Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 20:1 नीतिवचन 20:2 नीतिवचन 20:3 नीतिवचन 20:4 नीतिवचन 20:5 नीतिवचन 20:6 नीतिवचन 20:7 नीतिवचन 20:8 नीतिवचन 20:9 नीतिवचन 20:10 नीतिवचन 20:11 नीतिवचन 20:12 नीतिवचन 20:13 नीतिवचन 20:14 नीतिवचन 20:15 नीतिवचन 20:16 नीतिवचन 20:17 नीतिवचन 20:18 नीतिवचन 20:19 नीतिवचन 20:20 नीतिवचन 20:21 नीतिवचन 20:22 नीतिवचन 20:23 नीतिवचन 20:24 नीतिवचन 20:25 नीतिवचन 20:26 नीतिवचन 20:27 नीतिवचन 20:28 नीतिवचन 20:29 नीतिवचन 20:30



नीति-वचन 20:20 का व्याख्या: माता-पिता को कोसना तो अंधकार और विनाश
मुख्य interpretive point: जो अपने माता-पिता को दोहता है, उसका दिया बुझ जाएगा और वह घोर अंधकार में चले जाएगा—यह तेजस्वी नीतिगत निष्कर्ष है जो परिवार की मान्यता और सुध-स्वभाव की महत्ता दिखाता है। यह दंड नहीं केवल सूक्ति-योग है, वरन् यह सामाजिक और आध्यात्मिक बंधनों से जुड़ा चेतावनी-नोट है कि माता-पिता के प्रति सम्मान और पालन दोनों ईश्वर की प्रथमिक व्यवस्था के अनुरूप हैं।
पाठ-संदर्भ का साहित्यिक संदर्भ
यह श्लोक नीतिपुस्तक के स्थिर नैतिक-वचन का भाग है जो परिवार-व्यवस्था की संरचना को रेखांकित करता है. मर्यादा और उत्तरदायित्व, विशेषकर माता-पिता के प्रति सम्मान, समाज में स्थिरता बनाये रखने के लिए ज़रूरी मानी जाती है। यह एक कड़ी चेतावनी है कि यदि व्यक्ति अपने आरम्भिक आधार—पिता और माता—के प्रति भेदभाव या तिरस्कार दिखाता है, तो उसका जीवन मार्ग अंधकार और हानि से भर जाएगा।
आध्यात्मिक अर्थ और महत्व
परिवार के भीतर सम्मान और प्रेम, ईश्वर के शासन की एक उत्पत्ति-सम्भावना है। माता-पिता की दी हुई नींव पर खड़ा व्यक्ति समाज में स्थिर रहता है और आत्मिक निर्देशों को ग्रहण करता है। यह पाठ यह भी संकेत देता है कि परमेश्वर के पास वास्तविक ज्ञान और मार्गदर्शन पाने के लिए पहले पृथ्वीय व्यवस्था का सम्मान करना आवश्यक है; जो लोग इसे नकारते हैं, वे अपनी जीवन-दीया को बुझा लेते हैं और अंधकार में चलते हैं।
पवित्र लेखन के साथ सम्बद्ध विचार (Cross-references)
नोट: नीचे दिए गए verses के कंठस्थ उद्धरण पूरे वाक्यों के बजाय-छोटे अंशों के रूप में हैं और संदर्भ-संदेह करते हैं:
सोच-विचार के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
नीतिवचन 20:20 का यह सूत्र माता-पिता के सम्मान और उत्तरदायित्व की महत्ता को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे हम उनकी सलाह और देखरेख को मानते हैं, हमारे जीवन की दिशा साफ होती है और ईश्वर के प्रकाश में रहने-फिरने की क्षमताएँ बढ़ती हैं। यदि यह सम्मान खो जाए तो जीवन-दीया बुझ सकती है और अंधकार घिर सकता है। यह शास्त्री-उक्त एक सामान्य नैतिक चेतावनी है, जिसे हर पीढ़ी को आत्मसात करना चाहिए ताकि परिवार और समाज दोनों क्रमशः स्थिर रहें।