Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 18:5 का संपादन-परिप्रेक्ष्य (HINIRV)
पद: दुष्ट का पक्ष करना, और धर्मी का हक़ मारना, अच्छा नहीं है।
संकेत और उससे उद्घाटित आस्था का पाठ
यह नीतिवचन व्यावहारिक नैतिकता का अध्याय है जो समुदाय में निष्पक्षता, सत्य और न्याय के महत्व को स्थापित करता है। यहाँ ताक़त या पद-के-लाभ के आधार पर दुष्ट के पक्ष में जाना, या धर्मी की हक़ाई को दबाना—इन दोनों स्थितियों को स्पष्ट रूप से निष्कासन योग्य कहा गया है। ईश्वर की दृष्टि में सत्य और न्याय ही समाज की स्थिरता का आधार हैं; इसलिए असमानता या पक्षपात एक भयावह समाजिक बुराई है।
ईश्वर और विश्वास के साथ जुड़ाव
यह पद ईश्वर की निष्पक्षता की मांग को स्पष्ट करता है: परमेश्वर न्यायप्रिय हैं और हर कर्म का सही निर्णायक मूल्यांकन करते हैं। यदि कोई व्यक्ति दुष्ट के पक्ष में ठोस तर्क देकर न्याय से विमुख होता है, वह स्वयं निष्कपट होकर निष्कर्षित होता है कि मानव-न्याय भी निर्बल हो सकता है, परन्तु परमेश्वर की न्यायिक दृष्टि सर्वथा अचल है। विश्वासियों के लिए यह स्मरण है कि न्याय करना केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि दिल की स्थिति का परिचय है।
महत्वपूर्ण शब्दावलियाँ
दुष्ट का पक्ष करना: यदि किसी के समर्थन में अन्याय किया जाए या असत्य को सही ठहराया जाए, वह लोग अपने विवेकीय दायित्व से विचलित होते हैं।
धर्मी का हक़ मारना: एक निर्दोष या निष्पक्ष व्यक्ति के अधिकारों को दबाने या उसकी संपत्ति, प्रतिष्ठा, या अवसरों पर अन्याय करना।
संबद्ध आयतन और पंक्ति
नीतिवचन में ऐसे कर्मों के विरुद्ध चेतावनियाँ बार-बार आती हैं कि समाज में न्याय का ढाँचा ढीला पड़ सकता है यदि पक्षपात सामान्य हो जाए। यह verses सामाजिक नैतिकता के लिए एक स्पष्ट मानक प्रस्तुत करता है—हर किसी को निष्पक्ष न्याय मिलना चाहिए, अन्यथा समाज त्रस्त होता है।
अन्य प्रमाण-पंक्तियाँ
1) अन्यत्र आयतों में निष्पक्ष न्याय, पक्षपाती निर्णय के परिणाम, और कृपालु नैतिकता पर बल दिया गया है—यहाँ भी सामाजिक व्यवहार में निष्पक्षता को सर्वोच्च माना गया है।
2) न्याय के महत्त्व की चर्चा, और अधिकारों के संरक्षित रहने से समाज की सुरक्षा की पुष्टि मिलती है।
3) धार्मिक नेतृत्व में भी निष्पक्ष व्यवहार आवश्यक है, ताकि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिलें।
पद और धर्मी-दृष्टि के लिए क्रॉस-रेफरेंसे
आज के संदर्भ में व्यवहार
इस पाठ का संक्षिप्त सार यह है कि दुष्ट के पक्ष लेने या धर्मी के हक़ को दबाने से सामाजिक जीवन असन्तुलित होता है; यह ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध है। सत्य और न्याय के मूल्यों पर टिके रहना ही विश्वासियों के जीवन का परिचय है।
संदर्भ-नोट: नीचे दिए गए नज़दीकी क्रॉस-रेफरेंसेज इस धारणा को मजबूत करते हैं कि निष्पक्षता और बराबरी हर हाल में जरूरी है।