भजन संहिता 25:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे यहोवा, अपनी दया और करुणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं।

भजन संहिता 25:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 25:6 - सहज अर्थ

यह पद यहोवा से विनती है कि वह अपनी दया और करुणा के कार्य जो अनंतकाल से चलते आए हैं, उन्हें स्मरण रखें। सरल शब्दों में: गरीब और दोष-शंकित आत्मा यह दया-व्रत माँगता है जो समय के साथ स्थिर और अटल है। ईश्वर का केंचुल-सा चरित्र, जो पितृवत कृपा और भरोसे के साथ बना रहता है, भक्त के यहाँ नवीन आशा डालता है।

Contextual background

भजन 25 एक नम्र, आर्त और विश्वासपूर्ण प्रार्थना है जिसमें दाऊद या भक्त मुख्य रूप से पवित्र ईश्चर्या के विरुद्ध अपने मन की स्थितियाँ व्यक्त करता है—अपराध-भर से मुक्त होकर उद्धारकर्ता की ओर ध्यान। यह पद विशेष रूप से यहोवा की दया (हृदय से आना वाला प्रेम) और करुणा (दया के व्यवहार) के स्थायित्व पर केंद्रित है, जिसका आधार ईश्वर के अनंतकाल से चला आ रहा चक्र है।

Interpretive observations

  • दया और करुणा को स्मरण करना—यह एक मानसिक क्रिया नहीं, बल्कि चरित्र-निष्ठ जीवन के लिए प्रेरणा है। भक्त को याद दिलाया जा रहा है कि परमेश्वर की दयालु प्रकृति समय की दीवारों से अपरिचित है; यह निरंतर-सही और स्थायी है।
  • अनंतकाल से चालू—यह शब्द ईश्वर की निरंतरता और विश्वसनीयता को रेखांकित करता है। भरोसेमंद है कि परमेश्वर पिछले इतिहास में भी वही रहते हैं और भविष्य में भी वही रहेंगे।
  • प्रार्थना की धारा—भक्त अपनी स्थिति से बाहर आकर ईश्वर के गुणों पर टिका रहता है, जो संकट और आत्म-संदेह के समय में भी उद्धारकारी आशा देता है।

Short thematic list

  1. ईश्वरीय दया का स्थायित्व
  2. करुणा का व्यापक प्रसार
  3. भक्ति में स्मरण और विश्वास

Related passages (संक्षिप्त व्याख्या)

1) एंट्री-उद्धृत संदर्भों के साथ: यह similar in idea कि दया और करुणा समय-आधार से मुक्त हैं, और भक्त को स्मरण कर भक्तत्व बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं।

2) अन्य Psalms में भी दया के स्मरण की आवश्यकता साफ बताई जाती है; यह प्रार्थना को दृढ़ बनाती है कि ईश्वर के गुण स्थिर और भरोसेमंद हैं—उद्धार के लिए मूल आधार।

3) एक प्रेरक ट्रैक: जब भक्त अपने संकट में ईश्वर के चिरस्थायी प्रेम को याद करता है, तो डर घटता है और विश्वास जड़ पकड़ता है; यह भक्ति जीवन के निरंतर मार्गदर्शन का हिस्सा बन जाता है।

Historical commentary insights (संक्षिप्त समालोचनात्मक संदर्भ)

मैकथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बॉर्न्स और एडम क्लार्क के पारंपरिक टिप्पणियों में यह पाया गया है कि दया और करुणा के गुण ईश्वर के चरित्रीक स्वर का अभिन्न हिस्सा हैं। यह संदर्भ भक्त को यह याद दिलाते हैं कि परमेश्वर का प्रेम दुर्बलताओं में भी मर्म स्पर्श करता है और समय-सीमा से परे स्थिर रहता है। (नोट: यदि उपलब्ध हो, नीचे के छोटे उद्धरणों में संक्षेप रूप से मिलते हैं।)

Cross-references (3 निष्क्षेप-संश्लेषण)

1) भजन 103:8-11 — यह दिखाता है कि यहोवा कितनी दयालु और करुण है; उसकी दया बहुधा उसी के ऐतिहासिक उपकारों में प्रकट होती है।

2) भजन 40:11 — क्योंकि तूने मुझे अपनी दया से कवर किया है; प्रतीक के रूप में यह स्मरण भक्त के विश्वास को पुनर्जीवित करता है।

3) रोमियों 11:29 — परमेश्वर के आशीर्वाद और बुलाहट कभी पलटते नहीं; यहां भी दया जिसमें अब भी जारी है, पर बल देता है।

Practical takeaway

हर दिन के जीवन में यह स्मरण रखें: परमेश्वर की दया और करुणा नए नहीं, बल्कि अद्यतन नहीं—वे अनंतकाल से चलती आ रही हैं। संकट-समय में भी इसी स्मरण से भय दूर होता है और आत्मा को स्थिरता मिलती है। अपने अतीत के अनुभवों को याद रखें जब उसने बांधे रखा, तो भविष्य के लिए भी उसी प्रेम पर भरोसा रखें।

आखिरकार, यह पद हमें ईश्वर की निरंतरता की याद दिलाता है—हाले-परमेश्वर के दया-भाव सभी सामाजिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों से ऊपर है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 25:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और उसकी दया उन पर, जो उससे डरते हैं, पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है। (भज. 103:17)

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