Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 20:17 का अर्थ
इस पद में दर्शाया गया सच यह है कि छल-कपट से प्राप्त रोटी मीठी प्रतीत होती है, पर उसका परिणाम दुखद और क्षति पहुँचाने वाला होता है। क्षणिक लाभ भले ही चुभती न लगे, पर बाद में भौतिक और नैतिक दोनों प्रकार के दाग उभरते हैं, और व्यक्ति का मुँह “कंकड़ों से भर जाता है”—यानी सत्य के स्थान पर धोखा लेने से आन्तरिक वैभव और शांतिपूर्ण जीवन छिन जाते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन के इस दाक्षयक महत्त्वपूर्ण सिद्धांत में दैनंदिन जीवन के नैतिक निर्णयों की चर्चा है। प्राचीन दुनिया में भी आर्थिक और सामाजिक दबावों के कारण छल-प्रपंच के उपाय देखे जाते थे, परन्तु यह कहावती चेतावनी स्पष्ट करती है कि बिताने पर झूठ के साथ दी गई “मीठी” चीज़ अंततः डर, अपराध-भाव, और अंतरात्मा की आड़-घेर बनाती है। भगवान का आदर्श जीवन सत्य, ईमानदारी और न्याय पर टिके रहने को प्रेरित करता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
2–3 क्रियात्मक बिंदु
अन्य उद्धरणीय टीका (संकेतित): संतMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke
“छल-कपट” के विचार पर इनके विचार एकमत नहीं होते, पर वे सभी यह रेखांकित करते हैं कि वास्तविक मीठास तब तक नहीं मिलती जब तक सत्यप्रियता और ईमानदारी नहीं बढ़ती।
Matthew Henry: “The sweetness of sin is but a deceitful sweetness; though pleasant at the first, it ends in sorrow.”
Albert Barnes: “What is gained by deceit is not true gain; it is a cover for moral ruin.”
Adam Clarke: “Dishonesty may heap outward abundance for a season, but the conscience and God’s judgment soon assert themselves.”
पठनीय cross-references और उनका छोटा अर्थ
- उदाहरण के तौर पर: Proverbs 11:1 (धोखे से हलाल नहीं होता); 2 Corinthians 8:21 (ईमानदार प्रयत्नों के लिए स्पष्ट व्यवहार आवश्यक); Psalm 34:14 (बुराई से दूर रहें, सत्य बनें)।
संक्षेपित निष्कर्ष
छल-कपट से मिलने वाला सांसारिक लाभ अस्थायी है और अंततः आंतरिक शान्ति, नैतिक बल और समाजिक भरोसे को खतरे में डालता है। ईमानदारी, सत्य और न्याय के मार्ग पर स्थिर रहने से जीवन में वास्तविक मीठास और सुरक्षा मिलती है।