नीतिवचन 18:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जहाँ दुष्टता आती, वहाँ अपमान भी आता है; और निरादर के साथ निन्दा आती है।

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नीतिवचन 18:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 18:3 का अर्थ और संदर्भ

इस पद के अनुसार दुष्टता के साथ सामाजिक अपमान और निन्दा अवश्य आते हैं; इस प्रकार मनुष्य के आचरण से जुड़ी बेहूदी, ग़लत और बदनाम परिस्थितियाँ उभरकर सामने आती हैं। जब सत्य और ईमानदारी से पीछे हटकर दुष्कर्म होता है, तो समाज में भी अवमानना और गरिमा की हानि होती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

नीतिवचन में बुद्धिमान जीवन के नियम छोटे-छोटे वाक्यों के रूप में दिए गए हैं, जो जीवन के व्यवहारिक दायरे पर केंद्रित हैं। यह शास्त्र कहता है कि अच्छाई और बुराई दोनों के सामाजिक परिणाम होते हैं; अन्याय के परिचय से न केवल व्यक्ति बल्कि भरोसे और प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है। इस संदर्भ में दुष्टता के साथ जुड़ा निष्कासन या अपमान भी उसी क्रम का भाग है।

व्याख्यात्मक धारणाएँ

- निष्कपट आचरण के विपरीत दुष्कर्म सामाजिक आलोचना और अपमान को जन्म देता है।

- व्यक्तिगत दमन या घृणा से प्रेरित क्रियाएँ अंततः व्यक्ति और समुदाय दोनों को नुकसान पहुँचाती हैं।

- सत्य की राह पर चलना ही जीवन के सामाजिक सम्मान को बनाए रखता है; कुटिलता से बने रिश्ते क्षणभर के लाभ दे सकते हैं, पर अंततः हानि ही लाते हैं।

3 प्रमुख निष्कर्ष (संक्षेप)

  • नैतिक घटाव का परिणाम: दुष्कर्म से न सिर्फ अपराधी, बल्कि उसका समूह भी ठेस पहुंचता है।
  • आत्मिक स्वच्छता बनाये रखने से सामाजिक सम्मान बना रहता है।
  • निन्दा और अपमान के चक्र को रोकना चाहिये; תיק़ना से बचना चाहिए।

Cross-references (संबद्ध पद)

- नीतिबचन 10:9: सत्य और स्थिरता का निर्माण; छल से बचना चाहिए। व्याख्या: सत्यापन्न जीवन में भरोसा बढ़ता है, जबकि फरेब से दिखावा घटता है।

— अधिनिष्ठ 26:28: झूठे शब्दों से दूसरों के प्रति घृणा और अपमान बढ़ता है। व्याख्या: भाषिक हिंसा से संबंधों में अवरोध और अवमानना बढ़ती है।

— दानियों 5:3: निष्कपटता और सच बोलना सामाजिक आस्थाओं को बल देता है। व्याख्या: ईमानदारी से बचना पारिवारिक-समाजिक विश्वास को मजबूत करता है।

पूर्वकथन और उद्धरण

यह शास्त्रMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रकाशनों में इस प्रकार संक्षेपित है: दुष्कर्म के साथ निन्दा और अपमान एक सामान्य परिणाम होते हैं, जो समाज के मनोविज्ञान और नैतिकता पर प्रभाव डालते हैं।

व्यावहारिक takeaway

जो व्यक्ति दुष्कर्म से बचना चाहता है, उसे अपने शब्दों और कार्यों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। ईमानदारी, सम्मान और संयम से न केवल अपनी प्रतिष्ठा सुरक्षित रहती है, बल्कि समुदाय में भी सुरक्षित और भरोसेमंद संबंध बनते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 18:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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