Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 20:26 का अर्थ
संक्षेप में: बुद्धिमान राजा दुष्टों को सुरक्षित नहीं रहने देते; वे उनकी चाल-चलन को पहचान कर उनका दाँव पलट देते हैं और विवेकपूर्वक दुष्टों को हार में डालते हैं।
पृष्ठभूमि और सन्दर्भ
नीतिवचन ऐसे शिक्षाओं का संकलन है जो राजा और समाज के लिए मार्गदर्शन देते हैं। यहाँ कहा गया है कि राज्य के नेता और न्याय-व्यवस्था के अधिकारी दुष्टों के जाल और छल-फरेब को पहचान लेते हैं और उन पर उचित नियंत्रण लगाते हैं। यह विचार सुझाव देता है कि बुद्धिमान शासक केवल नैतिक सिद्धांतों के अनुसार नहीं चले, बल्कि चालाकी और समझ से भी कानून-व्यवस्था स्थापित रखते हैं।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
बौद्धिक विचारे और सुविचार
इस पद में नीति और न्याय का संतुलन दिखता है। सही निर्णय के लिए न केवल नैतिकता चाहिए बल्कि परिस्थिति-चेतना और कठोर निर्णय लेने की क्षमता भी आवश्यक है। यह बतलाता है कि शासन की चतुराई और प्रबल नैतिकता मिलकर दुष्टों के इरादों को कुंद करती है।
लघु विषय-वस्तु
अन्य पवित्र शास्त्र से संबंधित संदर्भ
1) सकारात्मक निर्णय और चतुराई: अन्य नीतिवचन यह सुझाव देते हैं कि बुद्धि और निर्णय-शक्ति से विपरीत परिस्थितियों पर विजय पाई जा सकती है।
2) न्याय-व्यवस्था की भूमिका: शासक का कर्तव्य है कि वह दुष्टों की चालों को रोककर समाज की सुरक्षा करे।
3) नैतिकता और शासन: नीति-संरचना में नैतिक मूल्यों का आधार सदैव प्रमुख रहता है, ताकि दुष्टता बढ़े नहीं।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जो भी राज-केंद्रित निर्णय ले, उसे स्पष्टता, विवेक और धैर्य के साथ करना चाहिए। दुष्टों की चालाकी को पहचानना ही शासन की सुरक्षा का पहला कदम है, और हार-जीत के खेल में नैतिकता कभी पीछे न रहे।
पाठ-सार
यह वाक्य एक सुदृढ़ नेताओं की पहचान और निर्णय-क्षमता का आह्वान है: कमजोरी पर नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता और न्याय के सम्मिलन से दुष्ट योजनाओं को परास्त करना।
शाब्दिक उद्धरण-विशेष
यदि आवश्यक हो तो नीचे दिए गए प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के विचार से मार्ग लिया गया है: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke। उनके भीतर से सीधे उद्धरण की पुष्टि उपलब्ध हो तो श्रद्धेपूर्वक प्रस्तुत किया गया है।
Cross-references (संकेत-शीर्षक):