Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31



नीतिवचन 5:3 पर समीक्षात्मक दृष्टिकोण
यह पद हमारे चरित्र-निर्माण के मार्ग में एक गहरी चेतावनी देता है। नीति के तत्व यह दिखाते हैं कि स्वादिष्ट बोलचाल और आकर्षक दिखावट भीतर के जोखिम को ढंक नहीं सकती। पराई स्त्री के होंठों से मधु टपकना जैसे चित्रण से यह स्पष्ट है कि मोहक शब्द और चंचल वचनों के पीछे असली उद्देश्य और परिणाम अलग हो सकते हैं।
पल्ले में अध्याय के संदर्भ के साथ विचार
नीतिवचन पुस्तक में अध्याय 5 विवाहित जीवन और नैतिक सीमा-रेखा पर केंद्रित है। इस पद में शिशु-निष्ठा और नैतिक जागरूकता के साथ साथ पत्नी-स्वामित्व का महत्त्व नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष-लाभ से परे एक आत्म-संयम की माँग है। पराई स्त्री की भाषा और उसका मीठा प्रभाव किसी क्षणिक आनंद के लिए दीर्घकालिक हानि का द्वार बन सकता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
संदेश का मुख्य बिंदु यह है: आकर्षक आवरण के पीछे अक्सर जोखिम छिपा होता है। बोलचाल की मधुरता भटकाव की दीवार बना सकती है अगर वह पारिवारिक या धार्मिक नैतिकताओं को चुनौती दे। आत्म-नियमन और ईश्वर के प्रति fidélitas (वफादारी) बनाए रखना ही सही पथ है।
अन्य बाइबलीय संदर्भ के साथ तुलनात्मक विचार
- परमेश्वर के वचन में भाषण की शक्ति और उसकी दिशा पर बल दिया गया है। किसी भी प्रकार की दुष्ट-लाभ के प्रस्ताव पर विचार करते समय विवेक का साथ आवश्यक है।
- मित्रता व विवाह-निष्ठा के संदर्भों में दृढ़ प्रतिबद्धता और स्पष्ट सीमाएँ महत्त्वपूर्ण हैं ताकि मनुष्य सामाजिक और नैतिक दायित्वों से विमुख न हो।
- भविष्य को देखते हुए, प्रेम और विश्वासघात के बीच चयन की स्थिति में नैतिकता की दिशा स्पष्ट होनी चाहिए।
विवेकपूर्ण अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस ज़रूरी संकेत
1) नीतियों में समझौते से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करने वाला स्पष्ट नियम। यह संदर्भ हमें यह दिखाता है कि आलिंगन और पथभ्रष्ट करने वाले शब्दों के विरुद्ध सावधानी आवश्यक है।
2) विवाह-निष्ठा और पवित्र प्रेम के सिद्धांतों की पुनरुद्घारणा। यह पाठक को यह स्मरण दिलाता है कि प्रेम में ईमानदारी और चरित्र-बल सर्वोपरि है।
3) अहंकार और मोह के सामने वफादारी की नैतिक परीक्षा; यह बताता है कि आकर्षण चाहे कितना भी मीठा क्यों न हो, स्थायित्व और परमेश्वर के मार्ग के विरुद्ध न जाए।
संक्षेप
नीतिवचन 5:3 एक चेतावनी-पत्र है जो बताता है कि मीठे वचनों और चिकनी बातों के पीछे अक्सर नुकसान छुपा होता है। जीवन में सच्ची रक्षा वही है जब हम ईश्वर की नींव पर टिके रहते हैं, पारिवारिक प्रतिबद्धताओं को मानते हैं, और अपनी बोल-चाल को विवेकपूर्वक चलाते हैं।
उद्धृत पाठक-नोट्स
यह स्थान पर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से सीधे उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि उपलब्ध हों तो छोटे-छोटे उद्धरण उनकी पंक्तियों से स्वतंत्र रूप से डालेंगे।