहाँ लोग निर्णय लेते हैं, गलत-ताकियाँ और बहकावों के बीच। दार्शनिक-सेतु यह है कि ज्ञान चलती-फिरती जिंदगी के साथ बाँधता है; ज्ञान जब प्रत्यक्ष संपर्क में आये, तब वह ढीली न रहे, बल्कि जागृत करे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
3 प्रमुख थीम (संक्षेप)
अनुसंधान-पंक्तियाँ (Cross-references) और उनका संक्षेप
नीतिवचन 1:23 के साथ: ज्ञान-आह्वान को समझने के लिए आत्म-उद्धार और सत्यान्वेषण की भूमिका।
नीतिवचन 2:3-6 के साथ: ज्ञान के लिए फर्श से उठकर प्रार्थना और परिश्रम की महत्ता; बोध तब आता है जब लोग प्रयास करते हैं।
यशाय 55:1 के साथ: ज्ञान और उद्धार की आकर्षक रेखा, जो सभी के लिए उपयुक्त है और वितरित है।
वास्तविक-उपयोगी निष्कर्ष/Takeaway
जब भी दैनिक जीवन में कठिन निर्णय सामने आएं, तब सार्वजनिक और व्यक्तिगत स्तर पर ज्ञान की आवाज को सुनें, उसे मानें और क्रियान्वित करें। यह आयत提醒 देती है कि ज्ञान न समय-सीमा से बंधा है, न किसी एक समूह तक सीमित, बल्कि मानव-जीवन के हर क्षेत्र में जागरूकता और मार्गदर्शन प्रदान करता है।
लेखकों के संदेशन (उद्धृत लाइनें)
कोई स्थूल उद्धरण सीधे नहीं दिया गया है, पर मार्थ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की पारंपरिक टिप्पणी-शैली से यह संकेत मिलता है कि ज्ञान की आह्वान सामाजिक मंचों पर जोर पकड़ती है और समझदारी से जवाब मांगती है।