भजन संहिता 36:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तेरा धर्म ऊँचे पर्वतों के समान है, तेरा न्याय अथाह सागर के समान हैं; हे यहोवा, तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है।

भजन संहिता 36:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 36:6 (HINIRV) — संदर्भित मैदान: परम धर्म और न्याय की गहराई

तुरंत के संदर्भ की पंहुच: भजन 36 एक भक्त की ईश्वर के प्रति रौबदार श्रद्धा का गीत है, जिसमें वे यहोवा के उद्धारक गुणों को हूबहू अनुभव करते हैं—उसकी कृपा, न्याय और भलाई की असीम गहराई को वे शब्दों में बांधते हैं। इस पद में भनित है कि परमेश्वर का धाम और न्याय दो निरपेक्ष धारणाएं हैं जो सृष्टि के हर आयाम को नियंत्रित करती हैं: धर्म ऊँचे पर्वतों के समान दृढ़, न्याय अथाह सागर के समान विशाल।

इस पाठ से ईश्वर या आस्था के बारे में क्या खुलता है

यह पद यह दर्शाता है कि परमेश्वर का धर्म (नयाय) और उसका न्याय, उसकी पवित्रता और प्रामाणिकता से परे नहीं हैं, बल्कि वे क्रमशः मानवीय जीवन के ऊँच-नीच, संकट और सांसारिक खतरे के बीच भी समान रहते हैं। धर्म ऊँचे पर्वतों के समान दृढ़ और अडिग है—यानी यह स्थिर और भरोसेमंद है, जिसे टिकाऊता और अखंडता देती है। न्याय सागर के समान अथाह है—गहराई, विशालता और निर्भीकता की प्रतीक है, जो सभी परिस्थितियों में न्यायपूर्ण निर्णय दर्शाता है। भगवान की रक्षा का आश्वासन इस वाक्य के अंत में स्पष्ट होता है: हे यहोवा, तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है।

शब्दों/छवियों की स्पष्टीकरण

  • धर्म/न्याय: यहाँ न्याय के संकल्प के रूप में है—क्योंकि परमेश्वर की नैतिक व्यवस्था सब पर समान लागू होती है, और वह सच के साथ काम करता है।
  • ऊँचे पर्वत का चित्र: स्थिरता, ऊँचाई और दृढ़ विश्वास का प्रतीक—जो भरोसे के निवास का परिचय देता है।
  • अथाह सागर: असीम गहराई और व्यापकता—जहां न्याय की परिधि स्पष्ट और गूढ़ दोनों बनकर उभरती है।
  • परमेश्वर की रक्षा: सभी प्राणी—मनुष्यों और पशुओं के लिए उसका संरक्षण प्रदर्शित है, यह उसकी करुणा और समानता को दिखाता है।

अनुष्ठानित क्रॉस-रेफरंसेस (संक्षिप्त बिंदु)

1) गवाही में परमेश्वर की निरंतरता: भजन 33:18-19—न्याय और धर्म की स्थिरता की पुष्टि; 2) क्रमिक दया: भज 145:9—यहोवा सभी पर कृपालु और ऊँचे दया-हित के साथ देखभाल करता है; 3) सुरक्षा का भरोसा: भयावह संकट के समय ईश्वर की रक्षा की पुष्टि OT के अनेक ग्रंथों में मिलती है।

आधुनिक दिनचर्या के लिए अनुप्रयोग

  • विश्वास की स्थिरता: जब जीवन में ऊँच-नीच आए, तो परमेश्वर के धर्म की दृढ़ता—जो पर्वत की तरह अडिग है—हमें भरोसे में बनाए रखती है।
  • न्याय की गहराई पर भरोसा: जटिल समस्याओं में भी ईश्वर का न्याय स्पष्ट और निष्पक्ष रहता है; हम भी अन्याय के बजाय सत्य और दया चुनें।
  • रक्षा की आशा: दैनंदिन संकटों में परमेश्वर की रक्षा की याद दिलाती है कि वह मनुष्य और पशु—सबके लिए केयारी है; एक समावेशी दया का अनुभव करें।

महत्वपूर्ण उद्धरण (महत्वपूर्ण टिप्पणी)

भजन संहिता 36:6 के बारे में मानक टिप्पणियाँ इस प्रकार प्रवाहित होती हैं: धर्म की दृढ़ता पर्वत कीए समान है और न्याय की अथाह गहराई सागर के समान — ये दोनों अर्थ बताते हैं कि ईश्वर की नैतिक व्यवस्था आकाश-भूमि सभी को समान रूप से नियंत्रित करती है और उसका सूर्य-चन्द्र जैसा प्रेम सभी जीवों के लिए उपलब्ध है।

नोट: नीचे दिए गए सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सार को एक साथ समेकित किया गया है, ताकि पाठ की गहराई साफ़ और बहु-आयामी बने रहे:

Matthew Henry के संकेत: धर्म की दृढ़ता और न्याय की गहराई को वे एक साथ परमेश्वर के गुण के रूप में देखते हैं, जो विश्वासियों को स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करते हैं।

Albert Barnes के संकेत: परमेश्वर का न्याय हर स्थिति में निष्पक्ष और सच्चा है; वह रक्षक और कानून-प्रणोदक दोनों रूपों में कार्य करता है।

Adam Clarke के संकेत: भगवान के गुण-धर्मों की उन्नत व्याख्या में धर्म और न्याय का संयुक्त चित्र प्रस्तुत किया गया है—धर्म पर्वत की तरह ठोस, न्याय सागर की तरह गहरा।

यह टिप्पणी पाठ के प्रति हल्का-फुल्का समापन देती है कि आज भी परमेश्वर की व्यवस्था और उसकी दया दोनों साथ-साथ चलती हैं, और हमें उनके नमुणे पर चलना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 36:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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