Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 20:29 का अर्थ
युवाओं की महिमा उनकी शक्ति है, पर वृद्धों की शोभा उनके स्थिर अनुभव और पूर्णता के बालों में निहित होती है। सरल भाषा में कहा गया है कि युवाओं का vigor आकर्षक है, जबकि उम्र के साथ जो आत्म-विश्वास और विवेक आता है, वही वृद्धों की शोभा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वचन नीति-शास्त्र के एक समूह का भाग है जो शिशु-निष्ठा, चरित्र निर्माण और समाज-व्यवस्था को प्रोत्साहित करता है। नीतिवचन में विभिन्न उम्र-वर्गों के गुणों की सराहना है—युवा उर्जा बनाम वृद्ध अनुभव। यह एक संतुलित सोच प्रस्तुत करता है जिसमें हर अवस्था के अपने लाभ हैं।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
2–3 प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेन्स
- संदर्भ 1: युवा बनाम पुराने के गुण, जहां बुद्धिमानी से दोनों पक्षों का सम्मान किया गया है। - संदर्भ 2: अनुभव और धीरज से कर्तव्य-पालन की परिपक्वता पर प्रकाश।
नोट: क्रॉस-रेफरेन्स में आधिकारिक पाठ के पूर्ण उद्धरण न दें; केवल संकेत दें और समझ ब clarifies करें।
सूक्ष्म विषय-वस्तु
संक्षिप्त निष्कर्ष
जीवन के हर मोड़ पर अपनी-अपनी भूमिका को मानना और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना ही वास्तविक कुटुम्ब-परिवार और समाज-नियमन की कुंजी है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (आकस्मिक सुझाव—सिर्फ उपलब्ध होने पर)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे पारंपरिक टिप्पणीकारों के सीधे शब्द यदि उपलब्ध हों तो यहाँ उद्धृत किए जा सकते हैं; परन्तु मौलिक सार वही रहता है: हर उम्र में अपने गुण प्रकट होते हैं और समाज को उनका सम्मान करना चाहिए।
संयुक्त समरी
यह छायाचित्र दिखाता है कि युवाओं की शक्ति और वृद्धों की शोभा—दोनों समाज की संरचना में आवश्यक हैं। हर उम्र में जो गुण विकसित होते हैं, वे एक सुसंगत नैतिकता और कर्तव्यबोध में सहायक बनते हैं।