भजन संहिता 33:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह धर्म और न्याय से प्रीति रखता है; यहोवा की करुणा से पृथ्वी भरपूर है।

भजन संहिता 33:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 33:5 – संदर्भ और अर्थ

इस पद में यहोवा की गुणों की उठान है: वह धर्म और न्याय से प्रेम करता है; और उसकी करुणा से पृथ्वी भरी है। इसे भजनकर्ता ने cosmic स्तर पर भगवान के चरित्र के साथ जोड़ा है—धारणीय तौर पर वह संसार के सभी प्राणी-जन के लिए न्यायप्रिय और दयालु हैं। यह सूर्यमई सत्ता नहीं, बल्कि नैतिकता और सम्मोहक करुणा का सम्मिलन है। भजन संहिता की पंक्तियाँ, बिंदुवार संसार की स्थिरता और ईश्वर के चाल-चलन के बारे में गहरी पुष्टि देती हैं: ईश्वर न्याय और धर्म के साथ होता है, और उसकी करुणा सभी भू-जन के लिए अनुभूति बनती है।

मुख्य अर्थ

धर्म और न्याय—यह दोनों ईश्वर के चरित्र के स्तंभ हैं। उसकी करुणा पृथ्वी के दैनिक जीवन में दिखाई देती है—सीधे समाज की संरचना से लेकर प्राकृतिक चक्रों तक। यह verse विश्वासियों को आश्वस्त करता है कि ईश्वर निष्कपट नहीं—वह दया से काम लेते हैं और यह विश्वास पूर्णत: भरोसे के योग्य है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • योग्यता बनाम दयालुता: ईश्वर की सही, निष्पक्ष सत्ता, पर वह करुणामय भी हैं।
  • सामंजस्यपूर्ण सच्चाई: धर्म और न्याय की देवीय प्रकृति—अनियमितताओं के बीच भी ईश्वर की सत्यता बनी रहती है।
  • प्रकृति के प्रति करुणा: पृथ्वी के जीवन में उसका प्रभाव—बीज से लेकर ऋतु तक, हर जगह उसकी करुणा अनुभव होती है।

अन्य விச्वार्थ पाठ (cross-references)

-जैसा कि अन्य पवित्र पाठ बताते हैं, परमेश्वर की न्याय-करुणा एक साथ क्यों महत्वपूर्ण है: एक स्त्रोत से जीवन को बनाए रखना, और दूसरों के प्रति दयालुतापूर्ण व्यवहार को प्रेरित करना।

उद्धृत संदर्भ 1: धर्म और न्याय के संयोजन के बारे में प्रेरणा देता है कि ईश्वर की कृपा कैसे दृष्टिगोचर होती है (उदा. अन्य भजन)।

उद्धृत संदर्भ 2: करुणा की भूमिका—प्रकृति और मानव जीवन के बीच संवाद।

व्यावहारिक विचार

हम अपने जीवन में ईश्वर की अदालत और दया को कैसे संतुलित करें? अन्याय के खिलाफ खड़े रहना, लेकिन साथ ही दूसरों के लिए दया दिखाना—यही अपेक्षा है। प्रतिदिन के निर्णयों में धर्म और न्याय की राह चुनें; और अपनी करुणा से समाज के छोटे-छोटे दुखों को कम करने में सहायता करें।

छोटा सार

भजन 33:5 बताता है कि ईश्वर की आचार-व्यवस्था धर्म-न्याय से संचालित है और उसकी करुणा अवनी से लेकर पृथ्वी तक फैलती है। यह कथन विश्वासियों को आश्वस्त करता है कि ईश्वर न सिर्फ सही निर्णय लेते हैं, बल्कि उनके प्रेम में भी जीवन की हर दिशा प्रकाशित होती है।

हिंदी स्रोत-सम्पादन के संकेत

इस पंक्ति के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार मिलते हैं: उनके अनुसार यह verse ईश्वर के निरपेक्ष नैतिक अधिकार और मानवीय दया की संगति को उद्घाटित करता है—न्याय के साथ करुणा और करुणा के साथ न्याय।

क्लिप-उद्धरण: यदि उपलब्ध हो, तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे शब्दों के छोटे उद्धरणों का उल्लेख ठीक वही वाक्यांशों के साथ किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 33:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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