भजन संहिता 45:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तूने धर्म से प्रीति और दुष्टता से बैर रखा है। इस कारण परमेश्‍वर ने हाँ, तेरे परमेश्‍वर ने तुझको तेरे साथियों से अधिक हर्ष के तेल से अभिषेक किया है। (इब्रा. 1:8,9)

भजन संहिता 45:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 45:7 (HINIRV) — तुरंत संदर्भ

यह पद यीशु या दुल्हे के बारे में नहीं एक अत्यंत शक्तिशाली दुआरे का उद्घोष है: परमेश्वर से प्रभुत्व और न्याय में दृढ़ आस्था के साथ एक राजा या सेवक की प्रतिष्ठा। यहाँ कहा गया है कि परमेश्वर ने पवित्रता और सत्य के कारण तुझको तेरे साथियों से अधिक हर्ष के तेल से अभिषेक किया है। यह अभिषेक राजसी पहचान और आशीर्वाद की पुष्टि है, जिसमें धर्म के साथ प्रेम और दुष्टता के विरुद्ध बैर की महत्ता उजागर होती है। इब्राहीम लेखन के साथ संगति में यह दिखाता है कि दया और धर्मप्रियता ही ईश्वर की स्वीकृति को प्राप्त करते हैं।

शब्दार्थ और चित्रार्थ

  • धर्म से प्रीति— सत्य और न्याय के साथ प्रेम। परमेश्वर के सामने चरितार्थ होने वाला नैतिक प्रेम; बुराई से दूरी बनाना और सच्ची निष्ठा रखना।
  • दुष्टता से बैर— दुष्पराक्रम, पाप और अधर्म के विरुद्ध कठोर दूरी; आत्मिक अनुशासन और पाप से कटाव।
  • हर्ष के तेल से अभिषेक— राजसी या पवित्र नियुक्ति का प्रतीक। तेल का अभिषेक सामान्यतः राज्य-प्राप्ति, पवित्रता और आनंद का संकेत है; यहाँ यह दर्शाता है कि भक्त को परमेश्वर ने विशेष रूप से सम्मानित किया है।

परमेश्वर के बारे में निहित संकेत

यह पद परमेश्वर की न्यायप्रियता और दयालुता के साथ, भक्त के लिए विशेष हर्ष और अभिषेक की पुष्टि करता है। यह बताता है कि परमेश्वर धर्म और प्रेम पर आधारित राज्य-योजना में विश्वासयोग्य को अधिक आनंद और प्रतिष्ठा प्रदान करता है। इब्राहीम के संदर्भ (इब्र. 1:8-9) के साथ चिर-परिचित पाठक को यह याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने पुत्र या राजाओं के लिए न्याय और भक्ति की समर्थ परंपरा को बनाए रखता है।

संदर्भ-आधार: मिलते-जुलते विचार

  • इब्रानियों 1:8-9— परमेश्वर के पुत्र के रूप में अभिषेक और धर्म के प्रेम की महत्ता; सत्ता और भक्ति का संगम। यह दिखाता है कि देव-राज्य के दूतावर्त में धर्म-प्रेम की भूमिका स्थायी है।
  • यशायाह 61:3— जो लोग दुखित हों, उनके लिए तेल-आनंद और मुक्ति का अभिषेक; अभिषेक एक परिवर्तनकारी आशीर्वाद है।

संभव cross-references का सारांश: धर्म-प्रेम का समर्पण और दुष्टता से बैर की दृढ़ता—ये दो प्रमुख धारणाएं सभी संदर्भों में एक समान धागे से जुड़ी हैं।

आज के समय में आवेदन

1) आप अपने जीवन में धर्म से प्रीति को प्राथमिकता दें: सत्य, न्याय और प्रेम के साथ व्यवहार करें; पाखंड से बचें।

2) दुष्टता या पाप के विरुद्ध स्पष्ट सीमाएं तय करें—कठोर नैतिकता बनाये रखें, ताकि आंतरिक शांति और ईश्वर की कृपा बनी रहे।

3) परमेश्वर की अभिषेकिक कृपा को स्वीकारें: जैसे तेल से अभिषेक राज-कार्य की पुष्टि है, वैसे ही आज भी ईश्वर की संतुष्टि और आशीर्वाद आपके लिए नई दिशा और हर्ष का स्रोत बन सकता है।

छोटी स्पष्ट व्याख्या — संस्करण-नोट

इस पंक्ति का मूल तत्त्व यह है कि परमेश्वर धर्म के प्रेम में वृद्धि देता है और पाप से दूर रहने पर भक्त को विशेष आनंद और मान्यता से स्थापित करता है। यह इब्राहीम संदर्भों के साथ मिलकर एक ऐसी विधान-योजना की ओर संकेत करता है जिसमें नैतिक प्रतिबद्धता और दया एक साथ चलते हैं।

उद्धृत निष्कर्ष: धर्म से प्यार और दुष्टता से बैर, परमेश्वर की सर्वोच्च स्वीकृति और अभिषेक का मार्ग बनाते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 45:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इब्रानियों 1:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
इब्रानियों 1:9 (HINIRV) »
तूने धार्मिकता से प्रेम और अधर्म से बैर रखा; इस कारण परमेश्‍वर, तेरे परमेश्‍वर, ने तेरे साथियों से बढ़कर हर्षरूपी तेल से तेरा अभिषेक किया।” (भज. 45:7)

भजन संहिता 33:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 33:5 (HINIRV) »
वह धर्म और न्याय से प्रीति रखता है; यहोवा की करुणा से पृथ्वी भरपूर है।

भजन संहिता 21:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 21:6 (HINIRV) »
क्योंकि तूने उसको सर्वदा के लिये आशीषित किया है*; तू अपने सम्मुख उसको हर्ष और आनन्द से भर देता है।

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