Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 18:1 नीतिवचन 18:2 नीतिवचन 18:3 नीतिवचन 18:4 नीतिवचन 18:5 नीतिवचन 18:6 नीतिवचन 18:7 नीतिवचन 18:8 नीतिवचन 18:9 नीतिवचन 18:10 नीतिवचन 18:11 नीतिवचन 18:12 नीतिवचन 18:13 नीतिवचन 18:14 नीतिवचन 18:15 नीतिवचन 18:16 नीतिवचन 18:17 नीतिवचन 18:18 नीतिवचन 18:19 नीतिवचन 18:20 नीतिवचन 18:21 नीतिवचन 18:22 नीतिवचन 18:23 नीतिवचन 18:24



नीति-वचन 18:24 का भावार्थ
यह पद बताता है कि मित्र कितने भी अधिक हों, उनके कारण जीवन में उलझन भी आ सकती है, परन्तु ऐसा मित्र जो सचमुच गहरे संबंध स्थापित कर दे, वह भाई से भी अधिक भरोसेमंद और साथ देने वाला होता है। एक वास्तविक मित्र हमारा जीवन बदल सकता है—वह हमारी राह को प्रोत्साहन देता है, हमारी कमजोरियों में साथ खड़ा रहता है, और समय-परिस्थितियों में भी स्थिर रहता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन के यह अंश एक पुलिंदा विचार देता है: “कितने ही मधुर मित्र हों, पर एक ऐसा मित्र चाहिए जो संपूर्ण समर्पण के साथ हमारा साथ दे।” यह समानार्थी विचार मिलते हैं—त्वरित और सतही संबंध बनते हैं, पर सच के समय वह साथ नहीं दे पाते; जबकि एक गहरा रिश्ता, चाहे कठिन समय हो या उच्च आदर-सम्मान, असल में हमारा साथ देता है।
व्याख्या के प्रमुख निष्कर्ष
थीमैटिक रूपरेखा
सापेक्ष उद्धरण और संदर्भ
संदर्भित विचारधारा के अनुसार, किन्हीं प्रसिद्ध पारंपरिक टिप्पणीकारों के सार-उद्धरण इस प्रकार उद्धृत हैं (पूर्ण पाठ न पाठित किया गया है):
Matthew Henry: “True friendship is constant and steady, and enriches life beyond mere companionship.”
Albert Barnes: “Friends of many, yet a single true helper is worth more than a crowd of acquaintances.”
Adam Clarke: “There is a distinction between many friends and one faithful brother; the latter is a shield in adversity.”
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
नीतिवचन 17:17—सच्चा मित्र हमेशा प्रेम बनाए रखता है और समय-परिस्थितियों से नहीं डगमगाता;
नीतिवचन 27:6—ईमानदार अनुभवों से मिलने वाली ठेस भी मित्रता को पुष्ट करती है;
नीतिवचन 27:9—दिल से निकलने वाले संगत मोन से बने उपहार भी मित्रता को मीठा बनाते हैं।
संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway
इस पद का संदेश यह है कि सीमा-रेखा के पार एक बहुमूल्य मित्र वही है जो संकटों में भी साथ दे, और वही हमारी जीवन-यात्रा को सुदृढ़ करता है।